19 सितंबर 2026
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बेंगलुरु सड़क निरीक्षण: मंत्री कृष्णा बायर गौडा ने रात में पकड़ी 34% स्ट्रीटलाइट बंद, अधिकारियों को कड़ी फटकार

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बेंगलुरु सड़क निरीक्षण: मंत्री कृष्णा बायर गौडा ने रात में पकड़ी 34% स्ट्रीटलाइट बंद, अधिकारियों को कड़ी फटकार

सारांश

बेंगलुरु की रात में मंत्री बायर गौडा की सख्त परीक्षा — 34% स्ट्रीटलाइट बंद, फुटपाथ टूटे, नालियाँ खुली। जुलाई-अगस्त की बैठकें और एक इंजीनियर का निलंबन भी बेअसर। अब दोगुना जुर्माना, ब्लैकलिस्टिंग और जीबीए-पुलिस टास्क फोर्स का ऐलान।

मुख्य बातें

कर्नाटक विकास मंत्री कृष्णा बायर गौडा ने 19 सितंबर 2026 की रात 9 बजे से आधी रात तक बेंगलुरु के दक्षिणी कॉरिडोर का औचक निरीक्षण किया।
जेपी नगर-गोट्टिगेरे रूट पर 1,540 में से 530 स्ट्रीटलाइट (34%) बंद मिलीं; एलईडी कॉन्ट्रैक्ट फरवरी में समाप्त होने के बाद भी काम अधूरा।
7 और 15 सितंबर को हुए पूर्व सर्वे के 11 दिन बाद भी जमीनी स्थिति में कोई सुधार नहीं, इससे पहले जुलाई-अगस्त में बैठकें और एक इंजीनियर का निलंबन भी बेअसर रहा।
खराब ठेकेदारों पर दोगुना जुर्माना और जरूरत पड़ने पर ब्लैकलिस्टिंग का आदेश; अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी।
बन्नेरघट्टा रोड पर ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के तहत 'व्हाइट-टॉपिंग' का दीर्घकालिक निर्णय; फुटपाथ अतिक्रमण रोकने हेतु जीबीए-पुलिस संयुक्त टास्क फोर्स का ऐलान।

कर्नाटक के विकास मंत्री कृष्णा बायर गौडा ने 19 सितंबर 2026 की रात 9 बजे से आधी रात तक — करीब 3 घंटे से अधिक — बेंगलुरु के दक्षिणी कॉरिडोर का औचक निरीक्षण किया, जिसमें स्ट्रीटलाइट, फुटपाथ, नालियों और सड़कों की दुर्दशा उजागर हुई। जेपी नगर मेट्रो स्टेशन से आउटर रिंग रोड, बैनरघट्टा मेन रोड होते हुए गोट्टिगेरे एनआईसीई रोड जंक्शन तक के इस दौरे में कमियों की लंबी फेहरिस्त सामने आई और अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई।

मुख्य निष्कर्ष: एक-तिहाई स्ट्रीटलाइट बंद

निरीक्षण का सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह रहा कि जेपी नगर-गोट्टिगेरे रूट पर कुल 1,540 स्ट्रीटलाइट में से 530 — यानी लगभग 34 प्रतिशत — पूरी तरह बंद मिलीं। केवल 1,010 लाइटें चालू हालत में थीं।

मंत्री ने बताया कि उनके कार्यालय के कर्मचारियों ने 7 और 15 सितंबर को रात में इसी मार्ग का सर्वे किया था, और 11 दिन बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया था। गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई और अगस्त में उच्च-स्तरीय बैठकें हो चुकी थीं, बार-बार निर्देश दिए जा चुके थे और एक इंजीनियर को निलंबित भी किया जा चुका था — फिर भी जमीन पर कोई असर नहीं दिखा।

मंत्री ने यह भी पाया कि एलईडी लाइटिंग का कॉन्ट्रैक्ट फरवरी में समाप्त हो चुका था, लेकिन ठेकेदार समयसीमा के बाद भी काम पूरा नहीं कर पाया। इसके अलावा सड़क की चौड़ाई के अनुसार आवश्यक 120-वाट की लाइटों के स्थान पर 90-वाट की पुरानी लाइटें ही लगाई जा रही थीं। हाई-डेंसिटी लाइटें और मीडियन लाइटें भी जर्जर हालत में मिलीं।

फुटपाथ और नालियों की बदहाली

साउथ कॉर्पोरेशन कमिश्नर के.एन. रमेश और वरिष्ठ नागरिक अधिकारियों की उपस्थिति में मंत्री ने वेगा सिटी मॉल जंक्शन, नागार्जुन होटल और एम्पायर होटल के पास फुटपाथों की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई। कई स्थानों पर कंक्रीट की स्लैब इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं, जबकि खुली नालियाँ पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बनी हुई थीं।

बिना ढकी नालियों के ठीक बगल में पड़ी स्लैब की ओर इशारा करते हुए बायर गौडा ने अधिकारियों से सीधे सवाल किया कि उपलब्ध सामग्री होने के बावजूद इस खतरनाक स्थिति को ठीक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने निर्देश दिया कि फुटपाथों पर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए कंक्रीट रैंप बनाए जाएँ, वाहनों को फुटपाथ पर चढ़ने से रोकने के लिए प्रेस्ड-कंक्रीट बोलार्ड लगाए जाएँ और पैदल चलने वालों के लिए ब्रश किए हुए कंक्रीट से समतल सतह तैयार की जाए।

विज्ञापन बोर्ड, मलबा और अनधिकृत कब्जे

हुलिमावु के पास क्राइस्ट यूनिवर्सिटी और मेगा सिटी मॉल के आस-पास अपर्याप्त रोशनी पाई गई। वेगा सिटी मॉल के सामने खुशी फर्टिलिटी सेंटर के पास सड़क पर गड्ढे और निर्माण मलबा बिखरा मिला। अधिकारियों को 'फ्रीडम फ्रॉम वेस्ट' अभियान के तहत तत्काल मलबा हटाने का निर्देश दिया गया।

हुलिमावु में मारुति पब्लिक स्कूल के पास मैकेनिकल सफाई अप्रभावी पाई गई। मंत्री ने फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे अनधिकृत विज्ञापन बोर्डों को तत्काल हटाने का आदेश दिया। साथ ही बेस्कॉम के साथ मिलकर फुटपाथ पर पड़े खतरनाक बिजली के केबल और पाइप हटाने के लिए संयुक्त निरीक्षण का निर्देश भी दिया।

बन्नेरघट्टा रोड और दीर्घकालिक समाधान

बन्नेरघट्टा-एनआईसीई रोड-गोट्टिगेरे जंक्शन पर मंत्री ने सड़क चौड़ीकरण, ड्रेनेज और सरफेसिंग कार्यों में गंभीर कमियाँ पाईं — एक जगह नाला बनाते समय अनावश्यक मोड़ देने से सड़क की वास्तविक चौड़ाई कम हो गई थी।

मीडिया से बात करते हुए बायर गौडा ने बताया कि मेट्रो निर्माण और बीडब्ल्यूएसएसबी पाइपलाइन बिछाने के कारण बन्नेरघट्टा रोड को व्यापक नुकसान हुआ है। डामर से अस्थायी मरम्मत के बावजूद भारी यातायात के चलते सड़क को नुकसान जारी है। दीर्घकालिक समाधान के रूप में ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के तहत पूरी बन्नेरघट्टा रोड पर 'व्हाइट-टॉपिंग' का निर्णय लिया गया है।

आगे की कार्रवाई और चेतावनी

मंत्री ने घोषणा की कि फुटपाथों को खाली कराने के बाद दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए जीबीए और शहर पुलिस की एक संयुक्त टास्क फोर्स शीघ्र गठित की जाएगी। बायर गौडा ने अधिकारियों को स्ट्रीटलाइट, गड्ढों की मरम्मत और फुटपाथ रखरखाव को तत्काल प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

उन्होंने खराब काम करने वाले ठेकेदारों पर दोगुना जुर्माना लगाने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने का आदेश भी दिया। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सुधार नहीं हुआ, तो जमीनी स्तर से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह निरीक्षण बेंगलुरु के नागरिक बुनियादी ढाँचे में जवाबदेही की नई मिसाल बनाने की दिशा में एक सख्त कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बार-बार की बैठकें, निर्देश और एक इंजीनियर के निलंबन के बावजूद 11 दिन में कुछ नहीं बदला — यह प्रशासनिक ढाँचे की संरचनात्मक विफलता की ओर इशारा करता है, न कि महज लापरवाही की। बेंगलुरु में ठेकेदारी प्रणाली में जवाबदेही की जो कमी उजागर हुई है, वह अकेले जुर्माने और ब्लैकलिस्टिंग से नहीं सुधरेगी — जब तक टेंडर प्रक्रिया, निगरानी तंत्र और तकनीकी ऑडिट को नहीं सुधारा जाता। 'व्हाइट-टॉपिंग' और टास्क फोर्स की घोषणाएँ स्वागतयोग्य हैं, पर नागरिकों को परिणाम चाहिए — अगली घोषणा नहीं।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्री कृष्णा बायर गौडा ने बेंगलुरु में रात को निरीक्षण क्यों किया?
विकास मंत्री बायर गौडा ने बेंगलुरु के दक्षिणी कॉरिडोर में स्ट्रीटलाइट, फुटपाथ और नालियों की वास्तविक स्थिति जाँचने के लिए 19 सितंबर की रात औचक निरीक्षण किया। उनके कार्यालय के कर्मचारी 7 और 15 सितंबर को पूर्व सर्वे कर चुके थे, लेकिन 11 दिनों में कोई सुधार नहीं हुआ था।
निरीक्षण में बेंगलुरु की स्ट्रीटलाइट को लेकर क्या पाया गया?
जेपी नगर-गोट्टिगेरे रूट पर कुल 1,540 स्ट्रीटलाइट में से 530 — यानी लगभग 34 प्रतिशत — बंद पाई गईं। इसके अलावा 120-वाट की जरूरी लाइटों की जगह 90-वाट की पुरानी लाइटें लगाई जा रही थीं और एलईडी कॉन्ट्रैक्ट फरवरी में समाप्त हो जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ था।
बन्नेरघट्टा रोड के लिए दीर्घकालिक समाधान क्या घोषित किया गया?
मंत्री बायर गौडा ने बताया कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के तहत पूरी बन्नेरघट्टा रोड पर 'व्हाइट-टॉपिंग' का काम किया जाएगा। यह निर्णय मेट्रो निर्माण और बीडब्ल्यूएसएसबी पाइपलाइन बिछाने से सड़क को हुए व्यापक नुकसान के मद्देनजर लिया गया है।
फुटपाथ अतिक्रमण रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएँगे?
मंत्री ने घोषणा की कि फुटपाथों को खाली कराने के बाद दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए जीबीए और शहर पुलिस की एक संयुक्त टास्क फोर्स शीघ्र गठित की जाएगी। साथ ही वाहनों को फुटपाथ पर चढ़ने से रोकने के लिए प्रेस्ड-कंक्रीट बोलार्ड लगाने का निर्देश भी दिया गया।
लापरवाह ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
मंत्री बायर गौडा ने निर्देश दिया कि खराब काम करने वाले ठेकेदारों पर दोगुना जुर्माना लगाया जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए। यह भी चेतावनी दी गई कि सुधार न होने पर जमीनी स्तर से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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