कांगो में इबोला प्रकोप: दक्षिण कोरिया ने तीन प्रांतों पर 'लेवल-4' यात्रा प्रतिबंध लागू किए
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने 22 मई 2026 को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप के मद्देनज़र इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु — तीन प्रांतों के लिए कड़े यात्रा प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की। पूर्वी कांगो में अब तक 160 से अधिक संदिग्ध मौतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।
नया यात्रा अलर्ट: क्या बदला
शुक्रवार दोपहर 2 बजे से इटुरी प्रांत के लिए देश की चार-स्तरीय चेतावनी प्रणाली का सर्वोच्च स्तर — 'लेवल-4' ट्रैवल अलर्ट — लागू कर दिया गया। इस फैसले के साथ ही डीआरसी में 'नो-ट्रैवल जोन' घोषित प्रांतों की संख्या बढ़कर तीन हो गई, क्योंकि नॉर्थ किवु और साउथ किवु पहले से इस श्रेणी में थे।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जो दक्षिण कोरियाई नागरिक बिना विशेष सरकारी अनुमति के इन क्षेत्रों में प्रवेश करेंगे या वहाँ रहेंगे, उन पर पासपोर्ट कानून के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
लेवल-3 अलर्ट और अन्य प्रभावित क्षेत्र
इसके साथ ही मंत्रालय ने लेवल-3 अलर्ट भी जारी किया, जिसके तहत नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे मध्य अफ्रीकी गणराज्य की सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे वाले इलाकों तथा कांगो के सात अन्य प्रांतों — जिनमें बास-उएले और हाउट-उएले शामिल हैं — से बाहर निकल जाएँ या वहाँ न जाएँ। डीआरसी के शेष हिस्सों के लिए पहले से एक विशेष यात्रा सलाह लागू है।
युगांडा पर भी विशेष सलाह
यह ऐसे समय में आया है जब गुरुवार को मंत्रालय ने पूरे युगांडा के लिए भी विशेष यात्रा सलाह जारी की थी। यह निर्णय कोरिया रोग नियंत्रण और रोकथाम एजेंसी (KDCA) की उस सिफारिश के बाद आया, जिसमें डीआरसी, युगांडा और दक्षिण सूडान को इबोला के लिए प्राथमिक क्वारंटीन प्रबंधन देशों की सूची में रखा गया है।
इबोला प्रकोप की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पूर्वी कांगो में इबोला संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है और रिपोर्टों के अनुसार अब तक 160 से अधिक संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं। इबोला एक अत्यंत संक्रामक वायरल रक्तस्रावी बुखार है, जिसकी मृत्यु दर ऐतिहासिक रूप से 25% से 90% तक दर्ज की गई है। यह क्षेत्र पहले भी कई बार इबोला प्रकोप का केंद्र रह चुका है।
आगे की स्थिति
दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है और ज़रूरत पड़ने पर यात्रा चेतावनियों में और बदलाव किए जाएँगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्रकोप पर काबू नहीं पाया जाता, अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंध और कड़े होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।