फर्जी अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाला: राजस्थान पुलिस ने पश्चिम बंगाल से 63 वर्षीय आरोपी को दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान पुलिस ने 7 अक्टूबर 2026 को अजमेर के शिक्षा विभाग की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में कथित फर्जीवाड़े के सिलसिले में पश्चिम बंगाल के 63 वर्षीय मोहम्मद अलाउद्दीन को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी उत्तर दिनाजपुर जिले के चोपड़ा थाना क्षेत्र स्थित नयाबाड़ी से की गई, जहाँ आरोपी निवास करता था।
मामले की पृष्ठभूमि
इस मामले की शुरुआत जिला शिक्षा अधिकारी दर्शना शर्मा की शिकायत से हुई, जो अजमेर के क्लॉक टावर थाने में दर्ज कराई गई थी। शिकायत के अनुसार, निजी संस्थानों के माध्यम से पीएसपी पोर्टल पर अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए और कथित तौर पर फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति राशि प्राप्त की गई।
गौरतलब है कि यह योजना आर्थिक रूप से कमज़ोर अल्पसंख्यक छात्रों की शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए बनाई गई है। आरोप है कि इस पोर्टल पर दर्ज फर्जी आवेदनों के ज़रिए सरकारी छात्रवृत्ति राशि की हेराफेरी की गई।
विशेष टीम का गठन और कार्रवाई
अजमेर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देश पर तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु जांगिड़ और उप पुलिस अधीक्षक मनीष बड़गुर्जर की निगरानी में घोटाले में शामिल आरोपियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई। क्लॉक टावर थाना प्रभारी भिखाराम काला के नेतृत्व में इस टीम को पश्चिम बंगाल और बिहार तक भेजा गया।
जाँच के दौरान पुलिस ने शिक्षा विभाग से संदिग्ध खाताधारकों और छात्रवृत्ति आवेदनों से जुड़ी विस्तृत जानकारी हासिल की, जिसके बाद कथित रूप से फर्जी आवेदन कर राशि प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की पहचान की गई।
आरोपी का परिचय
गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद अलाउद्दीन, शाहरुद्दीन के पुत्र हैं और पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के चोपड़ा थाना क्षेत्र स्थित नयाबाड़ी के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, अलाउद्दीन इस घोटाले में शामिल उन संदिग्धों में से हैं जिनकी पहचान ऑनलाइन आवेदन रिकॉर्ड और बैंक खाता विश्लेषण के आधार पर की गई।
आगे की जाँच
पुलिस ने बताया कि मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी भिखाराम काला, सहायक उप निरीक्षक भागचंद, सुवालाल, गीता तथा कांस्टेबल बृजेश पाल और देशराज शामिल रहे।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्यभर में सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े की घटनाएँ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जाँच अभी जारी है और यह स्पष्ट होना बाकी है कि कितनी राशि की हेराफेरी की गई और इसमें कितने लोग शामिल हैं।