आगरा शिक्षक MLC चुनाव: निर्वाचन आयोग ने 6 अधिकारी निलंबित करने के दिए आदेश, 16 पुलिसकर्मियों सहित 21 पर कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग ने आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 23 अक्टूबर 2026 को हुए मतदान के दौरान गंभीर लापरवाही बरतने पर 6 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, दो पीठासीन अधिकारियों, तीन मतदान अधिकारियों और 16 पुलिसकर्मियों समेत कुल 21 सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के कार्यालय से सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, आगरा खंड के दो मतदेय स्थलों पर शिथिल पर्यवेक्षण और मतदान केंद्रों के भीतर तथा बाहर उचित नियंत्रण न रखने की गंभीर चूक उजागर हुई। आयोग ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कड़े कदम उठाने का फैसला किया।
आयोग के अनुसार, सैंया स्थित क्षेत्र पंचायत कार्यालय के कक्ष संख्या-1 में बने मतदेय स्थल संख्या-21 पर तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट ओपी चक, सेक्टर पुलिस अधिकारी हरिशरण सिंह और एत्माद्दौला थाने में तैनात उपनिरीक्षक संदीप कुमार को निलंबित किया जाएगा।
कौन-कौन अधिकारी हुए निलंबन की जद में
इसी प्रकार, फतेहाबाद स्थित क्षेत्र पंचायत कार्यालय के कक्ष संख्या-1 में बने मतदेय स्थल संख्या-26 पर तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट विशाल राठौर, सेक्टर पुलिस अधिकारी पुरुषोत्तम पाल और एकता थाने में तैनात उपनिरीक्षक सुमित त्यागी को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, दोनों मतदेय स्थलों पर तैनात दो पीठासीन अधिकारियों, तीन मतदान अधिकारियों, पाँच हेड कांस्टेबल और 11 कांस्टेबल के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सुलतानपुर में फर्जी हस्ताक्षर से मतदाता नाम काटने का मामला
सुलतानपुर जिले में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर के जरिए मतदाता सूची से नाम हटवाने की साजिश का भी पर्दाफाश हुआ है। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, समाजवादी पार्टी ने 15 अक्टूबर को प्रेस वार्ता में आरोप लगाया था कि नंद लाल के फर्जी हस्ताक्षर से फार्म-7 भरवाकर मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश की गई।
जाँच में सामने आया कि बूथ संख्या-96, प्राथमिक विद्यालय अर्जुनपुर के कक्ष संख्या-1 पर नंद लाल के हस्ताक्षर से 26 मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के लिए फार्म-7 बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) को सौंपे गए थे। हालांकि, इन फार्मों में आवेदक का नाम, मतदाता पहचान पत्र संख्या और मोबाइल नंबर जैसे आवश्यक विवरण दर्ज नहीं थे, जिसके कारण सभी 26 आवेदन अपूर्ण पाए गए और एक भी स्वीकार नहीं किया गया।
बीएलओ पर कार्रवाई, एफआईआर दर्ज
संबंधित बीएलओ को निर्वाचन कार्य से हटा दिया गया है और उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। बीएलओ सुपरवाइजर ने 24 अक्टूबर 2026 को गोसाईगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(3), 340(2) और 318(4) के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है। आयोग का यह कदम चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
निलंबन की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से लागू होगी, जबकि शेष 15 कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक जाँच के चरण अगले कुछ दिनों में पूरे होने की संभावना है। यह मामला उत्तर प्रदेश में चुनावी निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता की कसौटी बनेगा, क्योंकि राज्य में आगामी चुनावी कार्यक्रम को देखते हुए ऐसी कार्रवाइयाँ एक नज़ीर पेश करती हैं।