23 अक्टूबर 2026
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बोलीं — एक परिवार को आत्मनिर्भर बनाना महाकुंभ से भी बड़ा पुण्य

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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बोलीं — एक परिवार को आत्मनिर्भर बनाना महाकुंभ से भी बड़ा पुण्य

सारांश

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कानपुर में 93वीं क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए एक परिवार को आत्मनिर्भर बनाने को महाकुंभ से बड़ा पुण्य बताया। 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकारों की इस प्रदर्शनी में उन्होंने कारीगरों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और विश्वविद्यालयों में 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' बनाने की अपील की।

मुख्य बातें

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 23 अक्टूबर 2026 को कानपुर के चुन्नीगंज कन्वेंशन सेंटर में 93वीं क्राफ्टरूट्स हस्तशिल्प प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
प्रदर्शनी में 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकार शामिल; उत्पादों की कीमत ₹50 से शुरू।
राज्यपाल ने कानपुर जिलाधिकारी को निर्देश दिया — सभी पारंपरिक शिल्पकारों की सूची बनाकर सरकारी योजनाओं, प्रशिक्षण और ऋण सुविधाओं से जोड़ें।
अनुभवी कारीगरों को विश्वविद्यालयों में 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' के रूप में जोड़ने की अपील।
क्राफ्टरूट्स पहल देशभर के 35,000 से अधिक कारीगरों से जुड़ी है — अनारबेन पटेल और लीना रावल के नेतृत्व में।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 23 अक्टूबर 2026 को कानपुर के चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 93वीं क्राफ्टरूट्स हस्तशिल्प प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि किसी एक परिवार को स्वावलंबी बनाना महाकुंभ में स्नान से भी बड़ा पुण्य है। उन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प को कारीगरों की आजीविका और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बताया। यह पाँच दिवसीय आयोजन ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।

प्रदर्शनी का स्वरूप और भागीदारी

इस प्रदर्शनी में देश के 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकार अपनी कलाकृतियों और पारंपरिक उत्पादों के साथ शामिल हुए हैं। प्रदर्शनी में फिरोजाबाद की कांच कला, छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क, मध्य प्रदेश का बाग प्रिंट और पश्चिम बंगाल की पट्टचित्र कला सहित देश की विविध हस्तशिल्प परंपराओं को प्रदर्शित किया गया है। आयोजन में ₹50 से शुरू होने वाले उत्पादों की उपलब्धता और पारंपरिक कलाओं के सजीव प्रदर्शन की व्यवस्था भी की गई है।

राज्यपाल ने विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया और शिल्पकारों से सीधा संवाद कर उनकी कला, निर्माण प्रक्रिया तथा पीढ़ियों से चली आ रही तकनीकों की जानकारी ली।

राज्यपाल के मुख्य संदेश

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि हस्तनिर्मित प्रत्येक उत्पाद के पीछे कारीगर का समय, परिश्रम, अनुभव और पीढ़ियों से अर्जित कौशल होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी हस्तनिर्मित वस्तु का मूल्य तय करते समय कच्चे माल की लागत के साथ-साथ उसे बनाने में लगे श्रम, अनुभव और विशेष कौशल को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि कई पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर हैं। यदि कारीगरों को सम्मानजनक आय और पर्याप्त बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो नई पीढ़ी भी इन कलाओं को अपनाने के लिए प्रेरित होगी।

जिला प्रशासन को निर्देश

राज्यपाल ने कानपुर के जिलाधिकारी और जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि जिले के सभी पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों की सूची तैयार की जाए। उनकी जरूरतों के अनुसार उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, प्रशिक्षण सुविधाओं तथा पात्रता के आधार पर ऋण जैसी सहायता से जोड़ने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय कलाकार अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाना चाहते हैं, तो जिला प्रशासन उन्हें उपयुक्त स्थान और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराए। उद्योगपतियों, अधिकारियों, विश्वविद्यालयों और आम नागरिकों को भी स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों की खरीद को प्रोत्साहित करना चाहिए।

विश्वविद्यालयों से अपील — 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस'

आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से अनुभवी शिल्पकारों को 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' के रूप में जोड़ने का आह्वान किया। उनका तर्क था कि अनुभवी कारीगरों ने किसी कला में दक्षता हासिल करने में अपने जीवन के कई दशक लगाए होते हैं और उनका व्यावहारिक ज्ञान विद्यार्थियों के लिए अमूल्य है।

उन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से यह भी कहा कि वे अपने गोद लिए गांवों और आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आवश्यक सामग्री स्थानीय शिल्पकारों से खरीदने की संभावनाओं पर विचार करें, जिससे बाल कल्याण गतिविधियों को सहयोग मिलने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को भी बाजार उपलब्ध होगा।

क्राफ्टरूट्स का व्यापक दायरा

क्राफ्टरूट्स एवं ग्रामश्री की संस्थापक अनारबेन पटेल ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य देश की सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने के साथ शिल्पकारों, विशेषकर महिला कारीगरों, को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। संस्था से जुड़ी लीना रावल ने बताया कि यह पहल देशभर के 35 हजार से अधिक कारीगरों से जुड़ी है और उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।

राज्यपाल ने गुजरात में आए भूकंप के बाद 12 जिलों में प्रभावित कारीगरों की सहायता और पुनर्वास के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस दौरान अनारबेन पटेल ने प्रभावित कारीगरों को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए मार्गदर्शन किया था। पारंपरिक कला और स्थानीय संसाधनों पर आधारित छोटे उद्यम भविष्य में अनेक परिवारों की आजीविका का मजबूत आधार बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन को दिए गए निर्देश कागज़ों से आगे जाएंगे। उत्तर प्रदेश में पारंपरिक हस्तशिल्पियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के वादे नए नहीं हैं — बुनकर कल्याण से लेकर 'एक जिला-एक उत्पाद' तक, लागू करने की खाई हमेशा बड़ी रही है। 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' का विचार सराहनीय है, परंतु विश्वविद्यालयों की नौकरशाही और कारीगरों की डिजिटल दूरी इसके क्रियान्वयन की सबसे बड़ी बाधाएं हैं। 35,000 कारीगरों तक पहुँचने का दावा तब सार्थक होगा जब उनकी औसत मासिक आय में मापनीय वृद्धि सार्वजनिक रूप से सामने आए।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

93वीं क्राफ्टरूट्स हस्तशिल्प प्रदर्शनी कहाँ और कब आयोजित हुई?
यह पाँच दिवसीय प्रदर्शनी 23 अक्टूबर 2026 को कानपुर के चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स द्वारा आयोजित की गई। इसमें 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकार भाग ले रहे हैं।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कारीगरों के लिए क्या निर्देश दिए?
राज्यपाल ने कानपुर के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि जिले के सभी पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों की सूची तैयार की जाए और उन्हें केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं, प्रशिक्षण सुविधाओं तथा ऋण जैसी सहायता से जोड़ा जाए। साथ ही स्थानीय कलाकारों को प्रदर्शनी के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने को भी कहा।
'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' से क्राफ्टरूट्स की क्या अपेक्षा है?
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से अपील की कि अनुभवी शिल्पकारों को 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' के रूप में जोड़ा जाए। इससे विद्यार्थियों को पारंपरिक कलाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा और वे कौशल के आधार पर स्वरोजगार शुरू कर सकेंगे।
क्राफ्टरूट्स पहल कितने कारीगरों से जुड़ी है?
संस्था से जुड़ी लीना रावल के अनुसार यह पहल देशभर के 35,000 से अधिक कारीगरों से जुड़ी है। इसका उद्देश्य उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना और पारंपरिक कलाओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना है।
प्रदर्शनी में किन राज्यों की हस्तकलाएं प्रदर्शित की गई हैं?
22 राज्यों की हस्तकलाएं इस प्रदर्शनी में शामिल हैं। इनमें फिरोजाबाद की कांच कला, छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क, मध्य प्रदेश का बाग प्रिंट और पश्चिम बंगाल की पट्टचित्र कला विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
राष्ट्र प्रेस
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