उत्तर कोरिया ने अमेरिकी मानव तस्करी रिपोर्ट को नकारा, लगातार 24वें वर्ष 'टियर-3' में रखे जाने पर भड़का
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी विदेश विभाग की 2026 की मानव तस्करी रिपोर्ट को 'झूठ, मनगढ़ंत तथ्यों, पूर्वाग्रह और शत्रुता से भरा दस्तावेज' करार देते हुए शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को कड़ी प्रतिक्रिया जताई। प्योंगयांग ने इस रिपोर्ट को 'राजनीति से प्रेरित गंभीर उकसावा' बताते हुए आरोप लगाया कि वाशिंगटन मानवाधिकारों के मुद्दे की आड़ में उत्तर कोरिया के विरुद्ध अपनी शत्रुतापूर्ण नीति को आगे बढ़ा रहा है।
लगातार 24वें वर्ष 'टियर-3' में
अमेरिकी विदेश विभाग ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को जारी अपनी वार्षिक मानव तस्करी रिपोर्ट में उत्तर कोरिया को मानव तस्करी रोकने के प्रयासों के मामले में सबसे निचली श्रेणी 'टियर-3' में रखा। यह लगातार 24वाँ वर्ष है जब उत्तर कोरिया इस श्रेणी में बना हुआ है। इस श्रेणी में उत्तर कोरिया के अलावा चीन, रूस, ईरान और क्यूबा भी शामिल हैं।
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान
उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'अमेरिका मानवाधिकारों को राजनीतिक हथियार बनाकर देश की संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना चाहता है।' प्रवक्ता ने यह भी कहा कि 'इस तरह के दस्तावेजों का इस्तेमाल दूसरे देशों की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को बदलने के औचित्य के रूप में किया जाता है।' उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) ने इस बयान को प्रकाशित किया।
प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया के संप्रभु अधिकारों और नागरिकों के हितों को खतरा पैदा करने वाली अमेरिकी मानवाधिकार नीति के खिलाफ 'कड़ी जवाबी कार्रवाई' की जाएगी। हालाँकि, बयान में किसी विशिष्ट कदम का उल्लेख नहीं किया गया।
अमेरिकी रिपोर्ट में लगाए गए आरोप
अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट में उत्तर कोरियाई सरकार पर राजनीतिक कैद शिविरों और श्रम प्रशिक्षण केंद्रों में मानव तस्करी को 'संस्थागत रूप' देने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में जबरन श्रम का उपयोग राजनीतिक दमन की व्यवस्था के अंग के रूप में होता है और इससे प्राप्त धन सरकारी कामकाज में लगाया जाता है।
रिपोर्ट में विदेशों में तैनात उत्तर कोरियाई श्रमिकों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, 'इनमें से कई लोगों को अत्यधिक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, कुछ को खतरनाक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है और उनके पासपोर्ट तक उनकी पहुँच नहीं होती।'
व्यापक संदर्भ: अमेरिका-उत्तर कोरिया मतभेद
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच कूटनीतिक संबंध पहले से ही अत्यंत तनावपूर्ण हैं। गौरतलब है कि प्योंगयांग हर वर्ष इस रिपोर्ट को अस्वीकार करता रहा है और इसे अमेरिकी साम्राज्यवाद का औजार बताता आया है। विशेषज्ञों के अनुसार, 'टियर-3' वर्गीकरण का सीधा अर्थ है कि संबंधित देश को अमेरिकी सहायता पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है, हालाँकि उत्तर कोरिया पर पहले से इतनी पाबंदियाँ हैं कि इस वर्गीकरण का व्यावहारिक असर सीमित माना जाता है।
आगे क्या होगा
इस विवाद से दोनों देशों के बीच मानवाधिकारों को लेकर जारी गहरे मतभेद एक बार फिर उजागर हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन उत्तर कोरिया की स्थिति पर निगरानी जारी रखे हुए हैं, जबकि प्योंगयांग बाहरी आलोचना को सिरे से खारिज करता रहा है। यह देखना होगा कि क्या यह नवीनतम विवाद दोनों देशों के बीच किसी नई कूटनीतिक प्रतिक्रिया को जन्म देता है।