क्या अगस्त में भारतीय शेयर बाजार को एफआईआई की बिकवाली के बीच डीआईआई की खरीदारी और जीएसटी सुधारों से समर्थन मिला?

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क्या अगस्त में भारतीय शेयर बाजार को एफआईआई की बिकवाली के बीच डीआईआई की खरीदारी और जीएसटी सुधारों से समर्थन मिला?

सारांश

अगस्त में भारतीय शेयर बाजार ने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन घरेलू निवेशकों की खरीदारी और जीएसटी सुधारों के चलते बाजार ने गिरावट से बचने में सफलता पाई। जानिए कैसे ये कारक बाजार को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

मुख्य बातें

घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया।
एफआईआई की बिकवाली का प्रभाव कम हुआ।
जीएसटी सुधारों ने बाजार में विश्वास जगाया।
मजबूत जीडीपी आंकड़ों ने सकारात्मक माहौल बनाया।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में तेजी आई।

नई दिल्ली, 12 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के चलते उठी चिंताओं और चार अरब डॉलर से अधिक की एफआईआई की बिकवाली के बावजूद, भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट को कई कारकों ने रोका है। इन कारकों में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की खरीदारी, जीएसटी दरों को राशनलाइज करने की उम्मीद, पहली तिमाही के मजबूत जीडीपी आंकड़े और ऑटोमोबाइल शेयरों में तेजी शामिल हैं। यह जानकारी हाल ही में आई एक रिपोर्ट में साझा की गई।

एचएसबीसी म्यूचुअल फंड के अनुसार, डीआईआई ने 10.8 अरब डॉलर का निवेश किया, जिससे एफआईआई द्वारा की गई 4.3 अरब डॉलर की बिकवाली की भरपाई हो गई। इसके फलस्वरूप, अगस्त में बाजार में केवल मामूली गिरावट आई। सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः 1.5 प्रतिशत और 1.2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को मजबूत सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र का समर्थन प्राप्त था। जुलाई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक घटकर 1.6 प्रतिशत रह गया, जो पिछले आठ वर्षों में सबसे कम है, जिससे बाजार में खरीदारी को बल मिला।

ऑटो सेक्टर ने जीएसटी दरों में कटौती का लाभ उठाते हुए शानदार प्रदर्शन किया, जबकि ऑयल एंड गैस, बिजली और रियल एस्टेट क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर रहे।

एसएंडपी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को बीबीबी- से बढ़ाकर बीबीबी (स्टेबल) कर दिया, जो लगभग दो दशकों में पहली बार हुआ, जिससे इस महीने शेयर बाजार को भी बढ़ावा मिला।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के अमेरिकी निर्णय का करेंसी, इक्विटी और बॉन्ड बाजारों पर असर पड़ा। राजकोषीय चिंताओं के कारण भारतीय मुद्रा कमजोर हुई।

जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने की उम्मीद है, हालांकि कमजोर कर संग्रह और जीएसटी दरों को राशनलाइज करने से कुछ जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई ने 2025 में ब्याज दरों में 100 आधार अंकों की कटौती करने की योजना बनाई है और इसमें कुछ समय लग सकता है।

इस बीच, लिक्विडिटी पर्याप्त बनी हुई है, जिससे डेट मार्केट में अल्पकालिक यील्ड को समर्थन मिल रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक व्यापार संबंधी चुनौतियों और टैरिफ दबावों के बावजूद, भारत के मैक्रो फंडामेंटल बेहतरीन जीडीपी वृद्धि, सौम्य मुद्रास्फीति और एक सहायक नीतिगत पृष्ठभूमि के साथ मजबूत बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफआईआई और डीआईआई क्या होते हैं?
एफआईआई का मतलब है विदेशी संस्थागत निवेशक, जबकि डीआईआई का मतलब है घरेलू संस्थागत निवेशक। ये दोनों निवेशक समूह शेयर बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जीएसटी सुधारों से क्या लाभ होता है?
जीएसटी सुधारों से व्यापार की सुगमता बढ़ती है, जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार होता है और उपभोक्ता के लिए कीमतें भी नियंत्रित रहती हैं।
राष्ट्र प्रेस