आईओसी का बड़ा प्रस्ताव: ओलंपिक कार्यक्रम और मेजबान चयन प्रक्रिया में ऐतिहासिक बदलाव, 2032 ब्रिस्बेन से लागू होने की संभावना
सारांश
मुख्य बातें
इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने 11 जून 2025 को जिनेवा में ओलंपिक खेलों के कार्यक्रम और मेजबान शहर चयन की प्रक्रिया में व्यापक सुधारों का प्रस्ताव रखा, जिनका उद्देश्य पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, किफायती, टिकाऊ और खिलाड़ी-केंद्रित बनाना है। आईओसी की कार्यकारी बोर्ड बैठक के बाद अध्यक्ष क्रिस्टी कोवेंट्री ने इन प्रस्तावों का विवरण साझा किया। ये सुधार संगठन की 'फिट फॉर द फ्यूचर' पहल का हिस्सा हैं।
मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव
प्रस्तावित सुधारों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव खेलों के मूल्यांकन के तरीके में है। अब तक आईओसी किसी खेल का समग्र मूल्यांकन करता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत उस खेल के भीतर मौजूद अलग-अलग डिसिप्लिन (प्रतियोगिता श्रेणियों) का स्वतंत्र रूप से आकलन किया जाएगा। आईओसी के अनुसार इससे यह बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा कि किसी विशेष डिसिप्लिन के लिए कितने संसाधनों, मैदानों और बजट की आवश्यकता होगी। यदि इस प्रस्ताव को आईओसी सत्र में मंजूरी मिल जाती है, तो नई प्रणाली 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक से लागू की जा सकती है।
डिसिप्लिन की दो श्रेणियाँ
नए ढाँचे के तहत सभी डिसिप्लिन को दो वर्गों में विभाजित किया जाएगा। पहली श्रेणी में वे डिसिप्लिन होंगे जो पहले से ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जबकि दूसरी श्रेणी में वे नए डिसिप्लिन शामिल होंगे जो ओलंपिक में प्रवेश के इच्छुक हैं। दोनों समूहों का मूल्यांकन समान मानकों पर होगा, हालाँकि उनके उपलब्ध आँकड़ों और प्रदर्शन इतिहास को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया अलग-अलग रहेगी।
पात्रता जाँच और मानक
प्रत्येक डिसिप्लिन को सबसे पहले एक पात्रता जाँच से गुज़रना होगा, जिसमें सुशासन, एंटी-डोपिंग नियमों का पालन, खेल की ईमानदारी और खिलाड़ियों की सुरक्षा जैसे मानदंडों की समीक्षा होगी। इसके बाद वैश्विक लोकप्रियता, आयोजन लागत, संचालन की जटिलता और खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व के आधार पर विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। अंतिम चरण में सर्वश्रेष्ठ नए उम्मीदवार डिसिप्लिन और सबसे कमज़ोर प्रदर्शन करने वाले मौजूदा डिसिप्लिन की सीधी तुलना की जाएगी, जिससे यह तय होगा कि ओलंपिक कार्यक्रम में किसे स्थान मिलना चाहिए।
मेजबान शहर चयन में 'स्ट्रेटेजिक डायलॉग' चरण
मेजबान शहर चयन प्रक्रिया में भी एक नया चरण जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसे 'स्ट्रेटेजिक डायलॉग' नाम दिया गया है। यह चरण इच्छुक देशों और शहरों की पहचान करने तथा उन्हें शॉर्टलिस्ट करने में सहायता करेगा, जिससे आगे की बातचीत अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी हो सकेगी। आईओसी का मानना है कि इससे संभावित मेजबान शहर कम खर्च में बेहतर योजनाएँ तैयार कर सकेंगे, सरकारों को दीर्घकालिक योजना बनाने में सुविधा होगी और जनसमर्थन जुटाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
सुधारों का महत्व
यदि आईओसी सत्र में इन प्रस्तावों को स्वीकृति मिलती है, तो इन्हें हाल के वर्षों में ओलंपिक प्रशासन में सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जाएगा। गौरतलब है कि ओलंपिक आयोजन की बढ़ती लागत और मेजबानी के लिए शहरों की घटती रुचि ने आईओसी को इस दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है। आने वाले सत्र में इन प्रस्तावों पर सदस्य देशों का मतदान होगा, जो ओलंपिक के भविष्य की दिशा तय करेगा।