10 अक्टूबर 2026
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असम राइफल्स की त्रिपुरा-मिजोरम में बड़ी कार्रवाई, ₹11.30 करोड़ का गांजा और मेथामफेटामाइन जब्त

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असम राइफल्स की त्रिपुरा-मिजोरम में बड़ी कार्रवाई, ₹11.30 करोड़ का गांजा और मेथामफेटामाइन जब्त

सारांश

असम राइफल्स ने एक ही दिन में त्रिपुरा और मिजोरम में दो अलग ऑपरेशनों में ₹11.30 करोड़ से ज़्यादा की नशीली सामग्री बरामद की — 501 किलो गांजा और 11 किलो मेथामफेटामाइन। 18 किलोमीटर के पीछे के बाद भी चालक फरार। उत्तर-पूर्व में ड्रग्स नेटवर्क के विरुद्ध अभियान जारी।

मुख्य बातें

असम राइफल्स ने 10 अक्टूबर 2026 को त्रिपुरा और मिजोरम में ₹11.30 करोड़ से अधिक की नशीली सामग्री बरामद की।
खोवाई जिले (त्रिपुरा) में कस्टम विभाग के साथ संयुक्त अभियान में 501 किलोग्राम गांजा (~₹2.50 करोड़) जब्त।
चंपाई जिले (मिजोरम) में 11 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट (~₹8.80 करोड़) बरामद।
संदिग्ध वाहन का 18 किलोमीटर तक पीछा; बैकुंठपुर गांव में ऑपरेशन समाप्त, लेकिन चालक फरार।
त्रिपुरा का गांजा बिहार और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में तस्करी के लिए उपयोग होता है।
यह ऑपरेशन 9 अक्टूबर को हुई एक अन्य कार्रवाई के अगले दिन किया गया।

असम राइफल्स ने 10 अक्टूबर 2026 को त्रिपुरा और मिजोरम में अलग-अलग नशा-विरोधी अभियानों के तहत कुल ₹11.30 करोड़ से अधिक मूल्य की नशीली सामग्री बरामद की। स्पीयर कॉर्प्स के अंतर्गत संचालित इन ऑपरेशनों में 501 किलोग्राम गांजा और 11 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट जब्त किए गए, जो उत्तर-पूर्व में जारी ड्रग्स-तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध सुरक्षा बलों की बढ़ती सक्रियता को दर्शाता है।

मुख्य घटनाक्रम

त्रिपुरा के खोवाई जिले में असम राइफल्स ने कस्टम विभाग के साथ संयुक्त अभियान चलाते हुए 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया, जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत करीब ₹2.50 करोड़ बताई जा रही है। वहीं, मिजोरम के चंपाई जिले में असम राइफल्स ने 11 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद की, जिनकी कीमत लगभग ₹8.80 करोड़ आंकी गई है।

18 किलोमीटर का पीछा, चालक फरार

रक्षा विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, त्रिपुरा में यह ऑपरेशन खुफिया जानकारी और निरंतर निगरानी के आधार पर किया गया। संयुक्त टीम ने पश्चिम सोनातला से एक संदिग्ध वाहन का पीछा शुरू किया, जो करीब 18 किलोमीटर तक चला। यह पीछा पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिले की सीमा पर स्थित हेजामारा ब्लॉक से पहले बैकुंठपुर गांव में समाप्त हुआ। हालांकि, वाहन का चालक मौके से भागने में सफल रहा और अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

तस्करी का नेटवर्क और अन्य राज्यों से जुड़ाव

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, त्रिपुरा में उत्पादित सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर उपभोग के लिए नहीं होता — इसे बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में तस्करी करके भेजा जाता है, जहाँ इसकी कीमत कहीं अधिक मिलती है। गौरतलब है कि राज्य पुलिस, असम राइफल्स, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (TSR) और अन्य सुरक्षा बल संयुक्त रूप से बांग्लादेश से सटे सेपाहिजाला जिले सहित विभिन्न इलाकों में अवैध गांजे की खेती को अक्सर नष्ट करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर-पूर्व को 'गोल्डन ट्रायएंगल' के ड्रग्स सप्लाई रूट पर एक संवेदनशील कड़ी माना जाता है।

लगातार जारी है अभियान

यह कार्रवाई 9 अक्टूबर को असम राइफल्स द्वारा कस्टम विभाग के साथ मिलकर की गई एक अन्य बड़ी कार्रवाई के एक दिन बाद हुई है, जो दर्शाता है कि सुरक्षा बल लगातार और सघन अभियान चला रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियाँ ड्रग्स सिंडिकेट के नेटवर्क को तोड़ने के लिए खुफिया तंत्र और फील्ड निगरानी दोनों का उपयोग कर रही हैं।

आम जनता और युवाओं पर असर

अधिकारियों का कहना है कि इन ऑपरेशनों का मूल उद्देश्य उत्तर-पूर्व के युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचाना और क्षेत्र को ड्रग्स-मुक्त बनाना है। आलोचकों का कहना है कि जब तक तस्करी नेटवर्क के मुख्य सूत्रधारों को नहीं पकड़ा जाता, केवल माल की बरामदगी से दीर्घकालिक समाधान नहीं होगा। फिर भी, इस स्तर की संयुक्त कार्रवाइयाँ क्षेत्र में नशा-तस्करी पर अंकुश लगाने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 'गोल्डन ट्रायएंगल' से सप्लाई चेन के ज़रिए पूरे देश में फैली है। लेकिन असली सवाल यह है कि 18 किलोमीटर के पीछे के बाद भी चालक का भाग जाना और माल के मूल स्रोत तक न पहुँच पाना दर्शाता है कि सिंडिकेट का नेटवर्क अब भी सुरक्षा बलों से एक कदम आगे है। बरामदगी की संख्या बढ़ना सफलता का संकेत है, लेकिन जब तक मुख्य आपूर्तिकर्ताओं और भ्रष्ट मध्यस्थों पर शिकंजा नहीं कसा जाता, तब तक यह 'व्हैक-अ-मोल' की रणनीति बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम राइफल्स ने त्रिपुरा और मिजोरम में क्या जब्त किया?
असम राइफल्स ने 10 अक्टूबर 2026 को त्रिपुरा के खोवाई जिले में 501 किलोग्राम गांजा (~₹2.50 करोड़) और मिजोरम के चंपाई जिले में 11 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट (~₹8.80 करोड़) जब्त की। दोनों कार्रवाइयाँ स्पीयर कॉर्प्स के तहत की गईं और कुल बरामदगी ₹11.30 करोड़ से अधिक की है।
त्रिपुरा में वाहन का पीछा कहाँ और कितनी दूर तक हुआ?
संयुक्त टीम ने पश्चिम सोनातला से संदिग्ध वाहन का पीछा शुरू किया, जो करीब 18 किलोमीटर तक चला और बैकुंठपुर गांव में समाप्त हुआ। वाहन का चालक मौके से भागने में सफल रहा और अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।
त्रिपुरा में पकड़ा गया गांजा कहाँ भेजा जाता है?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, त्रिपुरा में उत्पादित सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर उपभोग के लिए नहीं होता। इसे बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में तस्करी करके भेजा जाता है, जहाँ इसकी ऊँची कीमत मिलती है।
उत्तर-पूर्व में ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए कौन-कौन से बल काम कर रहे हैं?
असम राइफल्स, राज्य पुलिस, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (TSR), कस्टम विभाग और अन्य सुरक्षा बल संयुक्त अभियानों में शामिल हैं। ये बल विशेष रूप से बांग्लादेश से सटे सेपाहिजाला जिले सहित संवेदनशील इलाकों में अवैध गांजे की खेती नष्ट करने और तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने का काम करते हैं।
क्या यह पहली बार है जब असम राइफल्स ने इस क्षेत्र में इतनी बड़ी बरामदगी की है?
नहीं, यह कार्रवाई 9 अक्टूबर को हुई एक अन्य बड़ी छापेमारी के अगले दिन की गई है। उत्तर-पूर्व में असम राइफल्स और अन्य सुरक्षा बल नियमित रूप से ऐसे संयुक्त ऑपरेशन करते रहे हैं, जो दर्शाता है कि इस क्षेत्र में ड्रग्स-तस्करी एक लगातार चुनौती बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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