उत्तर कोरिया यात्रा पर अमेरिकी विदेश विभाग की 'लेवल-4' चेतावनी बरकरार, गिरफ्तारी और हिरासत का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश विभाग ने उत्तर कोरिया के लिए अपनी सबसे कड़ी यात्रा चेतावनी — 'लेवल-4: डू नॉट ट्रैवल' — को एक बार फिर बरकरार रखा है। विभाग के अनुसार, उत्तर कोरिया में अमेरिकी नागरिकों के मनमाने तरीके से गिरफ्तार किए जाने, लंबे समय तक हिरासत में रखे जाने और बंदी बनाए जाने का गंभीर खतरा बना हुआ है। यह घोषणा 6 अगस्त को वाशिंगटन में विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता द्वारा की गई।
ट्रैवल बैन की पृष्ठभूमि
1 सितंबर 2017 से अमेरिकी पासपोर्ट का उत्तर कोरिया की यात्रा के लिए उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल विशेष परिस्थितियों में और विदेश विभाग की पूर्व लिखित अनुमति मिलने पर ही यात्रा संभव है। यह प्रतिबंध हर वर्ष नवीनीकृत किया जाता रहा है। पिछले महीने विभाग ने संघीय रजिस्टर पर एक आधिकारिक नोटिस जारी करते हुए इस ट्रैवल बैन को 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाने की घोषणा की, क्योंकि मौजूदा प्रतिबंध इस वर्ष 31 अगस्त को समाप्त होने वाला था।
चेतावनी की वजह: राजनयिक शून्यता और कानूनी अनिश्चितता
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, उत्तर कोरिया में स्थानीय कानूनों को मनमाने तरीके से लागू किया जा सकता है। विदेशी नागरिकों — विशेष रूप से अमेरिकियों — को बिना किसी स्पष्ट कारण के हिरासत में लिए जाने का जोखिम बना रहता है। दोनों देशों के बीच कोई राजनयिक संबंध न होने के कारण ऐसी स्थितियों में अमेरिकी सरकार की सहायता पहुँचाना भी अत्यंत कठिन होता है।
पूर्व राजदूत की ढील की सिफारिश, सरकार का इनकार
उत्तर कोरिया के मानवाधिकार मामलों के पूर्व अमेरिकी विशेष दूत रॉबर्ट किंग ने 2017 से लागू इस ट्रैवल बैन में ढील देने की सिफारिश की थी। हालाँकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हैं और इसीलिए लेवल-4 चेतावनी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
अमेरिकी नागरिकों के लिए सरकार की अपील
विदेश विभाग ने अपने नागरिकों से स्पष्ट अपील की है कि वे उत्तर कोरिया की यात्रा की कोई भी योजना न बनाएँ। यदि किसी असाधारण परिस्थिति में अनुमति मिली भी हो, तो संभावित सुरक्षा जोखिमों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए। अमेरिकी सरकार समय-समय पर इस यात्रा सलाह की समीक्षा करती है और ताज़ा समीक्षा के बाद भी उसने माना है कि उत्तर कोरिया में विदेशी नागरिकों के साथ व्यवहार और वहाँ की सुरक्षा स्थिति अत्यधिक जोखिमपूर्ण बनी हुई है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच परमाणु कूटनीति पर वार्ता व्यावहारिक रूप से ठप है। गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों में उत्तर कोरिया ने अमेरिकी नागरिकों को लंबे समय तक बंदी बनाए रखने के कई मामले दर्ज किए हैं। जब तक दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध बहाल नहीं होते और उत्तर कोरिया की कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं आती, विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध आगे भी जारी रहने की संभावना है।