एपेक डिजिटल-AI बैठक 2026: छंगतू में सर्वसम्मति से पारित हुआ ऐतिहासिक वक्तव्य
सारांश
मुख्य बातें
एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) की डिजिटल एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर मंत्रिस्तरीय बैठक 23 जुलाई 2026 को चीन के छंगतू शहर में आयोजित हुई, जिसमें सदस्य अर्थव्यवस्थाओं ने सर्वसम्मति से 'छंगतू वक्तव्य' को अंगीकार किया। यह वक्तव्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डिजिटल और AI प्रौद्योगिकियों के साझा अनुप्रयोग को गति देने तथा भविष्य के सहयोग के लिए एक सुदृढ़ कार्य-ढाँचा स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
बैठक का उद्देश्य और विषय
इस वर्ष की बैठक 'डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकियाँ — एशिया-प्रशांत समुदाय को सशक्त बना रही हैं' विषय के अंतर्गत आयोजित की गई। विभिन्न सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के मंत्री और प्रतिनिधि एक मंच पर आए और तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित चर्चा की — विकास प्रक्रियाओं में डिजिटल व AI प्रौद्योगिकियों की भूमिका को सुदृढ़ करना, सार्वभौमिक एवं सार्थक डिजिटल कनेक्टिविटी को प्रोत्साहन देना, तथा डिजिटल समावेशन और डिजिटल कौशल संवर्धन को समर्थन प्रदान करना।
छंगतू वक्तव्य: मुख्य बिंदु
सर्वसम्मति से पारित छंगतू वक्तव्य में एपेक सदस्यों ने यह स्वीकार किया कि डिजिटल और AI प्रौद्योगिकियाँ क्षेत्रीय आर्थिक विकास की धुरी बन चुकी हैं। वक्तव्य में भविष्य के सहयोग के लिए एक सुस्पष्ट कार्य-ढाँचा तैयार किया गया है, जो सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आदान-प्रदान को संस्थागत रूप देगा। गौरतलब है कि यह वक्तव्य एपेक के इतिहास में डिजिटल एवं AI विषय पर पारित होने वाले सबसे व्यापक सामूहिक दस्तावेज़ों में से एक माना जा रहा है।
एपेक मंत्रिस्तरीय बैठक का महत्त्व
डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर यह मंत्रिस्तरीय बैठक एपेक ढाँचे के अंतर्गत आयोजित होने वाली प्रमुख बैठकों में से एक है। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डिजिटल एवं सूचना-संचार के क्षेत्र में नीतिगत संवाद और व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक अहम मंच है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर AI शासन और डिजिटल अंतर को पाटने की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।
आगे की राह
छंगतू वक्तव्य में निर्धारित कार्य-ढाँचे के तहत एपेक सदस्य अर्थव्यवस्थाएँ डिजिटल एवं AI क्षेत्र में ठोस सहयोग परियोजनाओं की पहचान करेंगी। डिजिटल कनेक्टिविटी और कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए यह ढाँचा क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने की दिशा में भी मार्गदर्शन करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस वक्तव्य का क्रियान्वयन इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश घरेलू नीतियों को इस साझा दृष्टिकोण के साथ किस हद तक संरेखित करते हैं।