फीफा विश्व कप 2026: ट्रंप के दूत ने ईरान की जगह इटली को शामिल करने की मांग की
सारांश
Key Takeaways
- ट्रंप के विशेष दूत पाओलो जम्पोली ने फीफा से 2026 विश्व कप में ईरान की जगह इटली को शामिल करने की मांग की।
- इटली लगातार तीसरी बार विश्व कप क्वालीफाई करने में विफल रहा — फुटबॉल इतिहास में किसी पूर्व चैंपियन के लिए यह पहली बार है।
- ईरान के खेल मंत्री ने कहा कि अमेरिका-इजरायल एयरस्ट्राइक के बाद ईरान 2026 विश्व कप में भाग नहीं ले सकता।
- ट्रंप ने पोप लियो चौदहवें पर सोशल मीडिया पर हमला किया, जिसकी सभी दलों ने आलोचना की।
- फीफा विश्व कप 2026 का आयोजन 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में होगा।
- फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने पहले ट्रंप को भरोसा दिलाया था कि ईरान का विश्व कप में स्वागत है।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। फीफा विश्व कप 2026 को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत पाओलो जम्पोली ने कथित तौर पर फीफा से 11 जून से शुरू होने वाले विश्व कप में ईरान की जगह इटली को शामिल करने की मांग की है। यह मांग ऐसे समय में आई है जब ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के बीच संबंधों में तनाव देखा जा रहा है।
ट्रंप के दूत की फीफा से मांग
यूएस के विशेष दूत पाओलो जम्पोली ने एक रिपोर्ट में कहा, "मैंने ट्रंप और फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को सुझाव दिया है कि विश्व कप में ईरान की जगह इटली को शामिल किया जाए।" उन्होंने आगे कहा, "मैं इटली का रहने वाला हूं और यूएस के टूर्नामेंट में अजुरी को देखना एक सपना होगा। चार खिताब के साथ उनके पास शामिल होने को सही ठहराने के लिए रिकॉर्ड है।"
यह मांग केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ट्रंप-मेलोनी संबंध सुधार की एक कूटनीतिक कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि फुटबॉल को एक राजनयिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
इटली का विश्व कप से बाहर होने का इतिहास
फीफा विश्व कप के इतिहास में पहली बार कोई पूर्व विश्व चैंपियन लगातार तीसरी बार क्वालीफाई करने में विफल रहा है। इटली प्ले-ऑफ में बोस्निया और हर्जेगोविना से पेनल्टी शूटआउट में हारकर 2026 विश्व कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर सका। चार बार का विश्व चैंपियन इटली लगातार तीन विश्व कप से बाहर रहने वाली पहली टीम बन गई है — यह फुटबॉल इतिहास में अभूतपूर्व है।
गौरतलब है कि 2018 रूस विश्व कप में भी इटली क्वालीफाई नहीं कर सका था, और उसके बाद 2022 कतर विश्व कप में भी वह बाहर रहा। अब 2026 में भी यही स्थिति है, जो इटालियन फुटबॉल के लिए एक गहरे संकट का संकेत है।
ईरान की स्थिति और विश्व कप विवाद
ईरान ने लगातार चौथे विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया है। हालांकि, अमेरिका और इजरायल द्वारा एयरस्ट्राइक के बाद ईरान के खेल मंत्री अहमद डोनयामाली ने कहा कि ईरान 2026 वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं ले सकता। इससे पहले ईरान ने फीफा से अनुरोध किया था कि उसके तीन ग्रुप मैच अमेरिका से मेक्सिको स्थानांतरित किए जाएं।
इस पर ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया था, "ईरान नेशनल सॉकर टीम का वर्ल्ड कप में स्वागत है, लेकिन मुझे सच में नहीं लगता कि उनकी अपनी जान और सुरक्षा के लिए वहां होना सही है।" इससे पहले फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने ट्रंप से मिलकर भरोसा दिलाया था कि ईरान का विश्व कप में स्वागत है।
पोप लियो विवाद और राजनीतिक पृष्ठभूमि
ट्रंप ने हाल ही में ट्रुथ सोशल पर पोप लियो (चौदहवें) पर तीखा हमला करते हुए उन्हें "अपराध के मामले में कमजोर और विदेश नीति के लिए बहुत खराब" बताया था। यह टिप्पणी पोप के यूएस इमिग्रेशन पॉलिसी और ईरान में युद्ध के विरोध पर की गई थी। इस बयान की सभी राजनीतिक दलों ने कड़ी आलोचना की है।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के दूत की यह मांग ट्रंप-मेलोनी के बीच बिगड़े संबंधों को सुधारने और इटली को एक प्रतीकात्मक उपहार देने की कोशिश है। यह विडंबना ही है कि एक खेल टूर्नामेंट अब भू-राजनीतिक दांव-पेच का मैदान बन गया है।
विश्व कप 2026 का कार्यक्रम
फीफा विश्व कप 2026 का आयोजन 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में किया जाएगा। यह पहला विश्व कप है जिसमें 48 टीमें भाग लेंगी। फीफा ने अभी तक ट्रंप के दूत की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आने वाले दिनों में फीफा की ओर से ईरान की भागीदारी को लेकर कोई अंतिम फैसला आ सकता है, जो इस टूर्नामेंट की दिशा और दशा तय करेगा।