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क्या कृष्णन शशिकिरण ने विश्वनाथन आनंद को हराकर दमदार करियर बनाया?

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क्या कृष्णन शशिकिरण ने विश्वनाथन आनंद को हराकर दमदार करियर बनाया?

सारांश

कृष्णन शशिकिरण का शतरंज करियर आश्चर्यजनक उपलब्धियों से भरा है, जिनमें विश्वनाथन आनंद को हराना शामिल है। जानें उनके सफर के बारे में।

मुख्य बातें

कृष्णन शशिकिरण ने 2002 में विश्वनाथन आनंद को हराया।
उन्होंने 2700 की फिडे रेटिंग प्राप्त की।
कृष्णन का जन्म 7 जनवरी 1981 को हुआ।
उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय चेस टूर्नामेंट में विजय प्राप्त की।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कृष्णन शशिकिरण का नाम शतरंज की दुनिया में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वर्ष 2002 में, उन्होंने भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद को हराकर सभी को चौंका दिया।

कृष्णन शशिकिरण का जन्म 7 जनवरी 1981 को चेन्नई में हुआ। उनके पिता भी एक अनुभवी शतरंज खिलाड़ी थे। शशिकिरण ने 9 साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया और अपने पिता के मार्गदर्शन में घरेलू प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त की। उन्होंने अंडर-18 नेशनल शतरंज चैंपियनशिप जीती। वर्ष 1999 में, उन्होंने पहली बार इंडियन नेशनल 'ए' चेस चैंपियनशिप जीती।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, कृष्णन शशिकिरण ने 1995 में अपने पहले मैच में चेक गणराज्य के टॉमस ओरल के खिलाफ हार का सामना किया था। इसके बाद, उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में अंडर-18 का खिताब जीता, और दो बार ब्रिटिश अंडर 21 चेस चैंपियनशिप में विजय प्राप्त की। 1998 के एलिस्टा चेस ओलंपियाड में, उन्होंने भारतीय चेस टीम का प्रतिनिधित्व किया और चौथे बोर्ड पर 8.5/11 पॉइंट्स स्कोर किए।

उसी वर्ष, उन्होंने अपना पहला ग्रैंड मास्टर नॉर्म प्राप्त किया जब वे टोरक्वे में हुए ब्रिटिश ओपन टूर्नामेंट में छठे स्थान पर रहे। इसके बाद, उन्होंने एंडोरा ओपन और स्पेन में बालगुएर ओपन चेस टूर्नामेंट भी जीते। 1999 में, उन्होंने एशियन जूनियर चेस चैंपियनशिप में विजय प्राप्त की।

2000 में, उन्होंने चेन्नई में हुए पेंटामीडिया कैटेगरी इलेवन ग्रैंड मास्टर टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता। उसी वर्ष, उन्होंने उदयपुर में हुई एशियन चेस चैंपियनशिप में ग्रैंड मास्टर टाइटल के लिए अपना दूसरा नॉर्म प्राप्त किया। 19 वर्ष की आयु में, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ग्रैंड मास्टर का खिताब जीता।

साल 2002 उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष था। इस वर्ष, उन्होंने विश्व कप शतरंज टूर्नामेंट में विश्वनाथन आनंद को हराया, जिसने शतरंज प्रेमियों को चौंका दिया। इसके अलावा, उन्होंने डेनमार्क के कोपेनहेगन में हुए पोलिटिकेन कप में स्वर्ण पदक जीता।

जनवरी 2007 में, कृष्णन शशिकिरण ने 2700 की फिडे रेटिंग प्राप्त की और विश्वनाथन आनंद के बाद 2700 का आंकड़ा पार करने वाले दूसरे भारतीय बने। 2008 में, उन्होंने नजडॉर्फ मेमोरियल शतरंज टूर्नामेंट जीता। जनवरी 2009 तक, वह दुनिया के शीर्ष 20 चेस खिलाड़ियों में शामिल थे।

कृष्णन शशिकिरण ने आधिकारिक रूप से शतरंज को अलविदा नहीं कहा है। उन्हें 2002 में भारतीय सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय शतरंज के विकास का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी है। उनकी जीत ने भारतीय खेलों में नए उत्साह का संचार किया है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृष्णन शशिकिरण ने कब विश्वनाथन आनंद को हराया?
कृष्णन शशिकिरण ने 2002 में विश्वनाथन आनंद को हराया।
कृष्णन शशिकिरण का जन्म कब हुआ?
कृष्णन शशिकिरण का जन्म 7 जनवरी 1981 को हुआ।
क्या कृष्णन शशिकिरण ने कोई पुरस्कार जीते हैं?
हाँ, उन्हें 2002 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कृष्णन शशिकिरण ने कितनी बार एशियन चेस चैंपियनशिप जीती है?
कृष्णन शशिकिरण ने 2000 में एशियन चेस चैंपियनशिप जीती।
कृष्णन शशिकिरण का पहला ग्रैंड मास्टर नॉर्म कब मिला?
उनका पहला ग्रैंड मास्टर नॉर्म 1998 में मिला।
राष्ट्र प्रेस
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