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सुनील कुमार ने एशियन गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज, घुटने की सर्जरी के बाद ऐतिहासिक वापसी

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सुनील कुमार ने एशियन गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज, घुटने की सर्जरी के बाद ऐतिहासिक वापसी

सारांश

घुटने की सर्जरी के बाद वापसी, गोल्ड का इरादा लेकर नागोया पहुंचे — और ब्रॉन्ज जीतकर इतिहास रच दिया। सुनील कुमार लगातार दो एशियन गेम्स में ग्रीको-रोमन मेडल जीतने वाले पहले भारतीय रेसलर बन गए। जीत के बाद उन्होंने सबसे पहले माँ को फोन किया।

मुख्य बातें

सुनील कुमार ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 87 किग्रा ग्रीको-रोमन वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
उन्होंने फिलीपींस के कैलम जॉनस्टन रॉबर्ट्स को टेक्निकल सुपीरियरिटी से 9-0 से हराया।
27 वर्षीय सुनील एशियन गेम्स में ग्रीको-रोमन में दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय रेसलर बने।
घुटने की सर्जरी के बाद आईआईएस के सहयोग से रिहैबिलिटेशन पूरी कर उन्होंने यह वापसी की।
मेडल जीतने के बाद सुनील ने सबसे पहले अपनी माँ को फोन किया।

ग्रीको-रोमन रेसलर सुनील कुमार ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 87 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में हुए इस मुकाबले में उन्होंने फिलीपींस के कैलम जॉनस्टन रॉबर्ट्स को टेक्निकल सुपीरियरिटी के आधार पर 9-0 से हराया। 27 वर्षीय सुनील एशियन गेम्स में ग्रीको-रोमन रेसलिंग में दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय रेसलर बन गए हैं।

ऐतिहासिक उपलब्धि का सफर

यह आइची-नागोया एशियन गेम्स में सुनील की दूसरी भागीदारी थी। इससे पहले उन्होंने एशियन गेम्स 2022 में भी इसी वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस बार वे गोल्ड के इरादे से उतरे थे, लेकिन घुटने की सर्जरी के बाद की वापसी को देखते हुए यह उपलब्धि और भी उल्लेखनीय मानी जा रही है।

गौरतलब है कि सर्जरी के बाद रिहैबिलिटेशन की लंबी प्रक्रिया से गुजरते हुए सुनील ने अपनी फिटनेस दोबारा हासिल की। उनके स्पॉन्सर्स के अनुसार, इस दौरान आईआईएस ने उनके पुनर्वास में अहम भूमिका निभाई।

मुकाबले का रोमांचक विवरण

फाइनल राउंड में सुनील ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा। मुकाबले के पहले कुछ मिनटों में ही उन्होंने रॉबर्ट्स को दो बार पटककर 4 अंक हासिल किए। विरोधी के 'पैसिव' रहने पर एक और अंक मिला, जिससे 90 सेकंड के भीतर ही सुनील 5-0 से आगे हो गए।

इसके बाद एक और 'पैसिविटी' स्थिति का फायदा उठाते हुए सुनील ने विरोधी को नीचे गिराया और बढ़त 7-0 कर दी। अंत में दो और अंक जोड़कर उन्होंने 9-0 का अंतर बनाया और टेक्निकल सुपीरियरिटी से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

माँ को किया पहला फोन

मेडल जीतने के बाद सुनील ने सबसे पहले अपनी माँ को फोन किया। उनके स्पॉन्सर्स द्वारा जारी बयान में सुनील ने कहा, 'भारत के लिए मेडल जीतना मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मैं देश के लिए गोल्ड जीतने के इरादे से यहां आया था, इसलिए मुझे पता है कि मैं और बेहतर कर सकता था, लेकिन चोट से उबरकर पोडियम तक पहुंचने पर मुझे गर्व है।'

उन्होंने आगे कहा, 'घुटने की सर्जरी के बाद, आईआईएस ने रिहैबिलिटेशन के दौरान मेरा साथ दिया और मुझे और मजबूती से वापसी करने में मदद की। जीतने के बाद मैंने सबसे पहले अपनी मां को फोन किया। मैं सभी के आशीर्वाद और सहयोग के लिए सचमुच आभारी हूं। मैं वापस जाकर उनके साथ इस जीत का जश्न मनाने के लिए बहुत उत्साहित हूं।'

भारतीय रेसलिंग के लिए अहमियत

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय कुश्ती संघ के भीतर उथल-पुथल के बाद देश के पहलवानों पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शन का दबाव था। सुनील की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत जीत है, बल्कि ग्रीको-रोमन शैली में भारत की बढ़ती ताकत का प्रमाण भी है — एक ऐसी शैली जिसमें भारत परंपरागत रूप से फ्रीस्टाइल की तुलना में कमज़ोर रहा है।

सुनील की अगली चुनौती अब विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड के लक्ष्य के साथ अपनी तैयारी को और धार देना होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब ग्रीको-रोमन जैसी तकनीकी शैली में 9-0 की जीत दर्ज की। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय कुश्ती के संस्थागत ढांचे पर सवाल उठ रहे हैं — ऐसे में व्यक्तिगत दृढ़ता और निजी सहयोग तंत्र ने वह काम किया जो सिस्टम को करना चाहिए था। गौरतलब है कि ग्रीको-रोमन में भारत की उपस्थिति परंपरागत रूप से सीमित रही है, और सुनील का लगातार दूसरा मेडल इस शैली में भारत की बढ़ती गहराई को रेखांकित करता है। असली सवाल यह है कि क्या खेल तंत्र इस प्रतिभा को पोषित करने के लिए पर्याप्त संरचना दे पाएगा।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनील कुमार ने एशियन गेम्स 2026 में कौन-सा मेडल जीता?
सुनील कुमार ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 87 किग्रा ग्रीको-रोमन रेसलिंग वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने फिलीपींस के कैलम जॉनस्टन रॉबर्ट्स को 9-0 से हराया।
सुनील कुमार का एशियन गेम्स में यह कौन-सा मेडल है?
यह एशियन गेम्स में सुनील कुमार का दूसरा मेडल है। उन्होंने एशियन गेम्स 2022 में भी इसी 87 किग्रा ग्रीको-रोमन वर्ग में ब्रॉन्ज जीता था। इस तरह वे एशियन गेम्स में ग्रीको-रोमन रेसलिंग में दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय रेसलर बन गए हैं।
सुनील कुमार ने घुटने की सर्जरी के बाद वापसी कैसे की?
घुटने की सर्जरी के बाद सुनील कुमार ने आईआईएस के सहयोग से रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया पूरी की। उनके अनुसार इस दौरान माँ के आशीर्वाद और आईआईएस की मदद ने उन्हें मजबूती से वापसी करने में सहायता दी।
सुनील कुमार ने ब्रॉन्ज मैच कितने समय में जीता?
सुनील कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में शुरुआती 90 सेकंड में ही 5-0 की बढ़त बना ली थी। अंततः उन्होंने टेक्निकल सुपीरियरिटी के लिए आवश्यक 9 अंकों का अंतर बनाकर मैच एक ही राउंड में जीत लिया।
सुनील कुमार ने मेडल जीतने के बाद सबसे पहले क्या किया?
मेडल जीतने के बाद सुनील कुमार ने सबसे पहले अपनी माँ को फोन किया। उन्होंने कहा कि माँ के आशीर्वाद और सहयोग से ही वे रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया से गुजर पाए और वापसी कर सके।
राष्ट्र प्रेस
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