क्या अंजुम मौदगिल और बजरंग लाल ताखर ने 5 जनवरी को खेलों में नया मील का पत्थर स्थापित किया?
सारांश
Key Takeaways
- अंजुम मौदगिल का निशानेबाजी में प्रभावशाली करियर।
- बजरंग लाल ताखर की ऐतिहासिक उपलब्धियां।
- दोनों खिलाड़ियों का अगला लक्ष्य 2026 एशियन गेम्स।
- भारत में निशानेबाजी और नौकायन की बढ़ती लोकप्रियता।
- खेलों में महिलाओं और पुरुषों की समान उपलब्धियां।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में खेलों के क्षेत्र में निशानेबाजी और नौकायन तेजी से लोकप्रिय होते जा रहे हैं। 5 जनवरी को इन दोनों खेलों से जुड़े दो प्रमुख खिलाड़ियों का जन्मदिन है। निशानेबाजी में अंजुम मौदगिल और नौकायन में बजरंग लाल ताखर ने अद्वितीय योगदान दिया है।
अंजुम मौदगिल का जन्म 5 जनवरी 1994 को चंडीगढ़ में हुआ। वह एक उत्कृष्ट निशानेबाज हैं। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने इस खेल में रुचि दिखाई, जो कॉलेज के समय तक उनके लिए एक जुनून बन गया। राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में उन्होंने सफलता प्राप्त की है।
अंजुम विशेष रूप से 10 मीटर एयर राइफल और 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में प्रतिस्पर्धा करती हैं।
अंजुम ने 2016 में म्यूनिख में आयोजित विश्व कप में 9वां स्थान हासिल किया और विश्व विश्वविद्यालय चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता। उन्होंने दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक भी जीता। 2017 में, सरदार सज्जन सिंह सेठी मेमोरियल मास्टर्स में उन्होंने रजत पदक जीता। 2018 में, मैक्सिको में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप में महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन स्पर्धा में रजत पदक जीता। राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने 455.7 अंक प्राप्त कर रजत पदक हासिल किया, जिसमें नीलिंग में 151.9 और प्रोन में 157.1 अंक शामिल थे। क्वालिफिकेशन राउंड में, उन्होंने सीडब्ल्यूजी क्वालिफाइंग रिकॉर्ड को तोड़ दिया। मौदगिल ने 589 का स्कोर किया (नीलिंग में 196, प्रोन में 199 और स्टैंडिंग में 194)। वह महिलाओं की 50 मीटर 3पी में भारत की नंबर 1 हैं।
अंजुम का अगला लक्ष्य 2026 एशियन गेम्स और 2028 लॉस एंजेल्स ओलंपिक में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना है।
रोइंग में बजरंग लाल ताखर का जन्म 5 जनवरी 1981 को राजस्थान के सीकर के पास एक छोटे से गांव में हुआ। भारतीय सेना की राजपुताना राइफल्स रेजिमेंट से रिटायर्ड नायब सूबेदार, ताखर ने 2001 में सेना में रहते हुए रोइंग की दुनिया से परिचित हुए। ताखर ने 2004 में राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त की।
2006 के साउथ एशियन गेम्स में उन्होंने सिंगल और डबल स्कल्स में दो स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने भारत के लिए पहला व्यक्तिगत एशियन गेम्स मेडल भी जीता। एशियाई चैंपियनशिप 2007 और 2009 में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत की। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2010 के ग्वांगझू एशियाई खेलों में मिली, जहां उन्होंने पुरुषों की सिंगल स्कल्स में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत नौकायन स्वर्ण पदक जीता, जिसमें उन्होंने 7:04.78 मिनट का समय लिया। यह ऐतिहासिक जीत उन्हें व्यक्तिगत एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय रोवर बना देती है। ताखर ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे।
भारत सरकार ने उन्हें 2008 में अर्जुन पुरस्कार और 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया। 2014 एशियाई रोइंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद उन्होंने खेल से विदाई ले ली थी। संन्यास के बाद, वह कोचिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं।