6 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वर्ल्ड यूथ ब्रिज चैंपियनशिप: भारत की अंडर-31 टीम ने हेफेई में जीता ब्रॉन्ज, 82.34 VP से तीसरा स्थान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वर्ल्ड यूथ ब्रिज चैंपियनशिप: भारत की अंडर-31 टीम ने हेफेई में जीता ब्रॉन्ज, 82.34 VP से तीसरा स्थान

सारांश

वीजा की अड़चन और अंतिम समय पर बदले टीम संयोजन के बावजूद भारत की अंडर-31 ब्रिज टीम ने हेफेई में ब्रॉन्ज मेडल जीता। 17 वर्षीय अंशुल भट्ट और मध्य प्रदेश के रायबिदपुरा गाँव की विद्या पटेल की जोड़ी ने छह क्वालीफाइंग राउंड खेलकर टीम को थामे रखा।

मुख्य बातें

भारत की अंडर-31 ब्रिज टीम ने 9वीं वर्ल्ड यूथ ट्रांसनेशनल ब्रिज चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
फाइनल राउंड रॉबिन में भारत ने 82.34 विक्ट्री प्वाइंट्स के साथ आठ टीमों में तीसरा स्थान हासिल किया।
गोल्ड चीन की एगोफैन्स टीम (89.96 VP) और सिल्वर चीन की अंडर-31 टीम (89.47 VP) को मिला।
वीजा देरी के कारण अंशुल भट्ट और विद्या पटेल ने आठ में से छह क्वालीफाइंग राउंड साथ खेले।
टीम में अंशुल भट्ट , साग्निक रॉय , सायनतन कुशारी , शुभम आचार्य , सुरजीत बार और विद्या पटेल शामिल थे; कोच कौस्तुभ बेंद्रे थे।
मात्र 17 वर्षीय अंशुल भट्ट को अंडर-31 स्तर पर योग्यता के आधार पर चुना गया।

भारत की अंडर-31 ब्रिज टीम ने 5 अगस्त 2026 को चीन के हेफेई में आयोजित 9वीं वर्ल्ड यूथ ट्रांसनेशनल ब्रिज चैंपियनशिप के टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। आठ टीमों के फाइनल राउंड रॉबिन में भारत ने 82.34 विक्ट्री प्वाइंट्स (VP) के साथ तीसरा स्थान हासिल किया — और यह उपलब्धि वीजा में देरी तथा टीम संयोजन में अंतिम समय पर हुए बदलावों के बावजूद मिली।

मेडल टेबल और फाइनल परिणाम

फाइनल में चीन की एगोफैन्स टीम ने 89.96 VP के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि चीन की अंडर-31 टीम ने 89.47 VP के साथ सिल्वर पर कब्जा किया। भारत 82.34 VP के साथ तीसरे स्थान पर रहा। फाइनल 5 अगस्त को राउंड रॉबिन फॉर्मेट में खेला गया, जिसमें प्रत्येक टीम ने अन्य सात फाइनलिस्ट टीमों के साथ सात-बोर्ड का मैच खेला।

टीम संयोजन और वीजा की चुनौती

भारतीय टीम में अंशुल भट्ट, साग्निक रॉय, सायनतन कुशारी, शुभम आचार्य, सुरजीत बार और विद्या पटेल शामिल थे। टीम के कप्तान एवं कोच कौस्तुभ बेंद्रे थे। कुछ खिलाड़ियों को समय पर चीन का वीजा नहीं मिल सका, जिससे खेलने वाले जोड़ों में बदलाव करना पड़ा। अंशुल भट्ट को अपने परिचित साथी शुभम आचार्य की जगह कोलकाता के नेशनल खिलाड़ी सायनतन कुशारी के साथ खेलना पड़ा, जबकि शुभम ने विद्या पटेल के साथ जोड़ी बनाई।

इन नई जोड़ियों ने तब तक टीम को संभाले रखा, जब तक कोलकाता से साग्निक रॉय और सुरजीत बार समय पर पहुँचकर टीम को मजबूत नहीं कर गए। इन परिस्थितियों के कारण अंशुल और विद्या ने भारत के आठ क्वालीफाइंग राउंड में से छह में एक साथ खेला।

क्वालीफाइंग से फाइनल तक का सफर

3 से 4 अगस्त के बीच हुए क्वालीफाइंग राउंड में भारत सातवें स्थान पर रहा और आठ टीमों के फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। गौरतलब है कि क्वालीफाइंग में निचले पायदान पर रहने के बावजूद भारत ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए पोडियम पर जगह बनाई।

विद्या पटेल: एक अनोखी पहचान

विद्या पटेल मध्य प्रदेश के रायबिदपुरा गाँव की रहने वाली हैं — एक ऐसा गाँव जो अपने ब्रिज खिलाड़ियों के लिए पहचाना जाता है। उनकी भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत में ब्रिज की जड़ें छोटे शहरों और गाँवों तक फैली हैं।

कोच की नज़र में अंशुल भट्ट

महज 17 वर्ष की उम्र में अंडर-31 स्तर पर खेल रहे अंशुल भट्ट के बारे में कोच कौस्तुभ बेंद्रे ने कहा, 'अंशुल को इसलिए चुना गया है, क्योंकि उन्होंने अपनी जगह बनाई है, न कि उनकी उम्र या शोहरत की वजह से। 17 साल की उम्र में ही वह अंडर-31 लेवल पर जरूरी अनुशासन, संयम और पार्टनरशिप की समझ दिखाते हैं।' यह टिप्पणी इस बात की ओर संकेत करती है कि भारतीय ब्रिज में युवा प्रतिभाओं को योग्यता के आधार पर अवसर दिए जा रहे हैं। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में इस टीम से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत ने ब्रॉन्ज जीतकर साबित किया कि ब्रिज जैसे बौद्धिक खेल में भारतीय प्रतिभा की गहराई है। यह उल्लेखनीय है कि क्वालीफाइंग में सातवें स्थान पर रहने के बावजूद फाइनल में पोडियम पर जगह बनाई गई। रायबिदपुरा जैसे छोटे गाँव से विद्या पटेल का अंतरराष्ट्रीय मंच पर उभरना और 17 वर्षीय अंशुल भट्ट का अंडर-31 स्तर पर प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारत में ब्रिज की प्रतिभा-पाइपलाइन मजबूत हो रही है — बशर्ते प्रशासनिक अड़चनें जैसे वीजा में देरी दूर की जाएँ।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

9वीं वर्ल्ड यूथ ट्रांसनेशनल ब्रिज चैंपियनशिप में भारत को कौन-सा मेडल मिला?
भारत की अंडर-31 टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। फाइनल राउंड रॉबिन में 82.34 विक्ट्री प्वाइंट्स के साथ आठ टीमों में तीसरा स्थान हासिल किया।
भारतीय ब्रिज टीम में कौन-कौन से खिलाड़ी शामिल थे?
टीम में अंशुल भट्ट, साग्निक रॉय, सायनतन कुशारी, शुभम आचार्य, सुरजीत बार और विद्या पटेल शामिल थे। टीम के कप्तान और कोच कौस्तुभ बेंद्रे थे।
वीजा देरी का भारतीय टीम पर क्या असर पड़ा?
कुछ खिलाड़ियों को समय पर चीन का वीजा नहीं मिला, जिससे टीम संयोजन में बदलाव करना पड़ा। अंशुल भट्ट को अपने परिचित साथी की जगह सायनतन कुशारी के साथ खेलना पड़ा, और अंशुल व विद्या पटेल ने आठ में से छह क्वालीफाइंग राउंड साथ खेले।
विद्या पटेल कौन हैं और वे कहाँ से हैं?
विद्या पटेल मध्य प्रदेश के रायबिदपुरा गाँव की रहने वाली हैं, जो ब्रिज खिलाड़ियों के लिए जाना जाता है। उन्होंने शुभम आचार्य के साथ जोड़ी बनाकर टीम को संकट के समय संभाला।
चैंपियनशिप का गोल्ड और सिल्वर मेडल किसने जीता?
गोल्ड मेडल चीन की एगोफैन्स टीम ने 89.96 विक्ट्री प्वाइंट्स के साथ जीता, जबकि सिल्वर मेडल 89.47 VP के साथ चीन की अंडर-31 टीम को मिला।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले