अबोहर गोलीकांड: पीड़ित परिवार का पंजाब विधानसभा के बाहर धरना, भाजपा नेता जाखड़ ने AAP सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब विधानसभा के बाहर 22 अक्टूबर 2026 को अबोहर गोलीकांड के पीड़ित परिवार ने धरना दिया, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ और अश्विनी कुमार शर्मा ने उनका साथ दिया। अबोहर के संत नगर निवासी अजय कुमार की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए भाजपा नेताओं ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
मुख्य घटनाक्रम
पीड़ित परिवार के अनुसार, अजय कुमार की गोली मारकर हत्या की गई थी और उनका शव पिछले चार दिनों से मुर्दाघर में रखा है। परिवार का आरोप है कि अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित परिवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
यह मामला ड्रग्स से जुड़े अपराधों की कड़ी में एक और कड़ी बताया जा रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला भी इसी तरह विवादों में रहा था, जिसमें शव 10 दिनों से मुर्दाघर में रखे होने की बात कही गई।
भाजपा नेताओं के आरोप
भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने कहा, 'मानसा में परविंदर सिंह झोटा से जुड़े मामले के बारे में सब जानते हैं। आज 10 दिन हो गए हैं, और उनका शव अभी भी मानसा के मुर्दाघर में रखा है। यह सिर्फ मानसा का मामला नहीं है — यह पंजाब के हर घर की कहानी है।'
जाखड़ ने आगे आरोप लगाया, 'पुलिस ने अजय कुमार की हत्या के घटनाक्रम को लेकर मुकदमा ही दर्ज नहीं किया। जिस तरह परविंदर सिंह झोटा की हत्या हुई, ठीक उसी तरह अबोहर में अजय की जान ली गई।' उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित हत्यारों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और एक आरोपी का परिवार पहले से हत्या के मामले में 20 साल की सज़ा काट रहा है, जबकि वह स्वयं जमानत पर बाहर है — हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जाखड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी निशाना साधा और कहा कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हो रही। उन्होंने घोषणा की कि जब तक विधानसभा सत्र चलेगा, भाजपा प्रतिदिन ऐसे प्रदर्शन जारी रखेगी।
पीड़ित परिवार की व्यथा
पीड़ित परिवार ने बताया कि गोलीबारी की घटना के बाद से वे न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उनके अनुसार, स्थानीय अधिकारियों और पुलिस से बार-बार संपर्क करने के बावजूद न FIR दर्ज हुई और न किसी आरोपी को गिरफ्तार किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में ड्रग्स से जुड़े अपराधों पर विधानसभा सत्र के दौरान राजनीतिक तापमान पहले से ऊंचा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
फिलहाल AAP सरकार या पंजाब पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आलोचकों का कहना है कि राज्य में ड्रग्स से जुड़े हिंसक अपराधों में कथित तौर पर बढ़ोतरी और पुलिस की निष्क्रियता के आरोप सरकार के लिए गंभीर प्रशासनिक चुनौती बनते जा रहे हैं।
आगे क्या होगा
भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वह विधानसभा सत्र के प्रत्येक दिन पीड़ित परिवारों के साथ प्रदर्शन जारी रखेगी और सरकार पर दबाव बनाएगी। पीड़ित परिवार न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना भी तलाश रहा है। मामले में आगे की कार्रवाई और पुलिस का रुख राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े करेगा।