नारी कॉन्ट्रैक्टर: एक चोट ने समाप्त कर दिया भारतीय बल्लेबाज का खेल करियर
सारांश
Key Takeaways
- नारी कॉन्ट्रैक्टर एक प्रमुख भारतीय बल्लेबाज थे।
- उनका करियर चोट के कारण प्रभावित हुआ।
- उन्होंने 31 टेस्ट मैचों में 1,611 रन बनाए।
- उन्हें 2007 में सी. के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला।
- कॉन्ट्रैक्टर भारत के क्रिकेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण नाम हैं।
नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। क्रिकेट एक अत्यंत रोमांचक खेल है। यह खेल हमें दौलत और शोहरत के शिखर पर पहुंचा सकता है, लेकिन इसके साथ चोट लगने का खतर भी हमेशा बना रहता है। ऐसे कई क्रिकेटर हैं जिनका करियर चोट के कारण प्रभावित हुआ या समय से पहले समाप्त हो गया। भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज नारी कॉन्ट्रैक्टर का नाम इस सूची में प्रमुखता से लिया जाता है।
नारी कॉन्ट्रैक्टर का पूरा नाम नरीमन जमशेदजी नारी कॉन्ट्रैक्टर है। उनका जन्म 7 मार्च 1934 को गोधरा में हुआ था, जो तब बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिस्सा था। नारी कॉन्ट्रैक्टर ने 2 दिसंबर 1955 को न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया था। उन्होंने केवल टेस्ट मैच खेले। 26 वर्ष की आयु में उन्हें टीम इंडिया की कप्तानी भी सौंपी गई थी। उनका करियर अच्छे प्रदर्शन के साथ आगे बढ़ रहा था, लेकिन एक भयंकर चोट ने उनके करियर को समय से पहले समाप्त कर दिया।
1962 में भारत और वेस्टइंडीज के बीच किंगस्टन में एक टेस्ट मैच के दौरान कैरेबियाई तेज गेंदबाज चार्ली ग्रिफित की एक बाउंसर गेंद नारी कॉन्ट्रैक्टर के सिर पर लग गई। यह चोट घातक थी। कॉन्ट्रैक्टर 6 दिनों तक बेहोश रहे और काफी खून बह गया था। उस समय भारत के अलावा वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों ने उन्हें अपना खून दिया। डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए उनके सिर में मेटल की प्लेट लगाई। इस चोट के बाद, वह फिर कभी खेल नहीं पाए।
1955 से 1962 के बीच, उन्होंने 31 टेस्ट मैचों में 52 पारियों में 1 शतक और 11 अर्धशतकों की मदद से 1,611 रन बनाए। वहीं, 138 प्रथम श्रेणी मैचों में 22 शतक की मदद से उन्होंने 8,611 रन बनाए।
कॉन्ट्रैक्टर वर्तमान में मुंबई में रहते हैं। उन्हें 2007 में सी. के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था।