तेजस्वी जायसवाल की क्रिकेट में वापसी: यशस्वी और कोच ज्वाला सिंह की प्रेरणा से मिली नई राह
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय टेस्ट ओपनर यशस्वी जायसवाल के बड़े भाई तेजस्वी जायसवाल ने घरेलू क्रिकेट में सफल वापसी की है — और इसके पीछे यशस्वी तथा कोच ज्वाला सिंह की अहम भूमिका रही है। 29 वर्षीय तेजस्वी ने वर्षों तक परिवार की ज़िम्मेदारी के लिए अपना क्रिकेट करियर पीछे रख दिया था, लेकिन अब वे उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) में टिहरी टाइटन्स के 'आइकन प्लेयर' के रूप में मैदान पर धमाका कर रहे हैं।
बलिदान और वापसी की कहानी
कम उम्र में ही तेजस्वी ने अपने भाई यशस्वी के क्रिकेट सपने को पूरा करने के लिए खुद का करियर किनारे रख दिया। एक स्पोर्ट्स पत्रिका को दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि उन्होंने दिल्ली में सेल्समैन के रूप में काम करते हुए यशस्वी की मदद की। जब यशस्वी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गए, तब तेजस्वी को अपने करियर की नई शुरुआत का अवसर मिला।
तेजस्वी ने कहा, 'यशस्वी और ज्वाला सर ने मुझसे त्रिपुरा जाकर फिर से क्रिकेट खेलना शुरू करने को कहा। इसी कारण मैंने वहीं से शुरुआत की।' वापसी के अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'यह बहुत मुश्किल नहीं था। जब मुझे वापसी का मौका मिला, तो मैं बहुत खुश था कि मुझे फिर से क्रिकेट खेलने को मिल रहा था।'
त्रिपुरा से उत्तराखंड तक का सफर
तेजस्वी ने त्रिपुरा के लिए घरेलू सर्किट में सभी फॉर्मेट में प्रतिनिधित्व किया — 5 फर्स्ट-क्लास मैच, 8 लिस्ट-ए गेम और 4 टी20 मैच। उल्लेखनीय बात यह है कि उन्होंने तीनों फॉर्मेट में अर्धशतक दर्ज किए हैं। अब वे उत्तराखंड से खेलने की ओर बढ़ रहे हैं। उत्तराखंड में 50 ओवर के गोल्ड कप में खेलते हुए उन्होंने दो शतक भी जड़े।
तेजस्वी ने कहा, 'मैं गोल्ड कप खेलने के लिए उत्तराखंड आया था ताकि यहाँ से चयन हो सके। मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा और अब मैं यूपीएल में भी खेल रहा हूँ। मैं यूपीएल में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूँ और देखते हैं आगे क्या होता है।'
UPL में तूफानी प्रदर्शन
फिलहाल उत्तराखंड प्रीमियर लीग में टिहरी टाइटन्स के लिए खेल रहे तेजस्वी ने 4 मैचों में 117 रन बनाए हैं। इसमें हाल ही में खेली गई 19 गेंदों में 50 रनों की विस्फोटक पारी भी शामिल है। 'आइकन प्लेयर' की भूमिका में उन पर टॉप और मिडिल ऑर्डर दोनों में बैटिंग की ज़िम्मेदारी है।
बैटिंग पोजिशन पर उनका नज़रिया साफ है। उन्होंने कहा, 'मैंने मिडिल ऑर्डर और टॉप ऑर्डर, दोनों में खेला है। मुझे बैटिंग ऑर्डर की परवाह नहीं है — मुझे इस बात की परवाह है कि मैं मैच कैसे जिता सकता हूँ और कैसे असरदार पारी खेल सकता हूँ।'
भाई की उपलब्धियों पर गर्व और एक खास संयोग
तेजस्वी को यशस्वी की कामयाबी पर गहरा गर्व है। उन्होंने कहा, 'मुझे बहुत गर्व है कि मेरा भाई भारत के लिए खेल रहा है। यह हर किसी का सपना होता है। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।' दोनों भाइयों के बीच 6 दिसंबर 2025 का एक विशेष संयोग है — उसी दिन यशस्वी ने विशाखापत्तनम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना पहला वनडे शतक जड़ा था, और तेजस्वी ने त्रिपुरा के लिए अपनी पहली टी20 अर्धशतक लगाई थी।
तेजस्वी ने इस दिन को याद करते हुए कहा, 'मेरे माता-पिता बहुत खुश थे कि उस दिन उनके दोनों बेटों ने अच्छा खेला। यह हमारे लिए बहुत अच्छा एहसास था।' यूपीएल के आयोजन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, 'यह एक बहुत जरूरी लीग है। इसे आयोजित करने के लिए उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (CAU) का धन्यवाद। यह यहाँ के युवाओं और हमारे लिए भी अच्छा प्रदर्शन करने और आगे बढ़ने का बेहतरीन मौका है।'
तेजस्वी जायसवाल की यह यात्रा — बलिदान से वापसी तक — घरेलू क्रिकेट के उन अनगिनत खिलाड़ियों की कहानी है जो चुपचाप मेहनत करते रहते हैं। आने वाले सत्रों में उनका प्रदर्शन तय करेगा कि उत्तराखंड की टीम में उनकी जगह पक्की होती है या नहीं।