वर्ल्ड यूथ ब्रिज चैंपियनशिप: भारत की अंडर-31 टीम ने हेफेई में जीता ब्रॉन्ज, 82.34 VP से तीसरा स्थान
सारांश
मुख्य बातें
भारत की अंडर-31 ब्रिज टीम ने 5 अगस्त 2026 को चीन के हेफेई में आयोजित 9वीं वर्ल्ड यूथ ट्रांसनेशनल ब्रिज चैंपियनशिप के टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। आठ टीमों के फाइनल राउंड रॉबिन में भारत ने 82.34 विक्ट्री प्वाइंट्स (VP) के साथ तीसरा स्थान हासिल किया — और यह उपलब्धि वीजा में देरी तथा टीम संयोजन में अंतिम समय पर हुए बदलावों के बावजूद मिली।
मेडल टेबल और फाइनल परिणाम
फाइनल में चीन की एगोफैन्स टीम ने 89.96 VP के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि चीन की अंडर-31 टीम ने 89.47 VP के साथ सिल्वर पर कब्जा किया। भारत 82.34 VP के साथ तीसरे स्थान पर रहा। फाइनल 5 अगस्त को राउंड रॉबिन फॉर्मेट में खेला गया, जिसमें प्रत्येक टीम ने अन्य सात फाइनलिस्ट टीमों के साथ सात-बोर्ड का मैच खेला।
टीम संयोजन और वीजा की चुनौती
भारतीय टीम में अंशुल भट्ट, साग्निक रॉय, सायनतन कुशारी, शुभम आचार्य, सुरजीत बार और विद्या पटेल शामिल थे। टीम के कप्तान एवं कोच कौस्तुभ बेंद्रे थे। कुछ खिलाड़ियों को समय पर चीन का वीजा नहीं मिल सका, जिससे खेलने वाले जोड़ों में बदलाव करना पड़ा। अंशुल भट्ट को अपने परिचित साथी शुभम आचार्य की जगह कोलकाता के नेशनल खिलाड़ी सायनतन कुशारी के साथ खेलना पड़ा, जबकि शुभम ने विद्या पटेल के साथ जोड़ी बनाई।
इन नई जोड़ियों ने तब तक टीम को संभाले रखा, जब तक कोलकाता से साग्निक रॉय और सुरजीत बार समय पर पहुँचकर टीम को मजबूत नहीं कर गए। इन परिस्थितियों के कारण अंशुल और विद्या ने भारत के आठ क्वालीफाइंग राउंड में से छह में एक साथ खेला।
क्वालीफाइंग से फाइनल तक का सफर
3 से 4 अगस्त के बीच हुए क्वालीफाइंग राउंड में भारत सातवें स्थान पर रहा और आठ टीमों के फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। गौरतलब है कि क्वालीफाइंग में निचले पायदान पर रहने के बावजूद भारत ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए पोडियम पर जगह बनाई।
विद्या पटेल: एक अनोखी पहचान
विद्या पटेल मध्य प्रदेश के रायबिदपुरा गाँव की रहने वाली हैं — एक ऐसा गाँव जो अपने ब्रिज खिलाड़ियों के लिए पहचाना जाता है। उनकी भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत में ब्रिज की जड़ें छोटे शहरों और गाँवों तक फैली हैं।
कोच की नज़र में अंशुल भट्ट
महज 17 वर्ष की उम्र में अंडर-31 स्तर पर खेल रहे अंशुल भट्ट के बारे में कोच कौस्तुभ बेंद्रे ने कहा, 'अंशुल को इसलिए चुना गया है, क्योंकि उन्होंने अपनी जगह बनाई है, न कि उनकी उम्र या शोहरत की वजह से। 17 साल की उम्र में ही वह अंडर-31 लेवल पर जरूरी अनुशासन, संयम और पार्टनरशिप की समझ दिखाते हैं।' यह टिप्पणी इस बात की ओर संकेत करती है कि भारतीय ब्रिज में युवा प्रतिभाओं को योग्यता के आधार पर अवसर दिए जा रहे हैं। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में इस टीम से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।