19 सितंबर 2026
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उत्तर कोरिया ने आईएईए प्रस्ताव को नकारा, किम यो जोंग बोलीं — परमाणु ताकत पर कोई समझौता नहीं

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उत्तर कोरिया ने आईएईए प्रस्ताव को नकारा, किम यो जोंग बोलीं — परमाणु ताकत पर कोई समझौता नहीं

सारांश

उत्तर कोरिया ने आईएईए के 70वें महासम्मेलन में पारित परमाणु रोक प्रस्ताव को नकारते हुए साफ कहा — परमाणु ताकत उसकी संप्रभुता की नींव है, जिसे अमेरिका या पश्चिम की 'सहनशीलता' पर टिका नहीं रखा जाएगा। किम यो जोंग की यह दो दिन में दूसरी आक्रामक चेतावनी है।

मुख्य बातें

उत्तर कोरिया ने 19 सितंबर 2026 को आईएईए के परमाणु प्रस्ताव को औपचारिक रूप से खारिज किया।
किम यो जोंग ने सरकारी मीडिया केसीएनए के जरिए कहा — परमाणु ताकत की विश्वसनीयता पर किसी भी परिस्थिति में सवाल नहीं उठने दिया जाएगा।
आईएईए ने वियना में 70वें महासम्मेलन के दौरान प्रस्ताव पारित कर एनपीटी के तहत उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार संपन्न देश का दर्जा देने से इनकार किया था।
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने भी कहा — परमाणु स्थिति किसी बाहरी मान्यता पर निर्भर नहीं, यह देश के कानून में दर्ज है।
किम यो जोंग ने अमेरिका पर यूरोप में परमाणु हथियार तैनाती और दक्षिण कोरिया जापान को विस्तारित परमाणु प्रतिरोध देने का आरोप लगाते हुए आईएईए पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया।

उत्तर कोरिया ने 19 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें प्योंगयांग से अपनी परमाणु गतिविधियाँ तत्काल बंद करने और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) की शर्तों का पालन करने की माँग की गई थी। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन और वरिष्ठ अधिकारी किम यो जोंग ने स्पष्ट कहा कि उनका देश किसी भी परिस्थिति में अपनी परमाणु शक्ति की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठने देगा।

आईएईए का प्रस्ताव और उसकी पृष्ठभूमि

आईएईए ने वियना में अपने 70वें महासम्मेलन के दौरान एक प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव में दोहराया गया कि एनपीटी के तहत उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार संपन्न देश का दर्जा नहीं दिया जा सकता। एजेंसी ने प्योंगयांग से अपनी समस्त परमाणु गतिविधियाँ तुरंत रोकने का आह्वान किया था। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब कोरियाई प्रायद्वीप पर भू राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है।

किम यो जोंग का कड़ा जवाब

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के माध्यम से जारी बयान में किम यो जोंग ने कहा, "आईएईए का प्रस्ताव प्योंगयांग के विरुद्ध है। एजेंसी उत्तर कोरिया की सुरक्षा स्थिति में बाहरी परमाणु खतरों को नज़रअंदाज़ करते हुए उसके परमाणु कार्यक्रम पर सवाल उठा रही है।" उन्होंने आगे कहा, "उत्तर कोरिया अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के अधिकार को अमेरिका या पश्चिम की 'सहनशीलता' पर निर्भर नहीं करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है कि उत्तर कोरिया की परमाणु ताकत की विश्वसनीयता पर किसी भी परिस्थिति में सवाल न उठे।"

गौरतलब है कि यह बयान उनके उस वक्तव्य के मात्र दो दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने उत्तर कोरिया की परमाणु हथियार संपन्न देश की स्थिति को 'पूर्ण' और अपरिवर्तनीय बताया था। यह लगातार बढ़ती आक्रामक भाषा का संकेत है।

अमेरिका पर दोहरे मानदंड का आरोप

किम यो जोंग ने अमेरिका पर कई मोर्चों पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने यूरोप में अमेरिकी परमाणु हथियारों की तैनाती और साझाकरण, दक्षिण कोरिया तथा जापान के साथ विस्तारित परमाणु प्रतिरोध व्यवस्था, और दक्षिण कोरिया को परमाणु पनडुब्बी तकनीक उपलब्ध कराने की कथित योजनाओं का विशेष उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन कदमों को नज़रअंदाज़ करते हुए केवल उत्तर कोरिया को निशाना बनाना अन्यायपूर्ण है।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने भी आईएईए के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की। मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में उत्तर कोरिया की स्थिति को अमेरिका, पश्चिमी देशों या आईएईए की किसी भी मान्यता की आवश्यकता नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, यह स्थिति देश के वास्तविक परमाणु प्रतिरोध और राष्ट्रीय कानून में दर्ज प्रावधानों पर आधारित है।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्योंगयांग बाहरी चुनौतियों और खतरों का मुकाबला करने के लिए अपनी सैन्य क्षमता के जरिए देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा जारी रखेगा।

कोरियाई प्रायद्वीप पर बढ़ता गतिरोध

आईएईए के प्रस्ताव और उत्तर कोरिया की तीखी प्रतिक्रिया ने एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु मुद्दे पर प्योंगयांग और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच गहरे मतभेदों को उजागर किया है। आईएईए जहाँ उत्तर कोरिया की परमाणु गतिविधियों पर अंकुश लगाने की माँग पर अड़ा है, वहीं प्योंगयांग ने साफ कर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को आत्मरक्षा और संप्रभुता का अविभाज्य हिस्सा मानता है। विश्लेषकों के अनुसार, यह टकराव निकट भविष्य में किसी समाधान की ओर नहीं जाता दिख रहा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह संकेत है कि प्योंगयांग परमाणु मुद्दे पर किसी भी बहुपक्षीय दबाव को वैधता देने को तैयार नहीं। गौरतलब है कि किम यो जोंग दो दिनों में दो बार सामने आईं — यह असाधारण है और दर्शाता है कि प्योंगयांग इस प्रस्ताव को गंभीर चुनौती मान रहा है। आईएईए की सीमा यह है कि उसके पास प्रवर्तन का कोई तंत्र नहीं — वह प्रस्ताव पारित कर सकता है, पर उत्तर कोरिया पर निरीक्षण थोप नहीं सकता। अमेरिका पर दोहरे मानदंड का आरोप कोई नई रणनीति नहीं, लेकिन इस बार इसमें दक्षिण कोरिया को परमाणु पनडुब्बी तकनीक की कथित योजना का उल्लेख — जो अभी तक पुष्ट नहीं — एक नया और उकसावे वाला तत्व है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज नज़रअंदाज़ कर रही है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएईए ने उत्तर कोरिया के बारे में क्या प्रस्ताव पारित किया था?
आईएईए ने वियना में अपने 70वें महासम्मेलन के दौरान एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें दोहराया गया कि एनपीटी के तहत उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार संपन्न देश का दर्जा नहीं दिया जा सकता। साथ ही प्योंगयांग से अपनी सभी परमाणु गतिविधियाँ तत्काल रोकने का आह्वान किया गया।
उत्तर कोरिया ने आईएईए प्रस्ताव को क्यों खारिज किया?
उत्तर कोरिया का कहना है कि आईएईए उसके परमाणु कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए अमेरिका की ओर से उत्पन्न कथित परमाणु खतरों को नज़रअंदाज़ कर रही है। किम यो जोंग ने इसे दोहरे मानदंड का उदाहरण बताते हुए कहा कि उनका देश अपनी परमाणु ताकत को किसी बाहरी दबाव में नहीं छोड़ेगा।
किम यो जोंग कौन हैं और उनका उत्तर कोरिया में क्या स्थान है?
किम यो जोंग, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन और देश की सबसे प्रभावशाली वरिष्ठ अधिकारियों में से एक हैं। वे अक्सर संवेदनशील विदेश नीति और सुरक्षा मामलों पर सरकार का आधिकारिक रुख सामने रखती हैं।
उत्तर कोरिया एनपीटी के तहत अपनी परमाणु स्थिति को कैसे देखता है?
उत्तर कोरिया का विदेश मंत्रालय कहता है कि परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में उसकी स्थिति किसी भी बाहरी मान्यता पर निर्भर नहीं — यह उसके वास्तविक परमाणु प्रतिरोध और राष्ट्रीय कानून में दर्ज है। प्योंगयांग एनपीटी की वैधता को अपने ऊपर लागू नहीं मानता।
कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु गतिरोध अब किस दिशा में जाएगा?
विश्लेषकों के अनुसार, आईएईए के पास उत्तर कोरिया पर प्रस्ताव लागू करवाने का कोई प्रवर्तन तंत्र नहीं है। किम यो जोंग के लगातार आक्रामक बयानों को देखते हुए निकट भविष्य में किसी कूटनीतिक सफलता की संभावना कम दिखती है, और दोनों पक्षों के बीच यह गतिरोध जारी रहने की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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