किम जोंग-उन ने नई हथियार प्रणाली के परीक्षण को बताया रक्षा तकनीक में 'ऐतिहासिक बदलाव'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन की निगरानी में रविवार को एक नई लड़ाकू हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया, जिसे प्योंगयांग ने 22 सितंबर 2026 को सार्वजनिक किया। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (KCNA) के अनुसार, देश के मिसाइल ब्यूरो ने इस परीक्षण को 'हथियार प्रणाली की तकनीक को आगे बढ़ाने के लिहाज़ से काफी अहम' बताया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव पहले से ही चरम पर है।
परीक्षण का विवरण और किम का बयान
KCNA के अनुसार, किम जोंग-उन ने परीक्षण स्थल पर मौजूद रहते हुए इस हथियार प्रणाली को 'आधुनिक रक्षा तकनीक का साफ प्रदर्शन' और 'सशस्त्र सेनाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में एक स्पष्ट नया बदलाव' करार दिया। किम ने दावा किया कि इस तकनीक का विकास विरोधियों के लिए 'बेहद कठिन और ऐसी चुनौती होगी, जिससे बचा नहीं जा सकता।' उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया के विरोधी सैन्य नज़रिए से इस तकनीकी प्रगति का अर्थ भली-भाँति समझेंगे।
उत्तर कोरिया ने यह स्पष्ट नहीं किया कि परीक्षण की गई हथियार प्रणाली किस प्रकार की थी। विशेषज्ञों के अनुसार, विवरण छुपाना प्योंगयांग की सामान्य रणनीति का हिस्सा है।
दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने इस परीक्षण से दो दिन पहले ही घोषणा की थी कि उत्तर कोरिया ने वॉनसान इलाके से ईस्ट सी की दिशा में दो कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया अक्सर अपने परीक्षणों की घोषणा दक्षिण कोरियाई या अमेरिकी खुलासे के बाद ही करता है, जिससे कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की रणनीति स्पष्ट होती है।
UN प्रतिबंध और कामगार विवाद
मिसाइल परीक्षण के साथ-साथ एक अलग घटनाक्रम में प्योंगयांग ने अमेरिका के नेतृत्व वाली बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी टीम (MSMT) की हालिया रिपोर्ट को गैरकानूनी बताते हुए खारिज किया। KCNA के माध्यम से जारी उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, 'MSMT ने साफ तौर पर दिखा दिया है कि वह साजिशें रचने वाला संगठन है, जो सामान्य चीज़ों को असामान्य बनाकर पेश करता है और कानूनी गतिविधियों को गैरकानूनी बताता है।'
MSMT ने पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि उत्तर कोरिया संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए अपने कामगारों को विदेश भेज रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 17 देशों में उत्तर कोरिया के लगभग एक लाख कामगार मौजूद हैं, जिनमें अधिकांश चीन और रूस में हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ उत्तर कोरियाई कामगार रूस की फैक्ट्रियों में सैन्य ड्रोन निर्माण में संलग्न थे।
क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भ
यह परीक्षण ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को तेज़ी से विस्तार दे रहा है। आलोचकों का कहना है कि रूस-उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग ने पश्चिमी देशों की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। किम द्वारा इस तकनीक को 'भविष्य में सशस्त्र सेनाओं के विकास के लिए अहम' बताना संकेत देता है कि प्योंगयांग की रक्षा महत्वाकांक्षाएँ लंबी अवधि की रणनीतिक योजना का हिस्सा हैं।
आगे की स्थिति
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर कोरिया के इस नवीनतम परीक्षण से अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच सुरक्षा समन्वय की आवश्यकता और बढ़ जाएगी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, हालाँकि चीन और रूस की वीटो शक्ति के चलते कोई ठोस कार्रवाई की उम्मीद कम है।