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उत्तर कोरिया ने एमएसएमटी रिपोर्ट को 'अवैध' बताया, 1 लाख श्रमिकों पर प्रतिबंध उल्लंघन के आरोप खारिज

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उत्तर कोरिया ने एमएसएमटी रिपोर्ट को 'अवैध' बताया, 1 लाख श्रमिकों पर प्रतिबंध उल्लंघन के आरोप खारिज

सारांश

उत्तर कोरिया ने एमएसएमटी की उस रिपोर्ट को 'अवैध' और 'आधारहीन' बताया, जिसमें 17 देशों में 1 लाख उत्तर कोरियाई श्रमिकों की मौजूदगी और रूस में सैन्य ड्रोन निर्माण में संलिप्तता के आरोप लगाए गए थे। प्योंगयांग ने इसे संप्रभुता पर हमला करार दिया।

मुख्य बातें

उत्तर कोरिया ने अमेरिका के नेतृत्व वाले एमएसएमटी की हालिया रिपोर्ट को 'अवैध' बताकर सिरे से खारिज किया।
एमएसएमटी रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 17 देशों में करीब 1 लाख उत्तर कोरियाई श्रमिक मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या चीन और रूस में है।
रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया कि कुछ उत्तर कोरियाई श्रमिक रूस की फैक्ट्रियों में सैन्य ड्रोन निर्माण में शामिल रहे।
प्योंगयांग ने विदेशों में श्रमिक भेजने को वैध आर्थिक सहयोग बताया और संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध व्यवस्था की वैधता पर ही सवाल उठाया।
एमएसएमटी का गठन अक्टूबर 2024 में हुआ था, जब रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विशेषज्ञ समिति के कार्यकाल विस्तार प्रस्ताव को वीटो कर दिया था।

उत्तर कोरिया ने 22 सितंबर 2026 को अमेरिका के नेतृत्व वाले बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी समूह (एमएसएमटी) की हालिया रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करते हुए उसे 'अवैध' करार दिया। प्योंगयांग ने आरोप लगाया कि यह समूह सामान्य और कानूनी गतिविधियों को गैरकानूनी बताकर पेश कर रहा है तथा विदेशों में नागरिकों को काम भेजने के कार्यक्रम को वैध आर्थिक सहयोग का हिस्सा बताया।

उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया

उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सरकारी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के ज़रिए जारी बयान में एमएसएमटी पर कड़े शब्दों में हमला बोला। प्रवक्ता ने कहा, "एमएसएमटी ने सामान्य गतिविधियों को असामान्य और कानूनी गतिविधियों को गैरकानूनी बताकर अपनी वास्तविक मंशा उजागर कर दी है।" प्योंगयांग ने यह भी कहा कि द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संधियों के आधार पर होने वाले सहयोग में किसी तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप या जाँच का अधिकार नहीं है।

एमएसएमटी रिपोर्ट में क्या था

पिछले सप्ताह जारी एमएसएमटी की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उत्तर कोरिया संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए अपने नागरिकों को विदेशों में काम के लिए भेज रहा है। समूह के अनुसार, कम से कम 17 देशों में करीब 1 लाख उत्तर कोरियाई श्रमिक मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या चीन और रूस में है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि कुछ उत्तर कोरियाई श्रमिक रूस की फैक्ट्रियों में सैन्य ड्रोन के निर्माण में कथित तौर पर शामिल रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध व्यवस्था पर सवाल

उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने उस संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध व्यवस्था की वैधता पर ही सवाल उठाया, जिसके तहत उत्तर कोरियाई नागरिकों को विदेशों में काम भेजने पर रोक है। प्योंगयांग ने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों — जिनमें देशों की संप्रभुता का सम्मान और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अहस्तक्षेप शामिल हैं — का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

एमएसएमटी का गठन और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि एमएसएमटी का गठन अक्टूबर 2024 में हुआ था। इसका उद्देश्य उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के क्रियान्वयन की निगरानी करना और उल्लंघनों को उजागर करना है। यह समूह उस समय अस्तित्व में आया जब रूस ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विशेषज्ञ समिति के कार्यकाल विस्तार प्रस्ताव को वीटो कर दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब रूस उत्तर कोरिया सैन्य सहयोग के आरोप अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठते रहे हैं।

आगे क्या होगा

उत्तर कोरिया ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी 'उन्नति' और 'पारस्परिक सहयोग' को बाधित करने की किसी भी कोशिश का कड़ा जवाब देगा। विश्लेषकों के अनुसार प्योंगयांग का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह एमएसएमटी की निगरानी को किसी भी रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, और भविष्य में इस मुद्दे पर कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर तब जब रूसी ड्रोन कारखानों में उत्तर कोरियाई श्रमिकों की संलिप्तता का आरोप लगाया गया हो। असली सवाल यह है कि एमएसएमटी के पास अपने निष्कर्षों को लागू कराने की कोई व्यावहारिक शक्ति है या नहीं — क्योंकि रूस और चीन दोनों इसकी निगरानी में बाधक बनते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की मूल विशेषज्ञ समिति को पहले ही वीटो से बेअसर किया जा चुका है। ऐसे में एमएसएमटी की रिपोर्टें भले ही तथ्यात्मक रूप से मज़बूत हों, बिना अनुपालन तंत्र के वे राजनयिक दस्तावेज़ से अधिक कुछ नहीं बन पातीं।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएसएमटी क्या है और इसका गठन क्यों हुआ?
एमएसएमटी यानी बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी समूह का गठन अक्टूबर 2024 में हुआ था। इसका उद्देश्य उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के क्रियान्वयन की निगरानी करना है। यह तब अस्तित्व में आया जब रूस ने इसी काम को करने वाली पूर्व संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ समिति के कार्यकाल विस्तार को वीटो कर दिया था।
एमएसएमटी रिपोर्ट में उत्तर कोरिया पर क्या आरोप लगाए गए?
रिपोर्ट में कहा गया कि उत्तर कोरिया संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए अपने नागरिकों को विदेशों में काम के लिए भेज रहा है। समूह के अनुसार कम से कम 17 देशों में करीब 1 लाख उत्तर कोरियाई श्रमिक मौजूद हैं, और कुछ श्रमिक कथित तौर पर रूस की फैक्ट्रियों में सैन्य ड्रोन निर्माण में शामिल रहे हैं।
उत्तर कोरिया ने रिपोर्ट को क्यों खारिज किया?
उत्तर कोरिया ने कहा कि विदेशों में श्रमिक भेजना द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संधियों के तहत वैध आर्थिक सहयोग है। प्योंगयांग ने एमएसएमटी पर आरोप लगाया कि वह सामान्य गतिविधियों को गैरकानूनी बताकर उसकी संप्रभुता का हनन कर रहा है और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन हो रहा है।
उत्तर कोरियाई श्रमिक किन देशों में हैं?
एमएसएमटी के अनुसार कम से कम 17 देशों में उत्तर कोरियाई श्रमिक मौजूद हैं। रिपोर्ट में चीन और रूस में इनकी सबसे बड़ी संख्या होने का उल्लेख किया गया है।
इस विवाद का भविष्य में क्या असर पड़ सकता है?
उत्तर कोरिया ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी हस्तक्षेप का कड़ा जवाब देगा। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक रूस और चीन एमएसएमटी की निगरानी को राजनीतिक रूप से समर्थन नहीं देते, प्योंगयांग पर व्यावहारिक दबाव बनाना कठिन रहेगा और यह कूटनीतिक गतिरोध बना रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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