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क्या असम में सेना और नागरिक बलों ने गणतंत्र दिवस के लिए काउंटर-ड्रोन अभ्यास किया?

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क्या असम में सेना और नागरिक बलों ने गणतंत्र दिवस के लिए काउंटर-ड्रोन अभ्यास किया?

सारांश

तिनसुकिया में आयोजित काउंटर-ड्रोन अभ्यास से असम में सुरक्षा तैयारियों को नई दिशा मिली है। यह अभ्यास गणतंत्र दिवस 2026 के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा। जानिए कैसे यह अभ्यास ड्रोन खतरों से निपटने में सहायक है।

मुख्य बातें

ड्रोन खतरों का मुकाबला करने के लिए सुरक्षा बलों का समन्वय महत्वपूर्ण है।
सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए नियमित अभ्यास जरूरी हैं।
सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से सुरक्षा में वृद्धि होती है।

तिनसुकिया, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गणतंत्र दिवस 2026 की तैयारियों के तहत भारतीय सेना ने एक महत्वपूर्ण संयुक्त काउंटर-ड्रोन कैप्सूल का आयोजन किया। यह अभ्यास उभरते ड्रोन आधारित खतरों से निपटने के लिए सैन्य और नागरिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और तैयारी पर केंद्रित था।

यह कैप्सूल स्पीयर कॉर्प्स के नेतृत्व में रेड शील्ड गनर्स द्वारा आयोजित किया गया। इसमें असम पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य ड्रोन के दुरुपयोग से होने वाली चुनौतियों के खिलाफ सभी एजेंसियों में जागरूकता बढ़ाना, प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत करना और आपसी तालमेल को बेहतर बनाना था।

ट्रेनिंग में व्यावहारिक प्रदर्शन और संरचित चर्चा शामिल थी। प्रतिभागियों को ड्रोन से जुड़े खतरों की पहचान, उनसे निपटने के तरीके और आपात स्थिति में सामूहिक प्रतिक्रिया के प्रोटोकॉल की समझ दी गई। इस अभ्यास से सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समझ और समन्वय विकसित हुआ, जिससे राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

गणतंत्र दिवस जैसे बड़े कार्यक्रमों से पहले ऐसे संयुक्त अभ्यास बहुत जरूरी हो गए हैं, क्योंकि ड्रोन का इस्तेमाल अब आतंकवाद, जासूसी और अन्य खतरों के लिए किया जा रहा है। इस कैप्सूल ने सैन्य और नागरिक बलों के बीच तालमेल के महत्व को एक बार फिर साबित किया। अभ्यास से परिचालन तत्परता बढ़ी है और सभी एजेंसियां अब ड्रोन आधारित खतरों से निपटने के लिए ज्यादा तैयार हैं।

यह प्रयास पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों के ऐसे संयुक्त प्रयास गणतंत्र दिवस और अन्य राष्ट्रीय आयोजनों को पूरी तरह सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। तिनसुकिया में हुए इस अभ्यास से क्षेत्रीय स्तर पर सुरक्षा तैयारियों को नई ताकत मिली है और भविष्य में भी ऐसे कैप्सूल नियमित रूप से आयोजित किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नागरिकों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काउंटर-ड्रोन अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य ड्रोन के दुरुपयोग से होने वाली चुनौतियों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना और प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना था।
इस अभ्यास में कौन-कौन सी एजेंसियों ने भाग लिया?
इस अभ्यास में असम पुलिस, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और आईओसीएल के कर्मचारी शामिल थे।
क्यों ऐसे अभ्यास जरूरी हैं?
गणतंत्र दिवस जैसे बड़े आयोजनों से पहले ऐसे अभ्यास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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