विथ्या रामराज ने एशियन गेम्स 2026 में 54.75 सेकंड से जीता ब्रॉन्ज, पीटी उषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय एथलीट विथ्या रामराज ने 28 सितंबर 2026 को नागोया में एशियन गेम्स 2026 की महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स स्पर्धा के फाइनल में 54.75 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के साथ विथ्या ने दिग्गज भारतीय एथलीट पीटी उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया — एक उपलब्धि जो भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में मील का पत्थर बन गई है।
पदक समर्पण और पहली प्रतिक्रिया
मेडल जीतने के तुरंत बाद 28 वर्षीय विथ्या ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपनी जुड़वां बहन को समर्पित की। उन्होंने कहा, 'मैं यह मेडल अपनी जुड़वां बहन को समर्पित करती हूँ, क्योंकि वह हमेशा मेरे साथ रहती हैं। जब भी मैं उससे कुछ माँगती हूँ, वह मुझे भेज देती हैं। मैं खुश हूँ।'
विथ्या ने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS), अपनी राज्य सरकार, JSW और इंडियन रेलवे — जहाँ वह कार्यरत हैं — के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'आजकल मुझे किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है, इसलिए मैं खुश हूँ।'
ड्राइवर पिता का संघर्ष और समाज के ताने
यह सफलता वर्षों के पारिवारिक संघर्ष की परिणति है। विथ्या के पिता एक ड्राइवर हैं, जो महीनेभर में बमुश्किल ₹15,000 कमाते थे। परिवार किराए के घर में रहता था और तीन बेटियों का भविष्य देखकर समाज के लोग तरह-तरह के सवाल उठाते थे।
विथ्या ने बताया, 'जब हम बड़े हो रहे थे, तो लोग कहते थे — बच्चे बड़े हो रहे हैं, अब तुम क्या करोगे? यहाँ तक कि मेरी दादी और पिता से भी कहा जाता था, तुम्हारी तीन बेटियाँ हैं, उनका क्या करोगे?' इन तानों के बावजूद पिता ने हार नहीं मानी।
उन्होंने यह भी बताया कि 2009 में जब विथ्या और उनकी जुड़वां बहन दोनों एक साथ खेल में भाग लेती थीं, तब ₹2,000 से ₹5,000 तक के जूते खरीदना बड़ी चुनौती थी। 'हर चीज़ — ड्रेस, जूते और उपकरण — पर बहुत खर्च आता था, लेकिन उन्होंने इसका इंतज़ाम किया। इसीलिए हम आज यहाँ हैं,' विथ्या ने कहा।
कोच का विश्वास और 55 सेकंड की दीवार
विथ्या ने स्वीकार किया कि 55 सेकंड का बैरियर तोड़ने का भरोसा पहले उन्हें खुद भी नहीं था — यह विश्वास सिर्फ उनके कोच को था। विथ्या ने कहा, 'सिर्फ मेरे कोच को विश्वास था। मुझे अपने कोच पर भरोसा है, इसलिए वह जो भी कहते हैं, मैं करती हूँ। मैं इतने वर्षों से वही कर रही हूँ जो उन्होंने मुझे करने के लिए कहा है।' यह गुरु-शिष्य का वह रिश्ता है जो भारतीय खेल की सफलता की नींव बनता है।
लगातार दूसरा एशियाई गेम्स मेडल
गौरतलब है कि विथ्या ने 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी इसी स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अब नागोया 2026 में भी ब्रॉन्ज के साथ उन्होंने इस इवेंट में लगातार दूसरा एशियाई गेम्स पदक अर्जित कर लिया। इसी संस्करण में उन्होंने मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले टीम इवेंट में सिल्वर मेडल भी भारत को दिलाया था। विथ्या ने नागोया के ट्रैक की तारीफ करते हुए कहा कि यह एक स्पीड ट्रैक है और वह इससे बेहद खुश हैं। यह प्रदर्शन उन्हें 2028 लॉस एंजेलेस ओलंपिक के लिए एक मज़बूत दावेदार के रूप में स्थापित करता है।