अन्नपूर्णा योजना की चौथी किस्त जारी: 1.5 करोड़ बंगाल महिलाओं को ₹3,000 सीधे खाते में
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर 17 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल की करीब 1.5 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में अन्नपूर्णा योजना की चौथी किस्त के रूप में ₹3,000 की वित्तीय सहायता डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण) के ज़रिए भेजी गई। प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में भाग लिया और योजना से लाभान्वित हर महिला को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
मोदी का संबोधन: आत्मविश्वास और आर्थिक स्वायत्तता
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा, 'घर में हमारी माताओं-बहनों के कंधों पर बहुत सारी जिम्मेदारियाँ होती हैं। अनेक छोटे-बड़े फैसलों के बीच, एक महिला हर तरीके से परिवार का ख्याल रखती है और जब उनके पास जरूरी खर्चों की चिंता कम होती है, तो उनका आत्मविश्वास और बढ़ जाता है। अन्नपूर्णा योजना बंगाल की महिलाओं के आत्मविश्वास को मजबूती देने का ऐसा ही महत्वपूर्ण प्रयास है।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बंगाल की बहनों के बैंक खातों में हर महीने एक निश्चित राशि पहुँचेगी, जिसके लिए उन्हें किसी के सामने हाथ फैलाने की ज़रूरत नहीं है। मोदी ने इसे महिलाओं के लिए 'बहुत बड़ा संबल' बताया।
योजना का स्वरूप और पात्रता
पश्चिम बंगाल सरकार की अन्नपूर्णा योजना के तहत 25 से 60 वर्ष की वे महिलाएँ पात्र हैं जो पश्चिम बंगाल की स्थायी निवासी हैं। उन्हें प्रत्येक माह सीधे उनके बैंक खाते में ₹3,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि योजना में कोई बिचौलिया नहीं है और कोई 'कट मनी' नहीं है — राशि सीधे लाभार्थी तक पहुँचती है। उन्होंने कहा, 'सरकार बनने के कुछ ही दिनों के भीतर अन्नपूर्णा योजना पर काम शुरू हो गया था।'
महिला कल्याण की व्यापक नीति
मोदी ने इस अवसर पर केंद्र सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं की एक विस्तृत शृंखला का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि माताओं, बहनों और बेटियों के जीवन चक्र से जुड़ी हर समस्या का समाधान करना भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की प्राथमिकता रही है।
उन्होंने मातृ वंदना योजना (गर्भावस्था के दौरान पोषण सहायता), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, सैनिक स्कूलों में बेटियों के प्रवेश और मुद्रा योजना (बिना ब्याज के उद्यम ऋण) का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने स्कूलों में करोड़ों शौचालयों के निर्माण का भी ज़िक्र किया, ताकि बेटियाँ शिक्षा बीच में न छोड़ें।
राशि का व्यावहारिक महत्व
प्रधानमंत्री ने बताया कि ₹3,000 की यह मासिक सहायता अलग-अलग परिवारों के लिए अलग-अलग मायने रखती है — किसी माँ के लिए बच्चे की पढ़ाई का खर्च, किसी बहन के लिए दवाई या घर की कोई ज़रूरी वस्तु। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि एक भी पात्र महिला इस योजना के लाभ से वंचित न रहे।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में महिला सशक्तिकरण योजनाओं पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ है। गौरतलब है कि योजना की चौथी किस्त का जारी होना यह भी दर्शाता है कि यह केवल एकमुश्त राहत नहीं, बल्कि निरंतर मासिक हस्तांतरण की प्रतिबद्धता है।
आगे की राह
सरकार के अनुसार, योजना का विस्तार जारी है और शेष पात्र महिलाओं को जल्द से जल्द जोड़ने के लिए तेज़ी से काम हो रहा है। डीबीटी के माध्यम से वितरण की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम बंगाल में महिला वित्तीय समावेश की एक बड़ी मिसाल बन सकता है।