यूनिटी कप सेमीफाइनल: जमैका ने भारत को 2-0 से हराया, 30 मई को जिम्बाब्वे से तीसरे स्थान की जंग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम को 28 मई को लंदन के द वैली स्टेडियम में खेले गए यूनिटी कप के दूसरे सेमीफाइनल में जमैका के हाथों 0-2 की हार झेलनी पड़ी। कर्टनी क्लार्क का 8वें मिनट में दागा गया गोल और काहेम डिक्सन का 78वें मिनट में किया गया करिश्माई स्ट्राइक जमैका को फाइनल तक ले गया। अब भारत 30 मई को तीसरे स्थान के प्लेऑफ में जिम्बाब्वे से भिड़ेगा।
मुख्य घटनाक्रम
मैच की शुरुआत से ही जमैका ने आक्रामक रुख अपनाया। 8वें मिनट में तेज काउंटर अटैक के दौरान भारतीय डिफेंस लाइन गेंद को सही तरह क्लियर नहीं कर पाई। गुरप्रीत सिंह संधू ने टाइट एंगल से शानदार बचाव तो किया, लेकिन खतरा टला नहीं। क्लार्क ने छूटे हुए पास को कब्जे में लेकर गेंद को दाहिने पैर से नियंत्रित किया और गुरप्रीत के डाइव करने के बावजूद टॉप-राइट कॉर्नर में जोरदार शॉट लगाकर पहला गोल दागा।
17वें मिनट में डिक्सन ने बढ़त दोगुनी करने की कोशिश की, लेकिन गुरप्रीत ने एक बार फिर बेहतरीन बचाव करते हुए भारत को मुकाबले में जीवित रखा। पहले हाफ के अंतिम चरण में भारत ने गेंद पर नियंत्रण बेहतर किया, पर आखिरी तीसरे में रचनात्मकता की कमी साफ दिखी। रयान विलियम्स, चांगटे और एडमंड लालरिंडिका मैच पर बड़ा असर डालने में संघर्ष करते रहे और भारत जमैका के गोलकीपर कोनिया बॉयस-क्लार्क को कोई खास चुनौती दिए बिना हाफ-टाइम तक पहुँचा।
दूसरे हाफ में भारत की वापसी की कोशिश
ब्रेक के बाद भारत ने ज्यादा ऊर्जा और इरादे के साथ मैदान पर कदम रखा। 53वें मिनट में जमैका के डिफेंस और गोलकीपर की चूक का फायदा उठाते हुए रोशन ने लूज गेंद रहीम अली को दी — जो हाफ-टाइम पर लालरिंडिका की जगह उतरे थे — और चांगटे ने गेंद गोलपोस्ट में पहुँचा दी। लेकिन अली के ऑफसाइड में होने के कारण गोल अमान्य करार दिया गया और भारत ने बराबरी का सुनहरा अवसर गँवा दिया।
इस नाकाम मौके के बाद कोच खालिद जमील के खिलाड़ियों ने ऊपरी दबाव बनाए रखा और जमैका के डिफेंस को परखा। लेकिन 78वें मिनट में डिक्सन ने पेनल्टी एरिया के किनारे गेंद थामी, शानदार फुटवर्क से डिफेंडरों को छकाया, कंधे पर तेज ड्रॉप मारकर जगह बनाई और आकाश मिश्रा के पैरों के बीच से गोलकीपर को चकमा देते हुए गेंद नेट में डाल दी। इस गोल ने भारत की वापसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
व्यक्तिगत उपलब्धियाँ और डेब्यू
हार के बावजूद इस मैच में कुछ यादगार पल रहे। नौफल पीएन और रिकी शाबोंग ने इस मुकाबले में सीनियर राष्ट्रीय टीम में अपना पदार्पण किया। एडमंड लालरिंडिका को भारत के लिए पहला स्टार्ट मिला। गुरप्रीत सिंह संधू ने कई अहम बचाव कर स्कोर को नियंत्रण में रखने की भरसक कोशिश की।
गौरतलब है कि यह 2002 के बाद भारतीय फुटबॉल टीम का इंग्लैंड की धरती पर पहला मैच था, जो इस दौरे को ऐतिहासिक महत्व देता है।
आगे क्या
भारत अब 30 मई को तीसरे स्थान के प्लेऑफ में जिम्बाब्वे से भिड़ेगा, जिसे पहले सेमीफाइनल में नाइजीरिया ने हराया था। फाइनल मुकाबले में पिछले साल की भाँति नाइजीरिया और जमैका आमने-सामने होंगे। भारत के लिए यह मैच टूर्नामेंट का सम्मानजनक अंत सुनिश्चित करने का अवसर है।