असम में वन विभाग के 2,137 कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल लॉन्च, रैंडमाइजेशन से मिलेगी पारदर्शिता
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने 23 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी के दिसपुर स्थित लोक सेवा भवन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के 2,137 कर्मचारियों के लिए एक ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल की शुरुआत की। इस पोर्टल के जरिए तबादले अब रैंडमाइजेशन सिस्टम से होंगे, जिससे स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सकेगी। पोर्टल लॉन्च होते ही संबंधित कर्मचारियों के तबादला आदेश भी तत्काल जारी कर दिए गए।
पोर्टल में किन कर्मचारियों को किया गया शामिल
पहले चरण में डिप्टी रेंजर, फॉरेस्टर, फॉरेस्ट गार्ड, फिक्स्ड-पे कर्मचारी और गेम वॉचर — वे सभी जिन्होंने अपने मौजूदा कार्यस्थल पर तीन वर्ष पूरे कर लिए हैं — इस पोर्टल के दायरे में आएंगे। यह व्यवस्था वन विभाग के भीतर लंबे समय से चली आ रही मनमाने तबादलों की शिकायतों को दूर करने के उद्देश्य से लागू की गई है।
गौरतलब है कि सरकार ने कुछ श्रेणियों को इस प्रक्रिया से छूट भी प्रदान की है — इनमें 58 वर्ष या उससे अधिक आयु के कर्मचारी, गंभीर बीमारी से पीड़ित निकट परिजनों वाले कर्मचारी, गर्भावस्था संबंधी मामलों के कर्मचारी, जो अभी तीन वर्ष पूरे नहीं कर पाए हैं, विशेष वन्यजीव विशेषज्ञ और निलंबित अधिकारी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री का संबोधन और सरकार की मंशा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया की तरह ही स्थानांतरण प्रक्रिया में भी पूरी पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 'स्वागत सतिर्थ' पोर्टल के माध्यम से हजारों कर्मचारियों की पारस्परिक तबादला माँगों का समाधान किया जा चुका है। सरमा ने अन्य सरकारी विभागों से भी इस तरह की तकनीक-आधारित व्यवस्थाएँ अपनाने का आग्रह किया।
वन भूमि अतिक्रमण पर कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को वन भूमि पर अतिक्रमण रोकने के लिए प्रयास तेज करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट इमेजरी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से प्रारंभिक चरण में ही अतिक्रमण की पहचान की जानी चाहिए, न कि स्थिति बिगड़ने पर पुलिस के पास जाना चाहिए।
सरमा ने बताया कि हाल ही में 600 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है और उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ऐसी जमीनों पर तत्काल वनीकरण अभियान चलाने के निर्देश दिए।
राजस्व और खनन पर जताई चिंता
वन विभाग से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी और राजस्व के मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से यह राशि लगभग ₹700 करोड़ के आसपास स्थिर बनी हुई है। सरमा ने पात्र पत्थर खदानों और रेत खनन स्थलों को वैधानिक दर्जा देने की वकालत की, ताकि अवैध खनन पर अंकुश लगे, सरकारी राजस्व बढ़े और रोजगार के अवसर भी सृजित हों।
उन्होंने यह भी बताया कि असम में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण पर लगभग ₹1 लाख करोड़ खर्च होने का प्रस्ताव है, जिसके लिए कानूनी रूप से स्वीकृत निर्माण सामग्री के स्रोतों की आवश्यकता होगी। इस अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री जयंत मल्लबरुआह, सांसद देबाशीष शर्मा तथा कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी उपस्थित रहे।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब असम सरकार डिजिटल शासन को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी इस प्रणाली का विस्तार किया जा सकता है।