त्रिपुरा में असम राइफल्स ने ₹2 करोड़ की मेथामफेटामाइन गोलियाँ जब्त कीं, एक तस्कर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
असम राइफल्स ने 12 अक्टूबर 2026 को त्रिपुरा के पश्चिम त्रिपुरा जिले के मोहनपुर में एक संयुक्त अभियान के दौरान ₹2 करोड़ से अधिक मूल्य की प्रतिबंधित मेथामफेटामाइन टैबलेट जब्त कीं और एक संदिग्ध ड्रग तस्कर को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई फील्ड इंटेलिजेंस यूनिट और सीमा शुल्क विभाग, अगरतला के साथ समन्वय में की गई।
जब्ती का विवरण
अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में 1.994 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद की गईं, जिन्हें आमतौर पर याबा टैबलेट के नाम से भी जाना जाता है। इनका बाज़ार मूल्य लगभग ₹2 करोड़ आँका गया है। मोहनपुर निवासी गिरफ्तार संदिग्ध से एक बाइक भी ज़ब्त की गई।
गिरफ्तार व्यक्ति, बरामद प्रतिबंधित सामग्री और दोपहिया वाहन को आगे की विधिक जाँच के लिए अगरतला स्थित सीमा शुल्क विभाग को सौंप दिया गया है।
पिछले सप्ताह की बड़ी बरामदगी
यह अभियान असम राइफल्स की हालिया सक्रियता की एक कड़ी है। पिछले सप्ताह खोवाई जिले में सीमा शुल्क विभाग के साथ दो अलग-अलग अभियानों में लगभग ₹4.24 करोड़ मूल्य का 841 किलोग्राम गांजा भी जब्त किया गया था।
गौरतलब है कि ये दोनों अभियान मादक पदार्थों की तस्करी पर नकेल कसने के व्यापक अभियान के तहत चलाए गए, जिसमें असम राइफल्स और सीमा शुल्क अधिकारी संयुक्त रूप से भूमिका निभा रहे हैं।
त्रिपुरा में ड्रग तस्करी का बड़ा नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राज्य पुलिस, असम राइफल्स, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (TSR) और अन्य सुरक्षा बल संयुक्त अभियानों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में गांजे की अवैध खेती को नष्ट करते रहते हैं। विशेष रूप से सेपाहिजाला जिला, जो बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करता है, तस्करी के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, त्रिपुरा में उत्पादित सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर उपयोग नहीं होता — इसे बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में ऊँची कीमत पर तस्करी कर भेजा जाता है। परिवहन के दौरान यह खेप ट्रकों, छोटे वाहनों और यहाँ तक कि यात्री ट्रेनों से भी बरामद की जाती रही है।
असम राइफल्स की प्रतिबद्धता
असम राइफल्स ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि वह त्रिपुरा में अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वित अभियानों के ज़रिये मादक पदार्थों की तस्करी के खतरे से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान दिया जा सके।
यह लगातार हो रही बरामदगियाँ संकेत देती हैं कि पूर्वोत्तर भारत की सीमाएँ नशीले पदार्थों की तस्करी के लिहाज़ से अत्यंत संवेदनशील बनी हुई हैं और सुरक्षा बल इस चुनौती से निपटने के लिए अपनी रणनीति को और पैना करते जा रहे हैं।