क्या अमित साटम को मिली मुंबई भाजपा अध्यक्ष की कमान?

सारांश
Key Takeaways
- अमित साटम को मुंबई भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनकी नियुक्ति पर सकारात्मक विचार साझा किए।
- यह बदलाव भाजपा के लिए एक नई दिशा में संकेत करता है।
- साटम का राजनीतिक अनुभव पार्टी को मजबूत करने में मदद करेगा।
- आशीष सेलार के कार्यकाल को सराहा गया है।
मुंबई, 25 जून (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई भाजपा के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सोमवार को अमित साटम को सौंपी गई है। उन्होंने आशीष सेलार की जगह ली है। महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में उन्हें इस पद पर नियुक्त किया।
इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस वार्ता में अमित साटम की नियुक्ति के अलावा महाराष्ट्र की राजनीति पर भी अपने विचार साझा किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कई वर्षों से आशीष सेलार ने मुंबई के अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण चुनावों में भाजपा ने जीत हासिल की। मुंबई भाजपा के लिए यह एक नई शुरुआत है, जिसमें भाजपा ने यह साबित किया है कि वह मुंबई की सबसे बड़ी पार्टी है।
उन्होंने आगे कहा कि हमने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद अमित साटम को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया। सभी विधायकों ने मिलकर उनके नाम का चयन किया है, और आज इस नाम की घोषणा की गई है। अमित साटम विधानसभा में एक मुखर विधायक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने अपनी बेबाकी से लोगों के बीच एक अच्छी छवि बनाई है। वह मुंबई से तीन बार विधायक रह चुके हैं और बीएमसी में भी कार्य कर चुके हैं। उनके पास कार्यकर्ता से लेकर नेता तक का अनुभव है। मुझे यकीन है कि उनके नेतृत्व में भाजपा नई ऊंचाइयों को छूएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में अमित साटम की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। एक ठोस टीम के साथ वे जल्द ही आगे बढ़ेंगे। मैं मुंबई के सभी कार्यकर्ताओं की ओर से उन्हें बधाई देता हूं। हमें उन पर पूरा विश्वास है।
इसके अलावा, उन्होंने 'वोट चोरी' पर भी अपनी बात रखी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि हमारे महाराष्ट्र के नेता भी यह मानते हैं कि राहुल गांधी सही बोल रहे हैं। हमें यह समझना होगा कि झूठ की कोई दुकान नहीं होती है और झूठ का किला ढह जाता है। जब तक लोग यह नहीं समझेंगे कि उन्हें लोगों का विश्वास जीतने के लिए उनके बीच जाना होगा, तब तक उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।