क्या आईपीएल ने भारत की जुनूनी भीड़ के दबाव से निपटना सिखाया?
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने कहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने विदेशी खिलाड़ियों को भारत की जुनूनी और डराने वाली भीड़ के सामने खेलते समय सामना करने वाले दबाव को संभालने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है। टी20 विश्व कप 2026 के आयोजन से पहले, जो अगले महीने भारत और श्रीलंका में शुरू होगा, हुसैन ने बताया कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को भारतीय खेल माहौल के लिए तैयार कर दिया है।
नासिर हुसैन ने कहा, "भारत में खेलते वक्त विरोधी टीमों को सिर्फ मजबूत भारतीय टीम का सामना नहीं करना पड़ता, बल्कि विशाल और भावनात्मक भीड़ का भी सामना करना पड़ता है।" उन्होंने हाल में ऑस्ट्रेलिया और भारत की महिला टीम के बीच खेले गए विश्व कप सेमीफाइनल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब मैच का रुख भारत की ओर मुड़ता है, तो उसे पलटना बहुत कठिन हो जाता है। पहले, जब सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज बल्लेबाज क्रीज पर आते थे, तो गेंदबाजों के चेहरे पर डर साफ दिखाई देता था।
पूर्व इंग्लैंड कप्तान ने कहा, "अब विदेशी खिलाड़ी नियमित रूप से भारत के बड़े स्टेडियमों में खेलते हैं, जहां उन्हें शोर, दबाव और उम्मीदों के बीच प्रदर्शन करने का मौका मिलता है। इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत में खेलते समय कम घबराहट महसूस होती है। फ्रेंचाइजी क्रिकेट का सबसे बड़ा फायदा यही है कि खिलाड़ी स्थिति, मैदान और भीड़ से डरने के बजाय उन्हें स्वीकार करना सीख जाते हैं।"
पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने कहा कि समय के साथ भारतीय टीम का भी भीड़ के दबाव को देखने का नजरिया बदल गया है। 1996 के विश्व कप सेमीफाइनल में भारतीय टीम दबाव संभाल नहीं पाई थी, जबकि 2011 के विश्व कप में गैरी कर्स्टन और मानसिक कंडीशनिंग कोच पैडी अप्टन के मार्गदर्शन में टीम ने भीड़ को सकारात्मक ताकत के रूप में देखा।
कार्तिक ने आगे कहा, "2023 के विश्व कप में भारतीय टीम ने घरेलू भीड़ से मिलने वाली ऊर्जा का बेहतरीन उपयोग किया। उन्होंने न केवल शानदार क्रिकेट खेला, बल्कि दर्शकों के समर्थन को अपने प्रदर्शन में बदलने में भी सफल रहे।" उनके अनुसार, यही मानसिक बदलाव आधुनिक भारतीय क्रिकेट और आईपीएल संस्कृति की सबसे बड़ी उपलब्धि है।