30 सितंबर 2026
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प्राची चौधरी का एशियन गेम्स गोल्ड और DSP का सपना: 'यूनिफॉर्म का नाप पहले ही दे दिया था'

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प्राची चौधरी का एशियन गेम्स गोल्ड और DSP का सपना: 'यूनिफॉर्म का नाप पहले ही दे दिया था'

सारांश

गोल्ड मेडल सिर्फ जीत नहीं था — प्राची के लिए यह नागोया से पहले दिया गया DSP यूनिफॉर्म का नाप सार्थक करना था। पिछले एशियन गेम्स में सिल्वर से चूकी DSP पद, इस बार 3:29.69 के समय के साथ गोल्ड जीतकर उन्होंने वह सपना पूरा कर दिखाया।

मुख्य बातें

प्राची चौधरी ने नागोया एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 4x400 मीटर रिले में गोल्ड मेडल जीता।
भारतीय टीम ( प्राची चौधरी, किरण पहल, एमआर पूवम्मा, विथ्या रामराज ) ने 3:29.69 के समय के साथ बहरीन और चीन को पीछे छोड़ा।
प्राची ने नागोया रवाना होने से पहले ही DSP यूनिफॉर्म का नाप दे दिया था — उत्तर प्रदेश की खेल नीति के तहत एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट को डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) नियुक्त किया जाता है।
29 वर्षीय प्राची इन्हीं गेम्स में 400 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुकी हैं।
प्राची ने पिछले एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था, जिससे DSP पद नहीं मिल सका था।
अगले लक्ष्य: एशियन चैंपियनशिप , वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक्स ।

प्राची चौधरी ने नागोया एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 4x400 मीटर रिले में गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही अपना एक और बड़ा सपना पूरा कर लिया — उत्तर प्रदेश की खेल नीति के तहत डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) बनने का। 29 सितंबर को मंगलवार को हुई इस रेस में भारत ने 3:29.69 के समय के साथ बहरीन और चीन को पीछे छोड़कर स्वर्ण पदक हासिल किया।

मुख्य घटनाक्रम

प्राची चौधरी, किरण पहल, एमआर पूवम्मा और विथ्या रामराज की चौकड़ी ने 3:29.69 के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। बहरीन 3:30.21 के समय के साथ दूसरे और चीन 3:31.02 के साथ तीसरे स्थान पर रहा। प्राची ने तीसरा लेग दौड़ा और फिर एंकर विथ्या रामराज को बैटन सौंपी।

उल्लेखनीय है कि 29 वर्षीय प्राची इन्हीं गेम्स में 400 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में पहले ही ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी थीं, जिससे यह उनका इस एशियन गेम्स संस्करण में दूसरा पदक बन गया।

DSP यूनिफॉर्म का पहले से नाप

गोल्ड जीतने के बाद प्राची ने बताया कि उनका इरादा नागोया रवाना होने से पहले ही पक्का था। उन्होंने कहा, 'यहां आने से पहले ही मैंने घर पर यूनिफॉर्म के लिए अपना नाप दे दिया था। मैंने उनसे कहा था कि जब तक मैं वापस आऊं, सिली हुई यूनिफॉर्म तैयार होनी चाहिए क्योंकि मैं उसे पहनना चाहती हूं।'

यह दृढ़ संकल्प पिछले एशियन गेम्स के अनुभव से जन्मा था। प्राची ने कहा, 'पिछले साल मैंने एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था, इसलिए DSP नहीं बन पाई। हमारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक स्पोर्ट्स पॉलिसी है जिसके तहत गोल्ड मेडलिस्ट को DSP बनाया जाता है। जब पिछले साल ऐसा नहीं हुआ, तो मुझे बुरा लगा। तभी मैंने तय किया कि अगले एशियन गेम्स में आऊंगी और चाहे कुछ भी हो जाए, गोल्ड जरूर जीतूंगी।'

टीम की एकजुटता और रणनीति

प्राची ने बताया कि फाइनल से पहले चारों खिलाड़ियों के मन में एक ही लक्ष्य था। 'टीम में हम चारों यही कह रहे थे कि चाहे कुछ भी हो जाए, हमें गोल्ड जीतना ही है। हमें एक-दूसरे का साथ देना था और बैटन बदलते समय ज्यादा से ज्यादा बढ़त बनाए रखनी थी। हमारे दिमाग में बस यही बात चल रही थी।'

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय महिला एथलेटिक्स एशियाई स्तर पर लगातार मजबूत होती जा रही है और ट्रैक इवेंट्स में भारत की पदक तालिका में योगदान बढ़ रहा है।

परिवार, प्रेरणा और युवा एथलीटों का संदेश

प्राची ने कहा, 'मैं घर जाकर इस मेडल को अपने पिता को दिखाऊंगी। वे बहुत खुश होंगे, मेरी मां भी बहुत खुश होंगी, उन्हें मुझ पर गर्व होगा। अगर दूसरे युवा बच्चे और लड़कियां मुझे देखकर यह महसूस करें कि अगर मैं ऐसा कर सकती हूं, तो वे भी कर सकते हैं, तो इससे उन्हें हिम्मत मिलेगी।'

उन्होंने अपने बचपन का जिक्र करते हुए कहा, 'जब मैं छोटी थी और मैंने स्पोर्ट्स शुरू किया था, तो मैंने भी एथलीट्स को विदेश जाते और राष्ट्रगान बजते देखा। राष्ट्रगान बजने पर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।'

सरकार और संस्थाओं का आभार

प्राची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI), टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) का विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी जी... मुझे नहीं लगता कि किसी भी पिछले प्रधानमंत्री ने एथलीट्स से इतनी बातचीत की है, उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रेरित और प्रोत्साहित किया है।'

AFI के अध्यक्ष ललित भनोट का विशेष जिक्र करते हुए प्राची ने कहा, 'मेरी इंडिविजुअल रेस से पहले, उन्होंने मुझे बहुत प्रेरित किया। उन्होंने मेरे साथ मीटिंग की और कहा कि मुझे मेडल जीतकर ही लौटना है।'

आगे की राह को लेकर प्राची का संकल्प स्पष्ट है — एशियन चैंपियनशिप, वर्ल्ड चैंपियनशिप और फिर ओलंपिक्स उनके अगले लक्ष्य हैं। इस साल अपना पर्सनल बेस्ट हासिल कर चुकीं प्राची का कहना है कि वे अभी रुकने वाली नहीं हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या सिल्वर या ब्रॉन्ज मेडलिस्ट एथलीट इस प्रोत्साहन से वंचित रह जाते हैं। गौरतलब है कि प्राची को पिछले गेम्स में सिल्वर मिला था और वे DSP नहीं बन सकीं — यह विभाजन प्रतिभाशाली एथलीटों के बीच असमानता पैदा कर सकता है। एशियन गेम्स की रैंकिंग में एक स्थान का फर्क एक एथलीट का जीवन बदल सकता है — और यह नीति-निर्माताओं के लिए गंभीर विचार का विषय है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्राची चौधरी कौन हैं और उन्होंने एशियन गेम्स 2026 में क्या जीता?
प्राची चौधरी उत्तर प्रदेश की 29 वर्षीय एथलीट हैं, जिन्होंने नागोया एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 4x400 मीटर रिले में गोल्ड मेडल और 400 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता। वे इन एशियन गेम्स में दो पदक जीतने वाली भारतीय एथलीट रहीं।
प्राची चौधरी DSP कैसे बनेंगी?
उत्तर प्रदेश सरकार की खेल नीति के तहत एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) नियुक्त किया जाता है। प्राची ने नागोया में गोल्ड जीतकर इस पात्रता को पूरा किया है।
भारत ने महिलाओं की 4x400 मीटर रिले में कितने समय के साथ गोल्ड जीता?
भारतीय टीम ने 3:29.69 के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। बहरीन 3:30.21 के साथ दूसरे और चीन 3:31.02 के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
पिछले एशियन गेम्स में प्राची को DSP क्यों नहीं मिला था?
पिछले एशियन गेम्स में प्राची चौधरी ने सिल्वर मेडल जीता था। उत्तर प्रदेश की खेल नीति के तहत केवल गोल्ड मेडलिस्ट को DSP बनाया जाता है, इसलिए उन्हें उस बार यह लाभ नहीं मिला।
प्राची चौधरी के आगे के लक्ष्य क्या हैं?
प्राची ने स्पष्ट किया है कि वे एशियन चैंपियनशिप, वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक्स में भाग लेना चाहती हैं। इस साल अपना पर्सनल बेस्ट हासिल कर चुकीं प्राची ने कहा कि वे अभी रुकने वाली नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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