भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन 21-22 सितंबर को मेरठ-सहारनपुर दौरे पर, पश्चिमी UP की 71 सीटों पर चुनावी तैयारी की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 21 और 22 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के मेरठ और सहारनपुर का दौरा करेंगे। इस दो दिवसीय यात्रा में वे आगामी चुनावों को लेकर पार्टी की जमीनी तैयारियों की समीक्षा करेंगे, संगठनात्मक बैठकें आयोजित करेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह उनका पहला दौरा होगा।
मेरठ में क्या होगा — 21 सितंबर का कार्यक्रम
21 सितंबर को नितिन नवीन मेरठ पहुँचेंगे, जहाँ वे क्षेत्रीय पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों, पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों के साथ बैठकें करेंगे। बैठकों में बूथ स्तर, शक्ति केंद्र, जिला और मंडल स्तर पर पार्टी की तैयारियों का आकलन किया जाएगा। नवीन उसी रात मेरठ में विश्राम करेंगे।
सहारनपुर में संगठनात्मक बैठकें और जनसभा — 22 सितंबर
22 सितंबर को नितिन नवीन सहारनपुर जाएंगे, जहाँ इसी प्रकार की संगठनात्मक बैठकें होंगी और वे एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। सहारनपुर ऐतिहासिक रूप से भाजपा के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियानों का प्रमुख केंद्र रहा है। उल्लेखनीय है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने अपना प्रदेश अभियान सहारनपुर से ही शुरू किया था, और 2017, 2019 व 2022 के चुनावों में भी इस क्षेत्र से अभियान की शुरुआत हुई थी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 71 सीटें क्यों अहम हैं
भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 71 विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है — यह वह क्षेत्र है जिसने परंपरागत रूप से पूरे राज्य में चुनावी नतीजों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी बूथ-स्तर पर लामबंदी और संगठनात्मक तालमेल को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
दौरे का राजनीतिक महत्व
नितिन नवीन के इस दौरे को पार्टी नेतृत्व के स्तर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जमीनी नेटवर्क को सुदृढ़ करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि यह राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनकी इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की पहली यात्रा है, जो पार्टी की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है।
आगे क्या होगा
इस दौरे के बाद भाजपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियाँ और तेज होने की संभावना है। पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच बूथ-स्तर पर समन्वय और चुनावी रणनीति पर विशेष बल दिए जाने की उम्मीद है।