19 जुलाई 2026
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क्या एंजल चकमा के हत्यारों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए? : पूर्व सांसद तरुण विजय

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क्या एंजल चकमा के हत्यारों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए? : पूर्व सांसद तरुण विजय

सारांश

त्रिपुरा में एंजेल चकमा की हत्या ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। पूर्व सांसद तरुण विजय ने हत्यारों को कड़ी सजा देने की मांग की है, जिससे भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। क्या यह घटना एक मिसाल बनेगी?

मुख्य बातें

एंजेल चकमा की हत्या ने पूरे देश में हलचल मचाई है।
तरुण विजय ने मांग की है कि हत्यारों को कड़ी सजा मिले।
इस घटना ने नस्लीय भेदभाव के मुद्दे को उजागर किया है।
उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

अगरतला, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय ने शुक्रवार को त्रिपुरा के एंजेल चकमा की हत्या के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को कड़ी सजा देने की अपील की।

देहरादून में निर्मम हमले का शिकार हुए चकमा 26 दिसंबर को अपनी चोटों के कारण निधन हो गए।

बीजेपी नेता विजय ने उनाकोटी जिले के माछमारा गांव में एंजेल चकमा के परिवार से मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

24 वर्षीय एमबीए फाइनल ईयर के छात्र एंजेल चकमा पर कथित तौर पर 9 दिसंबर को उत्तराखंड के देहरादून में एक भीड़ ने हमला किया था। वह अस्पताल में 18 दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करते रहे, लेकिन 26 दिसंबर को उनका निधन हो गया।

इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए, पूर्व सांसद ने कहा कि दोषियों को उनके कायरता पूर्ण कृत्य के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे एक मिसाल बनेगी और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका जा सकेगा।

विजय ने कहा कि वह गुरुवार को त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू और मुख्यमंत्री माणिक साहा से मिले थे और बताया कि मुख्यमंत्री ने इस मामले को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कई बार बातचीत की है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार को आर्थिक स्थिरता देने के लिए एंजेल चकमा के छोटे भाई माइकल चकमा को त्रिपुरा सरकार में नौकरी दी जानी चाहिए।

विजय ने कहा, "एंजेल चकमा परिवार की उम्मीद था। उसके छोटे भाई को रोजगार देना बहुत जरूरी हो गया है और इस दिशा में ईमानदारी से प्रयास किए जाएंगे।" बीजेपी नेता ने आगे नस्लीय दुर्व्यवहार और भेदभाव के मामलों से निपटने के लिए उत्तराखंड पुलिस में एक विशेष पूर्वोत्तर सेल स्थापित करने का प्रस्ताव दिया।

विजय ने कहा कि परिवार से मिलने का उनका एकमात्र उद्देश्य उनके दर्द को साझा करना और उत्तराखंड के लोगों की ओर से एकजुटता व्यक्त करना था।

इस घटना के बाद उत्तराखंड में लगभग हर दिन विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

चकमा आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एंजेल चकमा पर कथित तौर पर बदमाशों के एक समूह ने हमला किया था, जिन्होंने उन पर नस्लीय गालियां दीं। वह एक सीमा सुरक्षा बल के जवान के बेटे थे।

बीजेपी सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी के नेता राजेश्वर देबबर्मा ने कहा कि पार्टी ने दोषियों के लिए कड़ी सजा और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को लागू करने की मांग की है।

टिपरा मोथा पार्टी के प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने उत्तराखंड सरकार और पुलिस की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि अपराध के नस्लीय स्वरूप को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। प्रद्योत देबबर्मा ने एक वीडियो संदेश में कहा, "हमलावरों ने एंजेल को 'चिंकी', 'चाइनीज' और 'मोमो' कहकर बुलाया और बेरहमी से उस पर हमला किया, जबकि उसके पिता एक बीएसएफ जवान हैं। इस दौरान वह सीमाओं की रक्षा कर रहे थे और देश की सेवा कर रहे थे।"

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एंजेल चकमा की हत्या कब हुई?
एंजेल चकमा की हत्या 9 दिसंबर को हुई, जबकि उनकी मृत्यु 26 दिसंबर को हुई।
तरुण विजय ने क्या मांग की है?
तरुण विजय ने एंजेल चकमा के हत्यारों को कड़ी सजा देने की मांग की है।
क्या इस घटना के बाद कोई प्रदर्शन हुए हैं?
हाँ, इस घटना के बाद उत्तराखंड में लगभग हर दिन विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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