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हरमनप्रीत कौर: 'कप्तानी ने मुझे आगे रहकर जिम्मेदारी लेना सिखाया', वनडे वर्ल्ड कप 2025 जीत पर जताई कृतज्ञता

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हरमनप्रीत कौर: 'कप्तानी ने मुझे आगे रहकर जिम्मेदारी लेना सिखाया', वनडे वर्ल्ड कप 2025 जीत पर जताई कृतज्ञता

सारांश

एक दशक से अधिक की कप्तानी के बाद हरमनप्रीत कौर ने खुलकर बात की — वनडे वर्ल्ड कप 2025 की जीत, एशियन गेम्स 2026 का गोल्ड और अब स्मृति मंधाना को कमान सौंपने का फैसला। यह सिर्फ पद छोड़ना नहीं, बल्कि नेतृत्व के एक नए अध्याय की शुरुआत है।

मुख्य बातें

हरमनप्रीत कौर ने 2012 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी संभाली और एक दशक से अधिक समय तक नेतृत्व किया।
उनकी कप्तानी में भारत ने वनडे वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीता और एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल हासिल किया।
हरमनप्रीत ने कहा कि कप्तानी ने उन्हें आलोचना और जीत — दोनों की जिम्मेदारी लेना सिखाया।
उन्होंने स्मृति मंधाना के नेतृत्व में पूरा भरोसा जताया और कहा कि उनकी आपसी समझ टीम के काम आएगी।
कप्तानी छोड़ने का फैसला किसी हार की वजह से नहीं, बल्कि अपने करियर की दिशा को लेकर उनके स्वयं के आकलन का नतीजा था।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक विशेष बातचीत में एक दशक से अधिक की अपनी कप्तानी के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि नेतृत्व की जिम्मेदारी ने उन्हें आलोचना और सफलता, दोनों को समान भाव से स्वीकार करना सिखाया। वनडे वर्ल्ड कप 2025 का खिताब और एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल उनकी कप्तानी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं।

कप्तानी का सफर: 2012 से शुरू हुई जिम्मेदारी

हरमनप्रीत ने 2012 में पहली बार भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कमान संभाली थी। उन्होंने बताया कि इस पद ने उन्हें सिर्फ मैदान पर नहीं, बल्कि जीवन के हर मोर्चे पर नेतृत्व करना सिखाया। हरमनप्रीत के शब्दों में, 'आलोचना तब होती है जब लोगों को हमसे उम्मीदें होती हैं। कभी-कभी बुरा लगता है जब एक टीम के तौर पर आप अपनी ही उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, और जाहिर है, तब भी बुरा लगता है जब आपको देखने और सपोर्ट करने वाले लोग भी आपसे अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद कर रहे हों।'

उन्होंने जोड़ा, 'कप्तानी ने मुझे सबसे आगे रहकर जिम्मेदारी लेना सिखाया — न सिर्फ आलोचना के लिए, बल्कि जीत के लिए भी। इसने मुझे सिखाया कि लीडरशिप का मतलब है हर दौर में अपनी टीम के साथ खड़े रहना, हर अनुभव से सीखना और आगे बढ़ते रहना।'

व्यक्तिगत लक्ष्य और टीम हित के बीच संतुलन

हरमनप्रीत ने स्वीकार किया कि कप्तान के रूप में कभी-कभी उन्हें अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को टीम की जरूरतों के पीछे रखना पड़ा। उनके अनुसार, 'एक खिलाड़ी के तौर पर आपके पास फैसले लेने की कुछ आजादी होती है, लेकिन कप्तान के तौर पर कई बार आपको अपनी व्यक्तिगत उलझनों को किनारे रखकर आगे बढ़ना पड़ता है, क्योंकि पूरी टीम आपके पीछे होती है।'

गौरतलब है कि हरमनप्रीत ने बल्लेबाजी को हमेशा प्राथमिकता दी — यहाँ तक कि कप्तानी के दबाव में भी। उन्होंने कहा कि अब वह अपनी भूमिका को और स्पष्टता के साथ समझते हुए, क्रिकेट के हर पल का आनंद लेना चाहती हैं।

पूरी टीम में लीडरशिप का बीज

हरमनप्रीत ने इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व का गुण केवल कप्तान तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि जिम्मेदारी, कप्तानी और लीडरशिप हमेशा मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा रहेंगी। मैं हमेशा हर खिलाड़ी में लीडरशिप का बीज बोना चाहती थी, क्योंकि यह आपको जिम्मेदार, जवाबदेह, संवेदनशील, उदार और दयालु बनाता है, साथ ही अधिक तेज और निर्णायक भी।'

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारतीय महिला क्रिकेट तेजी से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है और युवा खिलाड़ियों की एक नई पीढ़ी उभर रही है।

स्मृति मंधाना को बधाई और नई पारी

अब जब स्मृति मंधाना भारतीय महिला टीम की कमान संभाल रही हैं, हरमनप्रीत ने अपनी दीर्घकालिक साथी के प्रति गहरा विश्वास जताया। उन्होंने कहा, 'मुझे बहुत खुशी है कि यह स्मृति हैं, जो एक दशक से ज्यादा समय से मेरे साथ रही हैं। हमने साथ में समय बिताया है, मिलकर फैसले लिए हैं और भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ते देखा है।'

उन्होंने स्पष्ट किया कि कप्तानी छोड़ने का फैसला किसी एक हार या टूर्नामेंट की वजह से नहीं था, बल्कि यह उनके अपने करियर के आकलन का स्वाभाविक हिस्सा था।

वनडे वर्ल्ड कप जीत: सपने की पूर्ति

हरमनप्रीत ने वनडे वर्ल्ड कप 2025 की जीत को अपने करियर का सबसे बड़ा सपना बताया और कहा कि यह सपना उनके कप्तानी सफर के शुरुआती वर्षों में ही साकार हो गया। उन्होंने कहा, 'आज, मेरे मन में गहरी संतुष्टि और कृतज्ञता का भाव है। कोई पछतावा नहीं है।' हरमनप्रीत का यह खुला और आत्मचिंतनपूर्ण बयान भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह था लीडरशिप को केवल कप्तान के पद तक सीमित न रखना। हालाँकि, यह भी सवाल उठता है कि क्या इस बदलाव के दौर में — जब स्मृति मंधाना नई जिम्मेदारी संभाल रही हैं — टीम की संरचनागत गहराई वास्तव में उस स्तर तक पहुँच पाई है जहाँ एक खिलाड़ी की कप्तानी से टीम पर कोई फर्क न पड़े। वनडे वर्ल्ड कप 2025 और एशियन गेम्स 2026 की सफलताएँ प्रेरणादायक हैं, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि इन जीतों के बाद युवा पीढ़ी को नेतृत्व प्रशिक्षण में कितना संस्थागत निवेश हुआ है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरमनप्रीत कौर ने कब से भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी संभाली थी?
हरमनप्रीत कौर ने 2012 में पहली बार भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कमान संभाली थी और एक दशक से अधिक समय तक टीम का नेतृत्व किया। उनकी कप्तानी में भारत ने वनडे वर्ल्ड कप 2025 और एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीता।
हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी क्यों छोड़ी?
हरमनप्रीत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी एक हार या टूर्नामेंट की वजह से नहीं था, बल्कि उनके अपने करियर की दिशा के बारे में व्यक्तिगत आकलन का स्वाभाविक नतीजा था। उन्होंने कहा कि वनडे वर्ल्ड कप जीतना उनका सबसे बड़ा सपना था जो पूरा हो गया।
अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान कौन हैं?
हरमनप्रीत कौर के बाद स्मृति मंधाना ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी संभाली है। हरमनप्रीत ने कहा कि उन्हें खुशी है कि यह जिम्मेदारी स्मृति को मिली, जो एक दशक से अधिक समय से उनकी साथी रही हैं।
हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियाँ क्या रहीं?
हरमनप्रीत की कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने वनडे वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीता और एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल हासिल किया। ये उनके नेतृत्व काल की दो सबसे बड़ी सामूहिक उपलब्धियाँ मानी जाती हैं।
हरमनप्रीत कौर के अनुसार एक अच्छे कप्तान की क्या खूबी होती है?
हरमनप्रीत के अनुसार, एक अच्छे कप्तान को हर दौर में टीम के साथ खड़े रहना चाहिए और आलोचना व सफलता दोनों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उनका मानना है कि टीम के हर खिलाड़ी में लीडरशिप का गुण होना चाहिए, ताकि जिम्मेदारी सिर्फ कप्तान पर न रहे।
राष्ट्र प्रेस
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