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अमेरिका-जापान साइबर डायलॉग: वाशिंगटन में 11वीं बैठक के बाद इंटेलिजेंस शेयरिंग और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी पर सहमति

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अमेरिका-जापान साइबर डायलॉग: वाशिंगटन में 11वीं बैठक के बाद इंटेलिजेंस शेयरिंग और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी पर सहमति

सारांश

वाशिंगटन में 11वीं यूएस-जापान साइबर डायलॉग के बाद दोनों देशों ने साझा मोर्चा खोला — AI-सक्षम खतरों, हिंद-प्रशांत में साइबर अपराध और पोस्ट-क्वांटम एन्क्रिप्शन पर ठोस प्रतिबद्धताएँ जताई गईं। यह गठबंधन डिजिटल युद्धक्षेत्र में नई धुरी बनता दिख रहा है।

मुख्य बातें

अमेरिका और जापान ने 30 जून–1 जुलाई 2026 को वाशिंगटन में 11वीं यूएस-जापान साइबर डायलॉग आयोजित की।
दोनों देश इंटेलिजेंस शेयरिंग , महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा और AI -आधारित साइबर खतरों पर संयुक्त आकलन साझा करने पर सहमत हुए।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साइबर अपराध और स्कैम सेंटर्स से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन और कूटनीतिक समन्वय का संकल्प लिया गया।
दोनों देशों ने पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) को राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से अपनाने पर सहमति जताई।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में FBI , CISA , NSC और FCC सहित कई प्रमुख एजेंसियाँ शामिल रहीं।

अमेरिका और जापान ने 30 जून व 1 जुलाई 2026 को वाशिंगटन में आयोजित 11वीं यूएस-जापान साइबर डायलॉग के बाद साइबर सुरक्षा सहयोग को नई ऊँचाई देने का संकल्प लिया। दोनों देशों ने संयुक्त बयान में इंटेलिजेंस शेयरिंग को मज़बूत करने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साइबर अपराध से निपटने और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) को तेज़ी से अपनाने की प्रतिबद्धता जताई।

बैठक का स्वरूप और नेतृत्व

इस दो दिवसीय संवाद की मेज़बानी अमेरिका ने की। अमेरिकी पक्ष की सहअध्यक्षता डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के ब्यूरो ऑफ इमर्जिंग थ्रेट्स और ब्यूरो ऑफ ईस्ट एशियन एंड पैसिफिक अफेयर्स ने की। जापान की ओर से विदेश मंत्रालय और नेशनल साइबरसिक्योरिटी ऑफिस ने वार्ता का नेतृत्व किया।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, नेशनल साइबर डायरेक्टर ऑफिस, नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर ऑफिस, युद्ध विभाग, न्याय विभाग, फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI), गृह सुरक्षा विभाग, साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी (CISA), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी (NIST) और फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) के अधिकारी शामिल थे।

जापान के प्रतिनिधिमंडल में आंतरिक मामलों और संचार मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, व्यापार और उद्योग मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, नेशनल पुलिस एजेंसी और पब्लिक सिक्योरिटी इंटेलिजेंस एजेंसी के प्रतिनिधि शामिल रहे।

मुख्य प्रतिबद्धताएँ

संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों ने 'साइबरस्पेस में खतरों से सीधे निपटने की साझा प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।' दोनों पक्ष द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को गहरा करने के लिए नई तकनीक का लाभ उठाने, सूचना साझाकरण को सुदृढ़ करने और अंतरसंचालनीयता (इंटरऑपरेबिलिटी) बेहतर बनाने पर सहमत हुए।

विशेष रूप से, दोनों सरकारें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती तकनीकों का उपयोग करने और भरोसेमंद तकनीक पर आधारित सुरक्षित एवं संप्रभु क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ाने पर राज़ी हुईं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों में AI की भूमिका तेज़ी से बढ़ रही है।

हिंद-प्रशांत और साइबर अपराध पर फोकस

दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साइबर अपराध और स्कैम सेंटर्स से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और ज़रूरत के अनुसार निजी क्षेत्र के साथ समन्वय का संकल्प लिया। इसके अलावा, क्षेत्र के तीसरे देशों में साइबर रेजिलिएंस और रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए तकनीकी सहायता को समन्वित करने का भी वादा किया गया।

गौरतलब है कि परिष्कृत सरकारी और गैर-सरकारी तत्वों से उत्पन्न खतरों का साझा आकलन तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा पर खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान भी इस सहयोग के केंद्र में है।

पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और नीतिगत समन्वय

दोनों देश पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) को राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से अपनाने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए — यह एक दीर्घकालिक साइबर सुरक्षा प्राथमिकता है जो क्वांटम कंप्यूटिंग के उभरते खतरों से बचाव के लिए अनिवार्य मानी जाती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय साइबर नीति को एकरूप करने और अपनी-अपनी राष्ट्रीय साइबर रणनीतियाँ साझा करने पर भी सहमति बनी।

बयान में स्पष्ट किया गया कि अमेरिका और जापान साइबर नीति, अभियान, तकनीकी सहायता और निजी क्षेत्र के साथ जुड़ाव पर निरंतर घनिष्ठ तालमेल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस संवाद में चिह्नित प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में भी परामर्श जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'प्रतिबद्धता' और 'क्रियान्वयन' के बीच की खाई पर ध्यान देना ज़रूरी है — पिछली बैठकों के बाद भी इसी तरह के संयुक्त बयान आते रहे हैं। हिंद-प्रशांत में साइबर अपराध और स्कैम सेंटर्स का उल्लेख सीधे तौर पर उन क्षेत्रीय चुनौतियों की ओर इशारा करता है जिनसे भारत भी जूझ रहा है — यह भारत के लिए एक संकेत है कि क्वाड साझेदारी में साइबर सुरक्षा की भूमिका और गहरी होगी। पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी पर जोर यह बताता है कि दोनों देश क्वांटम कंप्यूटिंग को निकट भविष्य का खतरा मान चुके हैं — यह नीतिगत परिपक्वता का संकेत है, भले ही ठोस समयसीमा अभी अनुपस्थित है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

11वीं यूएस-जापान साइबर डायलॉग क्या है और यह कब हुई?
यह अमेरिका और जापान के बीच साइबर सुरक्षा पर नियमित द्विपक्षीय संवाद की 11वीं कड़ी है, जो 30 जून और 1 जुलाई 2026 को वाशिंगटन में आयोजित हुई। इसमें दोनों देशों के कई प्रमुख सुरक्षा, खुफिया और तकनीकी एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस बैठक में किन मुद्दों पर सहमति बनी?
दोनों देश इंटेलिजेंस शेयरिंग बढ़ाने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा, AI-सक्षम साइबर खतरों पर संयुक्त आकलन, हिंद-प्रशांत में साइबर अपराध से निपटने और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी अपनाने पर सहमत हुए। अंतरराष्ट्रीय साइबर नीति को एकरूप करने पर भी चर्चा हुई।
पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) क्यों महत्वपूर्ण है?
पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी एक उभरती एन्क्रिप्शन तकनीक है जो भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों द्वारा मौजूदा साइबर सुरक्षा प्रणालियों को तोड़े जाने के खतरे से बचाव के लिए ज़रूरी मानी जाती है। अमेरिका और जापान का इसे राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से अपनाने का संकल्प इस खतरे को निकट भविष्य की चुनौती मानने का संकेत है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साइबर अपराध पर दोनों देशों की क्या योजना है?
दोनों देश हिंद-प्रशांत में साइबर अपराध और स्कैम सेंटर्स से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और निजी क्षेत्र के साथ समन्वय करेंगे। इसके अलावा, क्षेत्र के तीसरे देशों में साइबर रेजिलिएंस बढ़ाने के लिए तकनीकी सहायता को भी समन्वित किया जाएगा।
इस साइबर डायलॉग में AI की भूमिका क्या रही?
दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग साइबर सुरक्षा मजबूत करने और भरोसेमंद तकनीक पर आधारित सुरक्षित क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए करने पर सहमत हुए। साथ ही, दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों में AI की बढ़ती भूमिका पर खुफिया जानकारी साझा करने की भी प्रतिबद्धता जताई गई।
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