वैभव सूर्यवंशी पर IIM इंदौर का अध्ययन दो हफ्तों में शुरू, 3 महीने में आएगा पहला ड्राफ्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) इंदौर अगले दो सप्ताह के भीतर 15 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी पर एक व्यापक शोध परियोजना शुरू करने जा रहा है, जिसका मक़सद यह समझना है कि किशोरावस्था में असाधारण प्रतिभा किन कारकों से पनपती है और लंबे समय तक टिकाऊ कैसे बनी रह सकती है। यह घोषणा संस्थान के निदेशक हिमांशु राय ने राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में की, जिसमें उन्होंने कहा कि अध्ययन की पहली ड्राफ्ट रिपोर्ट तीन महीने में तैयार हो जाएगी।
सूर्यवंशी ने IPL 2026 में 16 मैचों में 776 रन बनाकर वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। राय के अनुसार, यह अध्ययन सिर्फ़ क्रिकेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शतरंज, निशानेबाज़ी, गणित, भौतिकी, कला और संगीत जैसे क्षेत्रों के विलक्षण बच्चों पर भी लागू होगा।
शोध का ढाँचा क्या होगा
राय ने बताया कि वे स्वयं रिसर्च टीम का नेतृत्व करेंगे और लगभग पाँच सदस्यीय कोर टीम बनाएँगे, जिसमें मानव संसाधन, मानव विकास, मनोविज्ञान और समाजशास्त्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। ज़रूरत पड़ने पर रिसर्च एसोसिएट्स की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने कहा, “मनोविज्ञान और सामाजिक विज्ञान के मुताबिक तीन चीज़ें इस तरह की प्रतिभा को निर्धारित करती हैं — पहला आनुवंशिक व्यक्तित्व, दूसरा आस-पास का माहौल जिसमें परिवार का समर्थन, रहन-सहन और प्रशिक्षण आता है, और तीसरा यह कि व्यक्ति ने स्वयं क्या किया है।”
योग्यता, अवसर और गतिशीलता का फ़ॉर्मूला
राय ने प्रदर्शन को एक सूत्र में बाँधते हुए कहा कि यह योग्यता, अवसर और गतिशीलता के मिश्रण पर निर्भर करता है। उनके अनुसार योग्यता का अर्थ अंदर की क्षमता है, प्रेरणा का अर्थ आंतरिक उमंग और स्वत:प्रोत्साहन है, और अवसर वह बाहरी मंच है जो प्रतिभा को निखारता है।
“हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि कम उम्र की इन अद्भुत प्रतिभाओं में इन गुणों का कितना मिश्रण होता है,” उन्होंने कहा।
क्यों भटक जाती हैं किशोर प्रतिभाएँ
निदेशक ने स्वीकार किया कि अतीत में कई असाधारण प्रतिभावान बच्चे समय के साथ लुप्त हो गए। उन्होंने इसकी वजहों में परिवार और समाज की अपेक्षाओं, अचानक आई आर्थिक समृद्धि और भावनात्मक, धार्मिक तथा मानसिक संतुलन में आने वाली गड़बड़ी को गिनाया।
“जब दबाव और अवरोध आता है, तो वे उसका निष्तारण कैसे करते हैं — यह जानना ज़रूरी है,” राय ने कहा। उन्होंने जोड़ा कि अध्ययन का अंतिम लक्ष्य ऐसे बच्चों को दीर्घकाल तक अपना प्रदर्शन बरकरार रखने में मदद करना है।
केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं
राय ने स्पष्ट किया कि सूर्यवंशी एक उदाहरण भर हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बहुत-से अद्भुत बच्चे हुए हैं, लेकिन उनमें से कई दिग्भ्रमित हो गए। शोध का उद्देश्य ऐसे फ़्रेमवर्क की पहचान करना है जिससे भविष्य की प्रतिभाएँ भ्रमित न हों।
आगे क्या
पहली ड्राफ्ट रिपोर्ट तीन महीने में सामने आने की उम्मीद है, जिसके बाद इसे विभिन्न क्षेत्रों की किशोर प्रतिभाओं पर लागू करने का मॉडल तैयार किया जाएगा। यह अध्ययन भारतीय खेल और शिक्षा जगत के लिए एक संदर्भ-दस्तावेज़ बन सकता है, ख़ासकर तब जब बाल खिलाड़ियों पर मीडिया और बाज़ार का दबाव लगातार बढ़ रहा है।