पेट्रोल-डीजल संकट: आंध्र प्रदेश CM चंद्रबाबू नायडू ने कलेक्टरों से मांगी तत्काल रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- 421 पेट्रोल पंप बंद: आंध्र प्रदेश के कुल 4,510 ईंधन आउटलेट्स में से 421 पंप बंद हो गए हैं।
- पैनिक बायिंग का असर: शनिवार को पेट्रोल की बिक्री सामान्य से 34%25 बढ़कर 8,489 किलोलीटर और डीजल 17%25 बढ़कर 10,556 किलोलीटर रही।
- CM का सख्त आदेश: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कलेक्टरों को आज शाम तक तत्काल कार्य योजना और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
- आपात टेलीकॉन्फ्रेंस: CM ने मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक की।
- कालाबाजारी पर चेतावनी: नागरिक आपूर्ति मंत्री नादेंडला मनोहर ने कालाबाजारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
- वास्तविक कमी नहीं: सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य में पेट्रोल-डीजल की कोई वास्तविक कमी नहीं है, समस्या केवल वितरण और पैनिक बायिंग की है।
अमरावती, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की किल्लत के बीच मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार, 26 अप्रैल को कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिला कलेक्टरों को तत्काल कार्य योजना लागू करने और स्थिति पर आज शाम तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। राज्यभर में 421 पेट्रोल पंप बंद होने और लंबी कतारों की खबरों के बाद मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात टेलीकॉन्फ्रेंस की।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे बिगड़े हालात?
राज्य में कुल 4,510 ईंधन आउटलेट्स में से 421 पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, सामान्य दिनों में प्रतिदिन औसतन 6,330 किलोलीटर पेट्रोल और 9,048 किलोलीटर डीजल की बिक्री होती है।
लेकिन शनिवार, 25 अप्रैल को घबराहट में की गई खरीदारी (Panic Buying) के चलते पेट्रोल की बिक्री उछलकर 8,489 किलोलीटर और डीजल की बिक्री 10,556 किलोलीटर तक पहुंच गई — जो सामान्य से क्रमशः लगभग 34%25 और 17%25 अधिक है।
उसी दिन डीलरों को 10,345 किलोलीटर पेट्रोल और 14,156 किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की गई, फिर भी भारी मांग के कारण कई पंपों पर स्टॉक तेजी से खत्म हो गया।
टेलीकॉन्फ्रेंस में क्या हुआ?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तत्काल टेलीकॉन्फ्रेंस कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि समस्या के समाधान के लिए ठोस कार्य योजना बनाई जाए और विभिन्न विभागों द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी तुरंत दी जाए।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि जल क्षेत्र (Water Sector) द्वारा ड्रमों में थोक में ईंधन खरीदे जाने से आपूर्ति श्रृंखला पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं तक ईंधन पहुंचने में बाधा आ रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया और चेतावनी
नागरिक आपूर्ति मंत्री नादेंडला मनोहर ने स्पष्ट किया कि राज्य में पेट्रोल और डीजल की वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में अस्थायी व्यवधान और पैनिक बायिंग के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि कालाबाजारी में लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह स्थिति उस समय सामने आई है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव के बीच देश के कई हिस्सों में नागरिकों में अनिश्चितता का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौरान पैनिक बायिंग की प्रवृत्ति स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है, जैसा कि कोविड-19 महामारी के दौरान आवश्यक वस्तुओं के मामले में देखा गया था।
आम जनता पर असर और आगे की राह
पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने से आम नागरिकों, किसानों, ट्रांसपोर्टरों और छोटे व्यापारियों को भारी परेशानी हो रही है। आंध्र प्रदेश एक कृषि-प्रधान राज्य है और डीजल की कमी का सीधा असर सिंचाई पंपों, ट्रैक्टरों और माल ढुलाई पर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि पैनिक बायिंग की यह स्थिति केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं है — देश के अन्य सीमावर्ती और तटीय राज्यों में भी इसी तरह की रिपोर्टें सामने आई हैं। सरकार को अब न केवल आपूर्ति बहाल करनी होगी, बल्कि जनता में भरोसा कायम करने के लिए पारदर्शी संचार भी सुनिश्चित करना होगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय से आज शाम तक रिपोर्ट मिलने के बाद अगले कदमों की घोषणा संभावित है। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि आपूर्ति सामान्य करने के लिए केंद्र सरकार और तेल कंपनियों से भी समन्वय किया जा रहा है।