क्या वटवा में एएमसी का अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी है?
सारांश
Key Takeaways
- अहमदाबाद में अतिक्रमण हटाने का अभियान चल रहा है।
- 450 से ज्यादा अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलेगा।
- जल निकायों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
- पुलिस बल और भारी मशीनरी के साथ कार्रवाई की जा रही है।
- वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की गई है।
अहमदाबाद, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अहमदाबाद के वटवा क्षेत्र में मंगलवार को बंदरवट (वानरवत) तलाव के निकट अहमदाबाद महानगर पालिका द्वारा एक महत्वपूर्ण अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई की शुरुआत सुबह ही की गई, जिसमें पूरे इलाके में भरपूर पुलिस बल तैनात किया गया।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नगर निगम और प्रशासन की टीमें पूरी तरह से सतर्क रहीं और किसी भी अप्रिय घटना का सामना करने के लिए समन्वय से कार्य किया गया। अभियान के दौरान अतिक्रमण हटाने के लिए जेसीबी और हिताची जैसी भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कार्रवाई को तेज और प्रभावी बनाया जा सका।
एएमसी के अनुसार, यह पूरा क्षेत्र तालाब यानी वॉटर बॉडी का है। यहां लंबे समय से अवैध निर्माण हो चुके थे, जिससे न केवल पानी की प्राकृतिक व्यवस्था प्रभावित हो रही थी, बल्कि आस-पास के क्षेत्र में जलभराव और गंदगी की समस्या भी बढ़ रही थी। इसी कारण निगम ने यह कठोर कदम उठाया। कार्रवाई के दौरान लगभग 430 रेजिडेंशियल मकान और लगभग 30 कमर्शियल ढांचे हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
निगम अधिकारियों ने बताया कि वानरवत तलाव और टीपी रोड को मिलाकर लगभग 58 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त किया जाएगा। इसमें करीब 28 हजार वर्ग मीटर तालाब का हिस्सा है, जबकि बाकी हिस्सा टीपी रोड और आसपास का क्षेत्र है।
इस अभियान में करीब 10 बड़ी हिताची मशीनें और 5 से 10 जेसीबी लगाई गईं। कुछ हिताची मशीनें बड़ी बकेट वाली थीं, जबकि कुछ नीडल वाली थीं, ताकि मजबूत ढांचों को भी आसानी से तोड़ा जा सके। अधिकारियों के अनुसार, इतनी ज्यादा मशीनें इसलिए लगाई गईं ताकि काम जल्दी और बिना ज्यादा दबाव के पूरा किया जा सके। इस कार्य के लिए करीब 8 टीमें बनाई गई हैं और लगभग 500 पुलिस वाले भी मौके पर मौजूद हैं।
डीवाईएमसी बी. सी. परमार ने बताया कि वानरवत तलाव पर डेमोलिशन की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि महालक्ष्मी झील, रोपड़ झील और वानरवत झील को आपस में जोड़ने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इससे इलाके में पानी का प्रेशर कम होगा और बारिश के समय जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक सर्वे के अनुसार 430 रेजिडेंशियल और करीब 25 से 30 कमर्शियल प्रॉपर्टी यहां बनी हुई थीं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम की नीति के तहत जो लोग 2010 से पहले यहां रह रहे थे और जिनके पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें वैकल्पिक आवास दिया जाएगा। ऐसे लोगों से आवेदन फार्म भरवाए जा रहे हैं और उनके लिए दूसरे इंतजाम किए जा रहे हैं।
वहीं, असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर यतेंद्र नायक ने कहा कि यह पूरी जगह तालाब की है और वॉटर बॉडी में किसी भी तरह का अवैध निर्माण जनता के हित में नहीं है। इसलिए इन्हें हटाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यदि किसी परिवार को तुरंत परेशानी होती है तो निगम ने शेल्टर होम की व्यवस्था भी की है, जहां 300 से 400 परिवारों के रहने का इंतजाम है। वहां खाने-पीने की भी सुविधा दी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर बसों की मदद से लोगों को शेल्टर होम तक पहुंचाया जाएगा। किसी को कोई दिक्कत न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उनके अनुसार, इतनी बड़ी टीम, पुलिस फोर्स और भारी मशीनरी की मदद से यह पूरा अभियान एक ही दिन में खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।