PCB का सख्त फिटनेस क्रांति: डॉ. जावेद मुगल के नए टू-टियर प्लान से रिजवान तक नहीं बचे
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने घरेलू क्रिकेट में एक व्यापक फिटनेस नीति लागू की है, जिसके तहत 20 क्षेत्रीय, 8 विभागीय फर्स्ट-क्लास और 25 से अधिक ग्रेड-2 विभागीय टीमों के खिलाड़ियों को अनिवार्य फिटनेस परीक्षणों से गुजरना होगा। बोर्ड के नए स्पोर्ट्स मेडिसिन डायरेक्टर डॉ. जावेद मुगल की अगुआई में यह नीति तब लाई गई है, जब कथित तौर पर कई खिलाड़ी मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कर घरेलू मुकाबलों से दूरी बनाते रहे हैं।
क्यों उठाया गया यह कदम
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी खिलाड़ियों में घरेलू क्रिकेट की बजाय फ्रेंचाइजी लीग को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। कारण सीधा है — फ्रेंचाइजी क्रिकेट में खिलाड़ियों को घरेलू मुकाबलों की तुलना में तीन गुना अधिक पारिश्रमिक मिलता है। इस असंतुलन के चलते कई खिलाड़ी कथित तौर पर मेडिकल सर्टिफिकेट का सहारा लेकर घरेलू दायित्वों से बचते रहे हैं। PCB ने इस बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए यह सख्त नीति तैयार की है।
टू-टियर फिटनेस प्लान की संरचना
नई नीति के तहत एक टू-टियर फिटनेस परीक्षण प्रणाली बनाई गई है। टियर 1 में 20 क्षेत्रीय, 8 विभागीय फर्स्ट-क्लास और 25 से अधिक ग्रेड-2 विभागीय टीमें शामिल हैं, जिनके खिलाड़ियों को 11 अलग-अलग फिटनेस टेस्ट देने होंगे और उन्हें स्कोर करने के 17 मौके मिलेंगे।
टियर 2 में सीनियर डिस्ट्रिक्ट, अंडर-19 डिस्ट्रिक्ट, अंडर-15 और अंडर-17 क्षेत्रीय टीमें आती हैं। इन खिलाड़ियों को 8 टेस्ट देने होंगे और उन्हें 12 मौके मिलेंगे। यह ढाँचा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है और इसे दोहराने योग्य तथा भरोसेमंद रखा गया है।
रेड स्कोर और फेल होने के नियम
सूत्रों के अनुसार, टियर 1 में 7 तक 'रेड स्कोर' (खराब प्रदर्शन) के साथ खिलाड़ी परीक्षण पास कर सकते हैं, लेकिन 8 या उससे अधिक रेड स्कोर मिलने पर उन्हें असफल माना जाएगा। ऐसे खिलाड़ियों को एक बार पुनः परीक्षण का अवसर मिलेगा। टियर 2 में 6 या उससे अधिक रेड स्कोर पर खिलाड़ी स्वतः अनुत्तीर्ण हो जाएंगे। सभी परीक्षण कोचों की निगरानी में आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसी को पक्षपात के आधार पर पास न किया जा सके।
सीनियर खिलाड़ियों पर भी सख्ती
गौरतलब है कि इस नीति में कोई अपवाद नहीं रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, मोहम्मद रिजवान, सऊद शकील, फखर जमान और नसीम शाह जैसे सीनियर खिलाड़ियों को भी पूरे फिटनेस रूटीन का पालन करने के निर्देश दिए गए। रिजवान को तो वेस्टइंडीज दौरे के लिए तभी चुना गया, जब उन्होंने अपना पुनर्वास (रिहैब) पूरा कर लिया।
आगे की राह
नई नीति के तहत सभी खिलाड़ियों को हर छह महीने पर इन फिटनेस परीक्षणों से गुजरना होगा, ताकि मानक बरकरार रहें। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान जैसी टीमें अंतरराष्ट्रीय फिटनेस मानकों को पूरा करने में पिछड़ती रही हैं और फिटनेस संबंधी कारणों से महत्वपूर्ण खिलाड़ियों को खोती रही हैं। यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह पाकिस्तानी क्रिकेट की संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।