नारायण रामचंद्रन के निधन पर वर्ल्ड स्क्वैश का शोक, खेल जगत ने खोया महान नेता

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नारायण रामचंद्रन के निधन पर वर्ल्ड स्क्वैश का शोक, खेल जगत ने खोया महान नेता

सारांश

वर्ल्ड स्क्वैश फेडरेशन ने पूर्व अध्यक्ष नारायण रामचंद्रन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। 77 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

Key Takeaways

  • नारायण रामचंद्रन का निधन 77 वर्ष की आयु में हुआ।
  • उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को होगा।
  • वर्ल्ड स्क्वैश फेडरेशन ने उनके योगदान को सराहा।
  • उन्होंने भारतीय खेलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उनके नेतृत्व से स्क्वैश को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया गया।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वर्ल्ड स्क्वैश फेडरेशन ने अपने पूर्व अध्यक्ष और पहले मानद जीवन सदस्य नारायण रामचंद्रन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। नारायण रामचंद्रन का निधन गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद 77 वर्ष की आयु में हुआ। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को चेन्नई के बसंत नगर श्मशान घाट पर संपन्न होगा।

वर्ल्ड स्क्वैश के अध्यक्ष जेना वूल्ड्रिज ने कहा, "पिछले 25 वर्षों में, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर स्क्वैश के प्रति नारायण रामचंद्रन का समर्पण अद्वितीय था। उनकी विरासत कई तरीकों से जीवित रहेगी। जब हम इस साल के अंत में एशियन गेम्स स्क्वैश प्रतियोगिता में अपने खेल के लिए पहले ओलंपिक क्वालिफाइंग इवेंट को देखेंगे, तब हम उन्हें प्रेमपूर्वक याद करेंगे। इस इवेंट के आरंभ में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।"

स्क्वैश रैकेट फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी रामचंद्रन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, "एक दूरदर्शी नेता जिन्होंने भारत और विश्व में स्क्वैश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हम उनके परिवार और दोस्तों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट करते हैं। उनकी आत्मा को शांति मिले।"

आईओए के पूर्व सचिव जनरल राजीव मेहता ने भी रामचंद्रन के निधन पर शोक व्यक्त किया। मेहता ने फेसबुक पर लिखा, "इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एन. रामचंद्रन के निधन की खबर सुनकर मुझे बहुत दुःख हुआ। मैंने 2014 से 2017 के बीच उनके साथ काम किया और उन्हें एक शांत, स्पष्ट सोच वाले और सिद्धांतवादी नेता के रूप में याद करता हूं। उन्होंने आईओए में स्थिरता और संरचना की भावना को विकसित किया जब इसकी बहुत आवश्यकता थी।"

उन्होंने आगे कहा, "आईओए के अलावा, भारतीय खेलों में उनका योगदान बहुत बड़ा था। स्क्वैश प्रशासन में उनके नेतृत्व से लेकर देश में खेल प्रशासन को मजबूत करने में उनकी भूमिका तक। संस्थागत अनुशासन और सरलता के बीच संतुलन बनाने की उनकी क्षमता ने उन्हें सबसे अलग बना दिया। उन्हें न केवल उनके पदों के लिए, बल्कि जिस तरह से उन्होंने उन्हें निभाया, उसके लिए भी बहुत सम्मान के साथ याद किया जाएगा। उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।"

रामचंद्रन 2008 से 2016 के बीच विश्व स्क्वैश के अध्यक्ष रहे। वे आईओसी से मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन का नेतृत्व करने वाले पहले भारतीय थे। उन्होंने 2014 से 2017 के बीच इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने 14 महीने के आईओसी बैन के बाद तुरंत आईओए को ओलंपिक में वापस लाने में मदद की।

एशियन स्क्वैश फेडरेशन (2001-2009) के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका में, रामचंद्रन ने यह सुनिश्चित किया कि स्क्वैश एशियन गेम्स में एक मुख्य पदक खेल के रूप में शामिल हो और बाद में इस खेल के मेडल वर्ग को बढ़ाया। उन्होंने भारत में कई एशियन चैंपियनशिप का आयोजन किया और फंड भी प्रदान किया।

वर्ल्ड स्क्वैश के प्रेसिडेंट के तौर पर, रामचंद्रन ने दो ओलंपिक बिड्स में काफी समय और निजी स्रोतों का निवेश किया और 2016 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी ने उन्हें ओलंपिक ऑर्डर (रजत) तथा ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया ने उनके योगदान के लिए ओसीए अवार्ड ऑफ मेरिट से सम्मानित किया।

उन्होंने भारत में स्क्वैश को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने निवेश से इंडिया स्क्वैश एकेडमी में 2002 से 2025 के बीच 10 विश्व चैंपियनशिप की मेज़बानी कर चेन्नई को भारत की 'स्क्वैश राजधानी' में तब्दील कर दिया।

Point of View

विशेष रूप से स्क्वैश और भारतीय खेलों के लिए। उनके योगदान को न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर भी सराहा गया। उनका नेतृत्व और दूरदर्शिता हमेशा याद रखी जाएगी।
NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

नारायण रामचंद्रन का योगदान क्या था?
उन्होंने स्क्वैश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई अंतरराष्ट्रीय पदों पर कार्य किया।
उनका अंतिम संस्कार कब होगा?
उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को चेन्नई के बसंत नगर श्मशान घाट पर किया जाएगा।
वर्ल्ड स्क्वैश फेडरेशन ने क्या कहा?
फेडरेशन ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।
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