4 अगस्त 2026
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उत्तर कोरिया ने 11 देशों की साइबर चेतावनी खारिज की, अमेरिका को बताया असली जिम्मेदार

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उत्तर कोरिया ने 11 देशों की साइबर चेतावनी खारिज की, अमेरिका को बताया असली जिम्मेदार

सारांश

उत्तर कोरिया ने 11 देशों की संयुक्त साइबर चेतावनी को 'घिसा-पिटा राजनीतिक आरोप' बताकर ठुकरा दिया और साइबर क्षेत्र के सैन्यीकरण के लिए सीधे अमेरिका को कठघरे में खड़ा किया। यह कूटनीतिक पलटवार प्योंगयांग की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह हर अंतरराष्ट्रीय दबाव को 'साम्राज्यवादी षड्यंत्र' करार देता है।

मुख्य बातें

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया, अमेरिका, जापान सहित 11 देशों की संयुक्त साइबर चेतावनी को 4 अगस्त 2026 को सिरे से खारिज किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे 'झूठी जानकारी पर आधारित घिसा-पिटा राजनीतिक आरोप' बताया।
11 देशों ने आरोप लगाया था कि उत्तर कोरियाई आईटी कर्मचारी फर्जी पहचान से विदेशी कंपनियों में नौकरियाँ हासिल कर हथियार कार्यक्रम के लिए विदेशी मुद्रा जुटाते हैं।
प्योंगयांग ने साइबर क्षेत्र के सैन्यीकरण के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया और उस पर साइबर युद्ध क्षमता बढ़ाने का आरोप लगाया।
उत्तर कोरिया ने कहा कि वह साइबर मुद्दे को राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेगा।

उत्तर कोरिया ने 4 अगस्त 2026 को दक्षिण कोरिया, अमेरिका, जापान सहित 11 देशों द्वारा जारी संयुक्त साइबर चेतावनी को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'झूठी जानकारी पर आधारित घिसा-पिटा राजनीतिक आरोप' करार दिया है। प्योंगयांग के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए साइबर क्षेत्र के सैन्यीकरण के लिए सीधे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।

मुख्य घटनाक्रम

पिछले सप्ताह 11 देशों ने एक साझा चेतावनी जारी कर आरोप लगाया था कि उत्तर कोरिया के आईटी कर्मचारी फर्जी पहचान और जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर विदेशी कंपनियों में फ्रीलांस और रिमोट नौकरियाँ हासिल कर रहे हैं। संयुक्त चेतावनी में दावा किया गया कि इन गतिविधियों से अर्जित विदेशी मुद्रा का उपयोग प्योंगयांग अपने हथियार कार्यक्रम के वित्तपोषण के लिए करता है। इसी के मद्देनज़र देशों और कंपनियों को कर्मचारियों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया और साइबर सुरक्षा उपाय सुदृढ़ करने की सलाह दी गई थी।

उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के हवाले से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह संयुक्त चेतावनी उत्तर कोरिया की छवि को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से गढ़ा गया राजनीतिक प्रपंच है। प्रवक्ता ने तर्क दिया कि वाशिंगटन स्वयं लगातार अपनी साइबर युद्ध क्षमता बढ़ा रहा है और सहयोगी देशों के साथ संयुक्त साइबर अभ्यास आयोजित करता रहता है।

बयान में यह भी कहा गया कि दुनिया की सबसे बड़ी साइबर क्षमता रखने वाले देश का दूसरों पर 'साइबर खतरे' का आरोप लगाना तर्कसंगत नहीं है। उत्तर कोरिया के अनुसार, 'साइबर खतरे' का मुद्दा केवल संप्रभु देशों पर दबाव बनाने और अपनी नीतियों को न्यायसंगत ठहराने का बहाना है।

साइबर क्षेत्र पर उत्तर कोरिया का रुख

प्योंगयांग ने स्पष्ट किया कि साइबर क्षेत्र पूरी मानवता की साझा विरासत है और गलत सूचनाओं के आधार पर उसमें वर्चस्व स्थापित करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर कोरिया साइबर मुद्दे को राजनीतिक और वैचारिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के किसी भी प्रयास को अस्वीकार करता है।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया के आईटी कर्मियों द्वारा विदेशी कंपनियों में घुसपैठ की घटनाएँ पश्चिमी देशों की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी ट्रेज़री और न्याय विभाग पहले भी उत्तर कोरियाई साइबर ऑपरेटरों पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि प्योंगयांग की यह प्रतिक्रिया उसके पुराने पैटर्न के अनुरूप है, जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय आरोपों को 'साम्राज्यवादी षड्यंत्र' बताकर खारिज करता रहा है।

आगे क्या होगा

उत्तर कोरिया ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह हर क्षेत्र में अपने राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा जारी रखेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कूटनीतिक तनातनी के बीच 11 देशों के गठबंधन द्वारा साइबर सतर्कता और बहुपक्षीय समन्वय और अधिक मजबूत किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी बहुपक्षीय कार्रवाई की गति धीमी रही है। जब तक सत्यापन तंत्र और कानूनी जवाबदेही के ठोस ढाँचे नहीं बनते, ये संयुक्त चेतावनियाँ कूटनीतिक बयानबाजी से आगे नहीं जाएँगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

11 देशों ने उत्तर कोरिया के खिलाफ साइबर चेतावनी क्यों जारी की?
दक्षिण कोरिया, अमेरिका, जापान सहित 11 देशों ने आरोप लगाया कि उत्तर कोरियाई आईटी कर्मचारी फर्जी पहचान और जाली दस्तावेजों से विदेशी कंपनियों में रिमोट नौकरियाँ हासिल करते हैं और इससे अर्जित विदेशी मुद्रा प्योंगयांग के हथियार कार्यक्रम में जाती है। इसीलिए कंपनियों को पहचान सत्यापन और साइबर सुरक्षा उपाय मजबूत करने की सलाह दी गई।
उत्तर कोरिया ने इस चेतावनी पर क्या कहा?
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे 'झूठी जानकारी पर आधारित घिसा-पिटा राजनीतिक आरोप' बताया और कहा कि यह चेतावनी उत्तर कोरिया की छवि खराब करने का प्रयास है। प्रवक्ता ने साइबर क्षेत्र के सैन्यीकरण के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।
उत्तर कोरिया ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाए?
प्योंगयांग ने कहा कि अमेरिका लगातार अपनी साइबर युद्ध क्षमता बढ़ा रहा है और सहयोगी देशों के साथ संयुक्त साइबर अभ्यास आयोजित कर रहा है। उत्तर कोरिया का तर्क है कि दुनिया की सबसे बड़ी साइबर क्षमता रखने वाले देश का दूसरों पर साइबर खतरे का आरोप लगाना तर्कसंगत नहीं है।
उत्तर कोरियाई आईटी कर्मचारियों से कंपनियों को क्या खतरा है?
कथित तौर पर उत्तर कोरियाई आईटी कर्मचारी फर्जी पहचान से विदेशी कंपनियों में घुसपैठ कर विदेशी मुद्रा अर्जित करते हैं, जो प्योंगयांग के हथियार कार्यक्रम के वित्तपोषण में उपयोग होती है। 11 देशों ने इसी खतरे को देखते हुए कंपनियों को कर्मचारियों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया सुदृढ़ करने की सलाह दी है।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, 11 देशों का यह गठबंधन साइबर सतर्कता और बहुपक्षीय समन्वय और अधिक मजबूत कर सकता है। उत्तर कोरिया ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास हितों की रक्षा जारी रखेगा, जिससे यह कूटनीतिक तनाव निकट भविष्य में और गहराने की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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