हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी कप्तानी: विश्व कप, 2 एशियन गेम्स गोल्ड समेत 10 साल का स्वर्णिम दौर समाप्त
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सबसे सफल कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 6 अक्टूबर 2026 को तीनों फॉर्मेट की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया। 37 वर्षीय हरमनप्रीत ने यह घोषणा सोशल मीडिया पर की और स्पष्ट किया कि वे बतौर खिलाड़ी टीम का हिस्सा बनी रहेंगी। उनकी विदाई के साथ भारतीय महिला क्रिकेट का एक ऐसा अध्याय बंद हुआ, जिसमें आईसीसी वनडे विश्व कप 2025, लगातार दो एशियन गेम्स गोल्ड और 4 एशिया कप खिताब शामिल हैं।
10 साल की कप्तानी: उपलब्धियों का लेखा-जोखा
हरमनप्रीत 2016 में पूर्णकालिक कप्तान बनीं और अगले एक दशक में उन्होंने भारतीय टीम को 5 टेस्ट, 51 वनडे और 155 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में नेतृत्व दिया। इससे पहले वह 2012 में अस्थायी कप्तान के रूप में भी दायित्व संभाल चुकी थीं।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही आईसीसी महिला वनडे विश्व कप 2025 में भारत की ऐतिहासिक जीत, जिसमें फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को पराजित किया गया। यह भारतीय महिला टीम का पहला आईसीसी खिताब था।
एशियन गेम्स से लेकर लॉर्ड्स तक
हरमनप्रीत की अगुआई में भारतीय टीम ने हांगझोऊ एशियन गेम्स 2023 और आइची-नागोया एशियन गेम्स में लगातार दो बार स्वर्ण पदक जीता — एशियाई खेलों में यह सिलसिला अपने आप में उल्लेखनीय है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में टीम ने रजत पदक हासिल किया।
एशिया कप के मोर्चे पर भी हरमनप्रीत का रिकॉर्ड बेमिसाल है — उनकी कप्तानी में भारत ने 2012, 2016, 2022 और 2026 में एशिया कप जीते। हाल ही में लॉर्ड्स में खेले गए महिलाओं के पहले टेस्ट में हरमनप्रीत की टीम ने मेज़बान इंग्लैंड को हराकर इतिहास रचा।
हरमनप्रीत से पहले और बाद का भारतीय महिला क्रिकेट
गौरतलब है कि हरमनप्रीत के कप्तान बनने से पहले भारतीय महिला टीम बड़े मंचों पर प्रतिस्पर्धा तो करती थी, लेकिन निर्णायक जीत से प्रायः चूक जाती थी। उनके नेतृत्व में टीम की मानसिकता और रणनीतिक दृष्टिकोण दोनों में बदलाव आया, जिसने भारत को वैश्विक महिला क्रिकेट में एक सशक्त शक्ति के रूप में स्थापित किया। यह ऐसे समय में आया जब भारत में महिला क्रिकेट को लेकर दर्शकों की रुचि और निवेश दोनों तेज़ी से बढ़ रहे थे।
आगे क्या: स्मृति मंधाना की ओर निगाहें
सूत्रों के अनुसार, उपकप्तान स्मृति मंधाना तीनों फॉर्मेट में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नई कप्तान बन सकती हैं। बोर्ड की ओर से आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। हरमनप्रीत के बाद मंधाना के नेतृत्व में टीम उस विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती का सामना करेगी जो पिछले एक दशक में खड़ी की गई है।