क्या अपर्णा यादव बीएमसी चुनाव में उत्तर भारतीय महायुति के पक्ष में वोट देने का समर्थन कर रही हैं?
सारांश
Key Takeaways
- बीएमसी चुनाव में उत्तर भारतीय महायुति का समर्थन करना महत्वपूर्ण है।
- राज ठाकरे के बयानों पर अपर्णा यादव की कड़ी प्रतिक्रिया।
- महिलाओं की भागीदारी चुनावी प्रक्रिया में एक सकारात्मक संकेत है।
- महायुति का वादा विकास के मुद्दों पर आधारित है।
- बीएमसी चुनाव जीतने के बाद जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता होगी।
मुंबई, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बीएमसी चुनाव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने राज ठाकरे को निशाने पर लेते हुए कहा कि उत्तर भारतीयों के बारे में जो बातें वे करते हैं, उन्हें नहीं कहनी चाहिए। चुनाव में भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक है। बीएमसी चुनाव में उत्तर भारतीय एक करारा जवाब देंगे और महायुति के पक्ष में वोट करेंगे।
मुंबई में राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान अपर्णा यादव ने कहा कि मैं यहाँ प्रचार के लिए आई थी और मैंने बहुत सकारात्मक माहौल देखा। खासकर महिलाओं की भागीदारी पर मैंने ध्यान दिया। हर रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं। महायुति के प्रति उनका समर्थन बहुत मजबूत है। मुंबई के मेयर उम्मीदवार का निर्णय हम मिलकर लेंगे, और मुझे विश्वास है कि जो भी नेतृत्व होगा, मुंबई को ऐसा मेयर मिलेगा जो विकास की राजनीति करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि बीएमसी चुनाव में महायुति की जीत सुनिश्चित है। हमारे मुद्दे विकास के हैं और महायुति का वादा विकास की नींव पर है। मूलभूत सुविधाओं को आम लोगों तक पहुँचाना हमारा लक्ष्य है। बीएमसी चुनाव जीतने के बाद हर कॉर्पोरेटर जनता की समस्याओं का समाधान करेगा।
राज ठाकरे पर टिप्पणी करते हुए अपर्णा यादव ने कहा कि उन्हें उत्तर भारतीयों के प्रति जो जहरीले बयान देते हैं, उन पर नियंत्रण रखना चाहिए। यह चिंता का विषय है। असली बालासाहेब की पार्टी शिंदे की शिवसेना है। उत्तर भारतीय बीएमसी चुनाव में भी मुंहतोड़ जवाब देंगे।
केजीएमयू विवाद पर अपर्णा यादव ने कहा कि मेरा मानना है कि महिला आयोग और उत्तर प्रदेश सरकार ने बहुत सख्त कार्रवाई की है। मैं मुख्यमंत्री योगी को दिल से धन्यवाद देती हूं, क्योंकि पुलिस के माध्यम से महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 से जब भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता संभाली और हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री ने पद संभाला, तब से उन्होंने एक ही सिद्धांत का पालन किया है, 'सबका साथ, सबका विकास'। आप देखेंगे कि देश में जो अंदरूनी झगड़े चल रहे थे, वे काफी कम हो गए हैं।