क्या 2025 में वो 5 अंतरराष्ट्रीय हस्तियां विदा हो गईं जो दुनिया को खामोश कर गईं?
सारांश
Key Takeaways
- जेन गुडॉल का चिंपांजी पर अध्ययन महत्वपूर्ण था।
- बहराम मोशिरी ने जटिल इतिहास को सरल बनाया।
- हेगे न्यूथ ने विचारों की स्वतंत्रता का समर्थन किया।
- फ्रैंक गेहरी की इमारतें कला और विज्ञान का संगम थीं।
- इयान डगलस-हैमिल्टन ने हाथियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
नई दिल्ली, 11 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। साल 2025 के अंत में कुछ ऐसी महान हस्तियां इस दुनिया को अलविदा कह गईं, जिन्होंने विज्ञान, साहित्य, मानवाधिकार, प्रकृति-संरक्षण और वैश्विक सोच में अद्वितीय योगदान दिया। इनका ज्ञान और कार्य हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। इनमें से एक ने चिंपाजियों के विशेषताओं के बारे में बताया, तो किसी ने हाथियों की भावनाओं का अध्ययन किया। कई हस्तियों ने लाखों लोगों की आवाज बनीं जबकि एक ने इमारतों के माध्यम से कविता की रचना की।
सबसे बड़ी हानि तब हुई जब अक्टूबर में प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और प्राइमेटोलॉजिस्ट जेन गुडॉल ने दुनिया को छोड़ दिया। उनके अनुसंधान ने चिंपांजी के व्यवहार और भावनाओं की नई परिभाषा दी। गुडॉल ने हमें बताया कि चिंपांजी केवल औजार बनाना ही नहीं जानता, बल्कि उनका उपयोग भी कुशलता से कर सकता है। उनका निधन 1 अक्टूबर 2025 को हुआ।
इतिहास और राजनीति को सरल भाषा में समझाने वाले बहराम मोशिरी भी 10 नवंबर को हमें छोड़कर चले गए। उनके जाने से ईरानी प्रवासी समाज ने एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व खो दिया, जो जटिल विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में सक्षम थे।
30 नवंबर को नार्वे की लेखिका हेगे न्यूथ ने 59 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहा। वह अपने समाज में विचारों की स्वतंत्रता की प्रवक्ता थीं और उनकी उपस्थिति लोकतंत्र के मूल्यों के लिए एक प्रतीक थी।
5 दिसंबर को आधुनिक वास्तुकला के जादूगर फ्रैंक गेहरी ने भी दुनिया को छोड़ दिया। उनकी इमारतें रचनात्मकता का एक अद्भुत उदाहरण थीं, जो कला और विज्ञान के संगम को दर्शाती थीं।
8 दिसंबर को जीवविज्ञानी इयान डगलस-हैमिल्टन का निधन हुआ, जो अफ्रीकी हाथियों की रक्षा में समर्पित थे। उनका कार्य संरक्षण विज्ञान में महत्वपूर्ण माना जाता था। दुख की बात यह है कि उनकी मृत्यु मधुमक्खियों के हमले के कारण हुई।