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एशियन गेम्स 2026: दो मेडल जीतीं एम आर पूवम्मा, कर्नाटक सरकार से सम्मान की उम्मीद

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एशियन गेम्स 2026: दो मेडल जीतीं एम आर पूवम्मा, कर्नाटक सरकार से सम्मान की उम्मीद

सारांश

छह एशियन गेम्स, चार गोल्ड — और फिर भी पहले मेडल पर सरकार का फोन नहीं आया। पूवम्मा की यह बेबाक बात सिर्फ एक एथलीट की शिकायत नहीं, बल्कि भारत में खेल प्रशासन की उस पुरानी खामी का आईना है जो जीत के बाद भी खिलाड़ियों को उपेक्षित छोड़ देती है।

मुख्य बातें

एम आर पूवम्मा ने एशियन गेम्स 2026 में 4x400 मीटर रिले में गोल्ड और मिश्रित 4x400 मीटर रिले में सिल्वर जीता।
यह उनका छठा एशियन गेम्स था; अब तक उनके नाम एशियन गेम्स में कुल चार गोल्ड मेडल हैं।
पहले मेडल पर कर्नाटक सरकार की ओर से शुरुआत में कोई संपर्क नहीं हुआ; बाद में सभी ने बधाई दी।
परमेश्वर ने नकद पुरस्कार राशि बढ़ाने का आश्वासन दिया।
पूवम्मा को मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार से ठोस सहायता की उम्मीद; 22 वर्षों से कर्नाटक का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

भारतीय अनुभवी धाविका एम आर पूवम्मा ने एशियन गेम्स 2026 में देश के लिए दो पदक जीतने के बाद 2 अक्टूबर 2026 को मंगलुरु एयरपोर्ट पर पहुँचते ही भव्य स्वागत पाया। पूवम्मा ने साफ़ कहा कि उन्हें भारत के लिए मेडल जीतने पर गहरा गर्व है, लेकिन पहले पदक के बाद कर्नाटक सरकार की ओर से शुरुआत में कोई संपर्क न होने पर उन्होंने अपनी भावनाएँ बेबाकी से ज़ाहिर कीं।

ऐतिहासिक प्रदर्शन: छठे एशियन गेम्स में चौथा गोल्ड

पूवम्मा ने 4x400 मीटर रिले स्पर्धा में किरण पहल, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज के साथ मिलकर गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा, उन्होंने मिश्रित 4x400 मीटर रिले स्पर्धा में सिल्वर मेडल भी अपने नाम किया। यह उनका छठा एशियन गेम्स था, और इस बार के गोल्ड के साथ उनके नाम एशियन गेम्स में कुल चार गोल्ड मेडल हो गए हैं।

एयरपोर्ट पर मीडिया से मुखातिब होते हुए पूवम्मा ने कहा, 'मुझे बहुत गर्व है। यह मेरा छठा एशियन गेम्स है और मैंने एशियन गेम्स में चार गोल्ड मेडल जीते हैं। इस बार एशियाई खेलों में एथलेटिक्स में कोई मेडल नहीं मिला था, इसलिए हम पर बहुत दबाव था। पिछले एशियाई खेलों में हम गोल्ड से चूक गए थे, इसी वजह से हमें यह साबित करना था कि 'गोल्डन गर्ल्स' की वापसी हो चुकी है।'

राज्य सरकार का रवैया: पहले मेडल पर फोन का इंतज़ार

पूवम्मा ने एक संवेदनशील बात भी साझा की — जब उन्होंने अपना पहला मेडल जीता, तो कर्नाटक सरकार की ओर से न कोई फ़ोन आया, न कोई संदेश। उन्होंने कहा कि जब उनके साथियों को मुख्यमंत्री और खेल मंत्री की शुभकामनाएँ मिल रही थीं, वे बस अपने फ़ोन की स्क्रीन देखती रह गईं। हालाँकि बाद में उन्हें भी सभी की बधाइयाँ प्राप्त हुईं।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में खेल पुरस्कार नीतियों और सरकारी प्राथमिकताओं पर बहस जारी है। गौरतलब है कि पूवम्मा 22 वर्षों से भारतीय एथलेटिक्स में सक्रिय हैं और लगातार कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करती आई हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और भविष्य के आश्वासन

उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर समेत कई मंत्रियों ने पूवम्मा को भरोसा दिलाया है कि भविष्य में उनकी मदद की जाएगी। उन्होंने नकद पुरस्कार राशि बढ़ाने का आश्वासन भी दिया है। पूवम्मा ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार कर्नाटक के मेडल विजेता खिलाड़ियों के लिए ठोस कदम उठाएंगे।

उन्होंने कहा, 'उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और बाकी मंत्रियों ने मुझे भरोसा दिलाया है कि वह भविष्य में मेरी मदद करेंगे और नकद इनाम की राशि को भी बढ़ाने का आश्वासन दिया है। मुझे उम्मीद है कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार हमारे लिए कुछ करेंगे, जिससे हम भविष्य में देश के लिए और मेडल लेकर आ सकेंगे।'

आम जनता और भावी खिलाड़ियों पर असर

पूवम्मा का यह बयान केवल व्यक्तिगत शिकायत नहीं है — यह उस व्यापक समस्या की ओर इशारा करता है जो भारत के अनेक एथलीटों को झेलनी पड़ती है। सरकारी मान्यता और प्रोत्साहन राशि के अभाव में युवा प्रतिभाएँ इस क्षेत्र में आगे बढ़ने से हिचकिचाती हैं। पूवम्मा का मानना है कि राज्य सरकार की सकारात्मक पहल से भावी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा और कर्नाटक से और अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सामने आ सकेंगे।

क्या होगा आगे

पूवम्मा के बयान के बाद अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कर्नाटक सरकार पर हैं कि वे पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए क्या घोषणाएँ करते हैं। यदि सरकार ने जल्द कदम उठाया, तो यह न केवल पूवम्मा जैसी अनुभवी खिलाड़ियों बल्कि आने वाली पीढ़ी के एथलीटों के लिए भी एक नई उम्मीद की शुरुआत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

महज़ व्यक्तिगत कड़वाहट नहीं है — यह उस संरचनात्मक उदासीनता का प्रमाण है जो भारत में एथलीटों को ट्रॉफी के बाद भी अदृश्य बना देती है। क्रिकेट और राजनीतिक कार्यक्रमों पर खर्च करने वाले राज्य, जब ट्रैक-एंड-फील्ड की महानायिका का फोन नहीं उठाते, तो यह नीतिगत विफलता है। उपमुख्यमंत्री के मौखिक आश्वासन और नकद राशि बढ़ाने के वादे उत्साहजनक हैं, लेकिन असली परीक्षा लिखित नीति और समयबद्ध क्रियान्वयन से होगी — न कि एयरपोर्ट की भीड़ में दी गई बधाई से।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एम आर पूवम्मा ने एशियन गेम्स 2026 में कौन-से मेडल जीते?
पूवम्मा ने एशियन गेम्स 2026 में दो पदक जीते — 4x400 मीटर रिले में किरण पहल, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज के साथ गोल्ड मेडल, तथा मिश्रित 4x400 मीटर रिले में सिल्वर मेडल।
पूवम्मा कर्नाटक सरकार से क्यों नाराज़ थीं?
पूवम्मा ने बताया कि जब उन्होंने अपना पहला मेडल जीता, तो कर्नाटक सरकार की ओर से शुरुआत में कोई फोन या संदेश नहीं आया, जबकि उनके साथी खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री और खेल मंत्री की बधाइयाँ मिल रही थीं। बाद में उन्हें भी सभी की बधाइयाँ प्राप्त हुईं।
कर्नाटक सरकार ने पूवम्मा को क्या आश्वासन दिया?
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और अन्य मंत्रियों ने पूवम्मा को भरोसा दिलाया कि भविष्य में उनकी मदद की जाएगी और नकद पुरस्कार राशि भी बढ़ाई जाएगी। पूवम्मा को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से भी ठोस कदम उठाने की उम्मीद है।
एम आर पूवम्मा का एशियन गेम्स में कैसा रिकॉर्ड है?
यह पूवम्मा का छठा एशियन गेम्स था और इस बार के गोल्ड के साथ उनके नाम एशियन गेम्स में कुल चार गोल्ड मेडल हो गए हैं। वे 22 वर्षों से भारतीय एथलेटिक्स में सक्रिय हैं और कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करती आई हैं।
पूवम्मा के बयान का भावी खिलाड़ियों पर क्या असर होगा?
पूवम्मा का मानना है कि राज्य सरकार द्वारा मेडल विजेता खिलाड़ियों को उचित सम्मान और प्रोत्साहन राशि मिलने से भावी एथलीटों का मनोबल बढ़ेगा। इससे कर्नाटक से और अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सामने आ सकेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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