किम यो जोंग का बड़ा बयान: अमेरिका से बातचीत विकल्प, राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की बहन और देश की प्रभावशाली नेता किम यो जोंग ने 4 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ बातचीत शांति स्थापित करने का एक विकल्प हो सकती है, लेकिन प्योंगयांग इसे अपने राष्ट्रीय हितों के लिए अनिवार्य नहीं मानता। उन्होंने साथ ही वाशिंगटन पर उत्तर कोरिया के प्रति शत्रुतापूर्ण नीति बनाए रखने का आरोप लगाया, और चेतावनी दी कि जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं।
किम यो जोंग का मूल बयान
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, किम यो जोंग ने कहा, 'शांति के विकल्पों में निश्चित रूप से बातचीत भी शामिल है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि बातचीत हमारे राष्ट्रीय हितों के बराबर है।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका लगातार ऐसे संकेत दे रहा है जो प्योंगयांग को उसके वास्तविक इरादों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य कर रहे हैं।
किम ने यह भी स्पष्ट किया, 'उत्तर कोरिया को ऐसे अविश्वसनीय और शत्रुतापूर्ण लोगों के साथ आमने-सामने बैठने की ज़रूरत नहीं है, जो अपनी टकराव की नीति छोड़ने को तैयार नहीं हैं।' उनके अनुसार, जब तक वाशिंगटन अपनी नीति नहीं बदलता, प्योंगयांग के पास बातचीत की मेज पर बैठने का कोई कारण नहीं है।
क्रिप्टोकरेंसी आरोपों पर पलटवार
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी संघीय जाँच एजेंसी FBI ने दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज Binance से 6 अरब डॉलर से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी चोरी के मामले में उत्तर कोरिया की संलिप्तता का आरोप लगाया है। किम यो जोंग ने इस आरोप को 'राजनीतिक उकसावे की कार्रवाई' बताते हुए खारिज किया।
उन्होंने कहा कि तथाकथित उत्तर कोरियाई क्रिप्टोकरेंसी हैकिंग का मामला अमेरिका की प्योंगयांग-विरोधी नीति की वास्तविक प्रकृति की 'केवल एक झलक' है। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया पहले भी इस तरह के तकनीकी जासूसी और साइबर हमलों के आरोपों को नकारता रहा है।
त्रिपक्षीय बैठक और सैन्य अभ्यास पर आपत्ति
किम यो जोंग ने दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के विदेश मंत्रियों की हालिया त्रिपक्षीय बैठक का भी उल्लेख किया, जिसमें तीनों देशों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। उन्होंने इन देशों के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को उत्तर कोरिया के खिलाफ 'शत्रुतापूर्ण गतिविधियों' का हिस्सा करार दिया।
किम के अनुसार, अमेरिका को उत्तर कोरिया के प्रति अपनी शत्रुतापूर्ण नीति छोड़नी होगी, और यह सभी समस्याओं के समाधान के लिए 'सबसे महत्वपूर्ण शर्त' है। उन्होंने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी, हालाँकि संभावित कदमों का ब्यौरा नहीं दिया।
ट्रंप-किम मुलाकात की अटकलों के बीच बयान
यह बयान उस समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी किम जोंग उन से मुलाकात की इच्छा जता चुके हैं, और इस महीने दोनों नेताओं के बीच संभावित संपर्क को लेकर अटकलें भी चल रही हैं। हालाँकि, किम यो जोंग केताज़ा बयान से स्पष्ट होता है कि प्योंगयांग की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिया गया है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान उत्तर कोरिया की रणनीतिक दृढ़ता का हिस्सा है — जहाँ वह बातचीत की संभावना को पूरी तरह बंद नहीं करता, लेकिन शर्तें इतनी कठोर रखता है कि पहल की जिम्मेदारी अमेरिका पर बनी रहे। आगे यह देखना होगा कि वाशिंगटन इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या किसी कूटनीतिक संपर्क की संभावना बनती है।