क्या एचपीवी वैक्सीन से पीरियड्स साइकिल में परिवर्तन हो सकता है? जानें सच्चाई
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) एक ऐसा वायरस है जो भविष्य में सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है, और इसी से सुरक्षा के लिए एचपीवी वैक्सीन दी जाती है। हालांकि, कई लोगों को यह चिंता होती है कि क्या एचपीवी वैक्सीन लेने से उनकी पीरियड्स साइकिल प्रभावित हो सकती है, लेकिन वास्तविकता इससे बिलकुल भिन्न है।
वैज्ञानिक अध्ययनों ने स्पष्ट किया है कि एचपीवी वैक्सीन का पीरियड्स साइकिल पर कोई स्थायी या हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड्स के समय में भी एचपीवी वैक्सीन लेना सुरक्षित है। पीरियड्स होना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है और इसका वैक्सीन के प्रभाव से कोई सीधा संबंध नहीं होता। कुछ मामलों में वैक्सीन के बाद हल्की प्रतिक्रिया हो सकती है, जैसे कि इंजेक्शन स्थल पर दर्द, हल्का बुखार, या थकान, लेकिन यह आमतौर पर एक से दो दिन के अंदर अपने आप ठीक हो जाता है। इसका पीरियड्स साइकिल से कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है।
कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि किसी लड़की या महिला के पीरियड्स वैक्सीनेशन के समय के आस-पास थोड़े पहले या देर से आएं। लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि यह विभिन्न कारणों से हो सकता है, जैसे तनाव, नींद की कमी, आहार में बदलाव, पढ़ाई या काम का दबाव, हार्मोनल परिवर्तन, या यात्रा आदि। इसलिए यदि किसी को वैक्सीन लेने के बाद पीरियड्स में हल्का बदलाव महसूस हो, तो जरूरी नहीं कि इसका कारण वैक्सीन हो। अधिकांश मामलों में, साइकिल अपने आप सामान्य हो जाती है।
वास्तव में, एचपीवी वैक्सीन का मुख्य उद्देश्य शरीर को उस वायरस से सुरक्षा प्रदान करना है जो सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। यही कारण है कि विश्वभर में स्वास्थ्य संगठनों और डॉक्टरों द्वारा लड़कियों और युवतियों को यह वैक्सीन लेने की सलाह दी जाती है। कई देशों में यह वैक्सीन नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा भी बन चुकी है, क्योंकि यह कैंसर की रोकथाम में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है।