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क्या बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों की अंधाधुंध फायरिंग के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन है?

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क्या बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों की अंधाधुंध फायरिंग के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन है?

सारांश

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों के अत्याचारों के खिलाफ ग्रामीणों का गहरा विरोध, क्या यह बर्बरता अब थम पाएगी? जानिए इस मुद्दे की जड़ें और इसके पीछे का सच्चाई।

मुख्य बातें

बलूचिस्तान में नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग हो रही है।
प्रदर्शनकारियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बलूच विमेन फोरम ने बर्बरता की कड़ी निंदा की है।
लापता छात्रों की बरामदगी की माँग उठाई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

क्वेटा, ११ दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बलूचिस्तान के केच जिले में गुरुवार को स्थानीय ग्रामीणों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों पर की जा रही अंधाधुंध फायरिंग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि पाकिस्तानी बलों की “बर्बर प्रवृत्ति” दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और इसका शिकार आम नागरिक बन रहे हैं।

बलूच विमेन फोरम के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने दोषियों को कड़ी सजा देने और ऐसी घटनाओं पर तात्कालिक रोक लगाने की माँग की है।

यह विरोध ८ दिसंबर को केच जिले के बलगतार के सहाकी इलाके में हुई घटना के बाद शुरू हुआ, जहाँ पाकिस्तानी सुरक्षा कर्मियों ने कथित तौर पर नागरिकों पर गोलीबारी की थी, जिसमें दुरदाना बलूच नामक एक महिला घायल हो गई थी।

बलूच विमेन फोरम ने बयान जारी कर कहा, “पिछले कई वर्षों से बलूचिस्तान को राज्य प्रायोजित बर्बरता की विनाशकारी प्रवृत्ति में धकेल दिया गया है, जिसमें बलूच महिलाओं के जबरन गायब होने, गांवों को बुलडोज़ करने और नागरिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी जैसी घटनाएं शामिल हैं। हम ऐसी हर नीति की कड़ी निंदा करते हैं और इसके खिलाफ जन प्रतिरोध को मजबूती देने की अपील करते हैं।”

संगठन ने आगे कहा कि बलगतार पहले भी सुरक्षा के नाम पर जबरन खाली कराने, महिलाओं के उत्पीड़न और अब मध्यरात्रि में नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग जैसे गंभीर अपराधों का सामना कर चुका है।

बलूच विमेन फोरम ने बलूचिस्तान, विशेषकर बलगतार के नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों को तत्क्षण रोकने और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।

इससे पहले मंगलवार को केच स्थित तुर्बत विश्वविद्यालय के छात्रों ने तीन लापता छात्रों नूर खान नज़र, रहमत हल्को और इमरान ताज की बरामदगी की मांग को लेकर परिसर में विरोध रैली निकाली थी। द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्र हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर कैम्पस में मार्च कर रहे थे।

छात्र नेताओं के अनुसार, नूर खान नज़र ६ दिसंबर से, रहमत हल्को ५ अक्टूबर से और इमरान ताज २१ जून से लापता हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अब तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। इस चुप्पी के कारण परिवारों और छात्रों के बीच गहरी चिंता और मानसिक तनाव बढ़ गया है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर लापता छात्रों को जल्द बरामद नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने बलूचिस्तान में युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमारे देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि रही है। ऐसे मुद्दे, जहां नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, हमें एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए। सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों की रक्षा करें, न कि उन्हें खतरे में डालें।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में हालात क्यों बिगड़ रहे हैं?
पाकिस्तानी बलों की बर्बरता और स्थानीय नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग के कारण हालात बिगड़ रहे हैं।
प्रदर्शन में कौन शामिल हैं?
प्रदर्शन में स्थानीय ग्रामीण और बलूच विमेन फोरम शामिल हैं।
लापता छात्रों के बारे में क्या जानकारी है?
लापता छात्रों की स्थिति को लेकर परिवार और छात्रों में चिंता बढ़ रही है।
क्या प्रदर्शनकारी सरकार से कोई कार्रवाई की मांग कर रहे हैं?
हाँ, प्रदर्शनकारी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
क्या यह प्रदर्शन प्रभावी होगा?
प्रदर्शन का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और सरकार को कार्रवाई के लिए मजबूर करना है।
राष्ट्र प्रेस
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