7 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम राइफल्स ने त्रिपुरा के खोवाई में ₹1.74 करोड़ का 340 किलो गांजा जब्त किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम राइफल्स ने त्रिपुरा के खोवाई में ₹1.74 करोड़ का 340 किलो गांजा जब्त किया

सारांश

असम राइफल्स और सीमा शुल्क अधिकारियों ने त्रिपुरा के खोवाई जिले में खुफिया जानकारी के आधार पर एक कार से ₹1.74 करोड़ का 340 किलो गांजा जब्त किया। वाहन चालक फरार है। यह बरामदगी पूर्वोत्तर से बिहार-यूपी तक फैले तस्करी नेटवर्क पर प्रहार की बड़ी कड़ी है।

मुख्य बातें

असम राइफल्स ने 7 अक्टूबर 2026 को त्रिपुरा के खोवाई जिले में 340 किलोग्राम सूखा गांजा जब्त किया।
बरामद गांजे की अनुमानित बाज़ार कीमत लगभग ₹1.74 करोड़ बताई गई है।
संयुक्त अभियान सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया गया; वाहन चालक फरार।
जब्त सामग्री और वाहन आगे की जाँच के लिए सीमा शुल्क विभाग को सौंपे गए, अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं।
त्रिपुरा में उत्पादित गांजा मुख्यतः बिहार और उत्तर प्रदेश में तस्करी कर भेजा जाता है।
NDPS अधिनियम, 1985 के तहत उल्लंघन पर 20 वर्ष तक की कैद का प्रावधान।

असम राइफल्स ने 7 अक्टूबर 2026 को त्रिपुरा के खोवाई जिले में एक संयुक्त अभियान के दौरान 340 किलोग्राम सूखा गांजा जब्त किया, जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत लगभग ₹1.74 करोड़ बताई जा रही है। यह कार्रवाई सीमा शुल्क अधिकारियों के समन्वय से खुफिया जानकारी और निरंतर निगरानी के आधार पर की गई।

अभियान का विवरण

रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, संयुक्त दल ने मंगलवार शाम खोवाई जिले में एक वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली, जिसमें भारी मात्रा में सूखा गांजा बरामद हुआ। हालाँकि, वाहन चालक मौके से फरार होने में सफल रहा और इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। बरामद प्रतिबंधित सामग्री तथा जब्त वाहन को आगे की जाँच और कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंप दिया गया है।

तस्करी का नेटवर्क और पूर्वोत्तर का संदर्भ

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि त्रिपुरा राज्य पुलिस, असम राइफल्स, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (TSR) और अन्य सुरक्षा बल मिलकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में, विशेष रूप से बांग्लादेश से सटे सेपाहिजाला जिले में, अवैध गांजे की खेती को नष्ट करने के संयुक्त अभियान चलाते रहते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध अभियान पहले से तेज़ है।

अधिकारी के अनुसार, त्रिपुरा में उत्पादित सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर खपाया नहीं जाता, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में तस्करी कर भेजा जाता है, जहाँ इसकी कीमत अधिक मिलती है। ये खेपें प्रायः ट्रकों, छोटे वाहनों और यहाँ तक कि यात्री ट्रेनों के ज़रिए परिवहन की जाती हैं।

स्थानीय आजीविका और वन भूमि पर अतिक्रमण

गौरतलब है कि महिलाओं सहित कई स्थानीय निवासियों ने दावा किया है कि वे आजीविका के अभाव में पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में गांजे की खेती करते हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जाँच में यह भी सामने आया है कि वन भूमि और अन्य सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर अवैध रूप से यह खेती की जा रही है।

कानूनी प्रावधान

मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा नशीले पदार्थों की खेती, कब्जा, बिक्री, खरीद या सेवन पूर्णतः अवैध है। उल्लंघन पर भारी जुर्माने के साथ 20 वर्ष तक के कारावास की सज़ा का प्रावधान है।

आगे की कार्रवाई

अधिकारियों के अनुसार, यह बरामदगी पूर्वोत्तर में सक्रिय नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को बाधित करने की दिशा में सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों को रेखांकित करती है। फरार वाहन चालक की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अभियान की सफलता अधूरी है। बांग्लादेश सीमा से सटे सेपाहिजाला जैसे जिलों में वन भूमि पर अवैध खेती का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि विकास और आजीविका की विफलता का भी संकेत है। जब तक वैकल्पिक आजीविका के बिना केवल छापेमारी होती रहेगी, यह चक्र टूटने की संभावना कम है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम राइफल्स ने त्रिपुरा में कितना गांजा जब्त किया?
असम राइफल्स ने 7 अक्टूबर 2026 को त्रिपुरा के खोवाई जिले में 340 किलोग्राम सूखा गांजा जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹1.74 करोड़ बताई गई है। यह कार्रवाई सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ संयुक्त अभियान में हुई।
क्या इस मामले में कोई गिरफ्तारी हुई है?
नहीं, अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। तलाशी के दौरान वाहन चालक मौके से फरार हो गया। बरामद सामग्री और वाहन सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं और जाँच जारी है।
त्रिपुरा में उत्पादित गांजा कहाँ भेजा जाता है?
अधिकारियों के अनुसार, त्रिपुरा में उत्पादित सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर नहीं खपाया जाता। इसे मुख्यतः बिहार और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में तस्करी कर भेजा जाता है, जहाँ इसकी कीमत अधिक मिलती है।
NDPS अधिनियम के तहत गांजे की तस्करी पर क्या सज़ा है?
मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत नशीले पदार्थों की खेती, कब्जा, बिक्री या खरीद पूरी तरह गैरकानूनी है। उल्लंघन पर भारी जुर्माने के साथ 20 वर्ष तक के कारावास की सज़ा का प्रावधान है।
त्रिपुरा में अवैध गांजे की खेती कहाँ होती है?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राज्य के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में वन भूमि और सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण कर अवैध गांजे की खेती की जाती है। बांग्लादेश से सटे सेपाहिजाला जिले में यह समस्या विशेष रूप से गंभीर बताई जाती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले