सलेम के ओडियाथुर में अंबेडकर प्रतिमा विवाद हिंसक, 6 घायल; 100+ पुलिसकर्मी तैनात
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के सलेम जिले के ओडियाथुर गाँव में 12 जुलाई को डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा से अचानक कपड़ा हटाए जाने के बाद दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें एक महिला पुलिसकर्मी सहित तीन पुलिसकर्मी और तीन महिला प्रदर्शनकारी घायल हो गईं। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए गाँव में 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
विवाद की जड़ें: 2020 से चला आ रहा टकराव
यह विवाद वर्ष 2020 में उस समय शुरू हुआ जब एक समूह ने ओडियाथुर पंचायत के फोर रोड्स चौराहे पर डॉ. अंबेडकर की बैठी हुई प्रतिमा स्थापित की। प्रतिमा में संविधान निर्माता को एक पैर दूसरे पर रखे हुए दर्शाया गया है। स्थानीय समुदाय के एक वर्ग ने इस स्थान पर प्रतिमा स्थापित करने और उसके अनावरण का विरोध किया था।
वर्ष 2021 में जब प्रतिमा के अनावरण का प्रयास हुआ, तब तत्कालीन तहसीलदार वेंकटेशन ने राजस्व और पुलिस अधिकारियों के साथ हस्तक्षेप करते हुए निर्देश दिया कि सभी पक्षों के बीच सहमति बनने तक प्रतिमा को ढककर रखा जाए। इसके बाद करीब पाँच वर्षों तक प्रतिमा कपड़े से ढकी रही।
मुख्य घटनाक्रम: शनिवार की रात क्या हुआ
शनिवार को अचानक प्रतिमा से कपड़ा हटाए जाने के बाद विवाद फिर भड़क उठा। एक पक्ष ने माँग की कि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने तक प्रतिमा को दोबारा ढका जाए, जबकि दूसरा पक्ष इसका विरोध करने लगा। तनाव बढ़ने पर अत्तूर के सहायक कलेक्टर कार्यालय में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ शांति समिति की बैठक बुलाई गई।
शनिवार रात करीब नौ बजे सहायक कलेक्टर तमिलमणि और सलेम के पुलिस अधीक्षक कुथालिंगम मौके पर पहुँचे और धातु की चादरों से प्रतिमाओं को घेरने की कार्रवाई शुरू कराई। इसी दौरान एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने अग्निशमन विभाग के वाहन से पानी की बौछार कर भीड़ को तितर-बितर किया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
सहायक कलेक्टर तमिलमणि ने स्पष्ट किया कि अदालत की अनुमति मिलने के बाद ही अंबेडकर प्रतिमा का औपचारिक अनावरण किया जा सकेगा। शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उन्होंने अंबेडकर प्रतिमा के साथ-साथ के. कामराज और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रतिमाओं को भी अस्थायी रूप से ढकने का निर्देश दिया। सभी 6 घायलों को गंगावल्ली सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
गौरतलब है कि यह विवाद केवल एक प्रतिमा तक सीमित नहीं है — यह सामाजिक प्रतिनिधित्व और सार्वजनिक स्थान पर अधिकार के व्यापक सवालों से जुड़ा है, जो तमिलनाडु के कई जिलों में समय-समय पर उभरते रहे हैं। फिलहाल गाँव में भारी पुलिस बल तैनात है और पुलिस व राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं। मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण अनावरण का भविष्य न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।